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सीजन फैशन की भक्ति का

Posted On: 18 Sep, 2010 Others में

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सावन का महीना जहाँ देखिये वहीँ हरियाली है सब कुछ धुला धूला हुआ बस सड़कों का छोड़ दिया जाये तो प्रकृति से जुडी  हर चीज धुल गयी है सरकारी कार्य का तो  आम इन्सान कुछ कर नहीं सकता खुद सरकार अपने विभाग की सुध नहीं लेती प्रकृति  तो फिर प्रकृति है उसके भी बस से बाहर  की  बात है सड़कों को बरसात में सलामत रखना उसका इलाज तो हमारे पास भी नहीं …………………अरे बात तो सावन की हो रही थी और हम भटक गए यार जब भी सरकार की बात होगी हर इन्सान भटकेगा खैर  छोडिये सरकार की बातों को

सावन का महीना आते ही मन मयूर नाच उठता है गर्मी की तपती दुपहरी से राहत  मिल जाती है वहीँ कई बार छुट्टी का मौका भी मिल जाता है अमा यार जब सडको में पानी भरा रहेगा तो छुट्टी तो हो ही जाएगी न कहीं भी जाने से

ऐसे ही एक दिन हम घर में थे तो पता चला आने वाले रविवार को महाशिवरात्रि है वैसे तो सावन का महीना ही शिव जी को समर्पित है मगर शिवरात्रि का खास महत्त्व है अगर कोई व्यक्ति पूरे साल भी पूजा अर्चना न करे इस दिन अगर शिव जी की आराधना भर से उसके सारे कष्ट दूर हो जाते है अब इतना बड़ा पर्व जहाँ पाप दूर हो रहे हो उसके कष्ट मिट रहे हो उसके लिए हर किसी के दिल में उत्त्साह तो होना लाजमी है

आम्मा सुबह से कह रही है कि कल शिव जी के  जलाभिषेक के लिए जाना है  बेलपत्र  फूल ला दे . हम चले जायेंगे की रट लगाये थे हिल नहीं रहे थे, कब तक आम्मा हमारे लारे में बैठी रहती तो उनका शिव महिमा का गुणगान शुरू हो गया ………………एक हमारे घर ही नालायक ने जन्म लेना था सारी दुनिया हरिद्वार कांवड़ के लिए जा रही है एक ये नास्तिक है की जो थोड़ी दूर से बेलपत्र फूल नहीं ला सकता उन का बडबडाना शुरू होना था की हम भी चल दिए गुस्से में उठ के

चौक में जा कर सोचा कुछ हाल चल जान आये और थोडा अम्मा का काम भी कर आयें …………चौक में आज पहले जैसी चहलपहल नहीं थी हम सोच में पड़ गए ऐसा तो पहले कभी नहीं देखा ये बिन मौसम के इतनी भीड़  कैसी  जानने के लिए विष्णु की दुकान में पहुँच गए जहाँ हम को पता था सारी जानकारी मिल जाएगी अरे जहाँ फलां घर में क्या चल रहा है ये तक पता होता है तो भीड़ का तो जरुर पता होना था … हम जैसे ही आगे बढे हम को अपने एक परिचित मिल गए …….कहने लगे क्या बात भैय्या आप भी जा रहे हो …………………हमने जरा आश्चर्य से पूछा ..क्यूँ भाई कहाँ जाना है जो हम चले …… अब हम से जयादा चौंकाने की बारी उन की थी बड़े ही आश्चर्य से हम को देखने लगा जैसे हम लादेन के रिश्तेदार हो ………अब हम से रहा न गया हम पूछ ही बैठे की भाईसाहब ऐसी क्या गलती हो गयी हम से जो ऐसी शक भरी नजरो से देख रहे हो…………वो सज्जन बड़े राज से हमारे पास आ के बोले क्यूँ कांवड़ के लिए हरिद्वर नहीं जा रहे हो……………………उनका इतना कहना था की हम बुरी तरह चौंक कर उनकी तरफ देखते है अरे जिन्होंने पूरे  साल भगवन का नाम न लिया हो कोई धर्म का काम न किया हो एक नंबर के आवारा वो हम को ये बात बोल रहा है ……………थोडा अपने को सामान्य बनाते हुए हमने कहा नहीं हम तो नहीं जा रहे है . क्या आप जा रहे हो?? बड़ा सा हाँ करते हुए बोले हम सभी जा रहे है तू भी चलता तो मजा आ जाता ..

हमने कहा इसमें मजे की क्या बात है ..वो बोला अरे बड़ा मजा आता है  सारे  रास्ते  हंगामा करते हुए जायेंगे वापसी में बम भोले बम भोले की जयकार करते हुए आयेंगे

हमने सोचा अम्मा अभी इन्ही लोगो का गुणगान कर रही थी हम को नालायक और इनको महान बोल रही थी हम उन महान  सज्जन से विदा ले कर अपने परिचित के यहाँ बेलपत्र और फूल लेने के लिए चल दिए

वहां पहुंचे तो हम थोडा सा डर गए देखा वहां खूब भीड़ हो रही है मन में आशंका ले कर हम आगे बढ़ रहे थे दिल ही दिल में किसी अनहोनी की आशंका से हम डरे जा रहे थे जैसे तैसे हम भीड़ के  करीब पहुंचे मामला अपने आप साफ़ हो गया यहाँ भी शिव  भक्तो का रेला था हर कोई छीना झपटी  में लीन था हम बचते बचाते अपने परिचित से मिलने को बढ़ ही रहे थे तो देखा   वो वहां खिड़की से खड़े सीधा प्रसारण का मजा ले रहे थे हमने वहीँ से प्रणाम किया वो भी मुस्कुराते हुए मिले कहने लगे क्यूँ भाई तुम भी अपना पाप   धोना चाहते हो इन पापियों  की भीड़ में अपना नाम लिखना चाहते हो ………………….हमने कहा अभी तो इन झaझट  से दूरी भली अम्माजी के आदेश से यहाँ आये है

हम जरा सिफारिशी अंदाज में उनसे बेलपत्र जल्दी दिलवाने का बोले तो परिचित जरा हँसते हुए बोले

हम अभी खुद प्रतीक्षा में है आईये तब तक चाय का आनंद लेते है हमे ये उपाय उपयुक्त लगा जितना चाय बनती हम भी सीधा प्रसारण देखने लगे लोगो को एक दुसरे का सर फोड़ते हुए आनंद विभोर होते रहे

थोड़ी देर में चाय पी कर और कुछ बेलपत्र का इंतजाम कर घर को चल दिए और सोचने लगे ये तो सीजन ही है भक्ति का अब हर ऐरा गैर इस रस में डूबा है तो उसमे कोई आश्चर्य नहीं ……….इस ही सोच में घर पहुंचे आम्मा जी का गुस्सा भी अब शांत हो चुका था

हम बड़ी बेताबी से दुसरे दिन का इंतजार कर रहे थे हम देखना चाहते थे की कांवड़ियों  इस भीड़ में कौन कौन शामिल है, कोई सच्ची श्रद्धा  और निष्ठा मन में है या हुड़दंग का अरमान लिए ये सीजन फैशन की भक्ति का है ………………..

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
September 18, 2010

div81 जी, मौसमी ज्वर और मौसमी त्योहारों की ही तरह देवताओं के भी मौसम होते है हैं हलाकि इनमे से कुछ आल टाइम हिट हैं ऐसा सतही स्तर पर लगता है लेकिन वास्तविकता यह है कि ईश्वर की एक विशेष शक्ति एक समय विशेष पर सर्वाधिक प्रभावी होने से ही श्रृष्टि का संचालन उपयुक्त ढंग से हो सकता है इसीलिए हम एक निश्चित समय में एक ईश्वर के एक निश्चित रूप की आराधना को अधिक बल देते हैं | वैसे मैं स्वयं एक विधर्मी होने के नाते ईश्वर के किसी भी रूप की आराधना में दिलचस्पी नहीं रखता परन्तु अन्य धर्मावलम्बियों की श्रद्धा का सम्मान कने में व् उनकी आस्था को सम्मान देने में मुझे कहीं न कहीं ख़ुशी का अहसास होता है| अच्छी पोस्ट बार बधाई!

    div81 के द्वारा
    September 19, 2010

    चातक जी आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………

आर.एन. शाही के द्वारा
September 18, 2010

दिव’81 जी हमारी सारी गतिविधियां ही शायद मन की शांति और आत्मा की संतुष्टि के लिये ही प्रेरित होती हैं । लोग इस अभीष्ट को अपने-अपने मनोभावों के आधार पर प्राप्त करते हैं । काँवड़ के रास्ते में भंग और गांजे की चिलम चढ़ाने वालों का तर्क़ होता है कि ये तो भगवान भोले की प्रिय बूटियां हैं । जब कि वास्तव में वे बूटी अपनी संतुष्टि के लिये चढ़ाते हैं । वैसे ही कोई इसको पिकनिक तो कोई मस्ती की यात्रा मानकर जत्थे में शामिल होता है, तो कोई शुद्ध भक्ति और धार्मिक भाव से । देवघर (झारखंड) के कामना लिंग भगवान रावणेश्वर को जल चढ़ाने हेतु सुल्तानगंज से देवघर के रास्ते का नज़ारा भी वैसा ही होता है, जैसा आपके संस्मरण में है । लेकिन यह निर्विवाद है कि ये सारे क्रियाकलाप समाज को एकदूसरे के साथ मज़बूती से जोड़ने का ही काम करते हैं ।

    div81 के द्वारा
    September 19, 2010

    आर.एन. शाही जी प्रतिक्रिया की लिए शुक्रिया मगर मस्ती और धर्म दोनों साथ नहीं चल सकते

pantg के द्वारा
September 18, 2010

बिलकुल सही बात है…….. रोज न जाने कितने लोगों को कितने तरह से दुःख देकर हम एक दिन के उपवास से या एक बार गंगा स्नान करने मात्र से अपने सारे पापों से मुक्त हो जाते हैं……… अच्छा लेख ……….. हार्दिक बधाई…………. http://piyushpantg.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    September 19, 2010

       puष जी सही कहा आप ने  आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………


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