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आखिर इतना वक़्त क्यूँ ??????????

Posted On: 20 Sep, 2010 Others में

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“पकिस्तान से सक्रीय लश्कर ए तैयबा द्वारा प्रशिक्षण पाए कसाब और उसके 9 साथियों ने मुंबई में 26 नवम्बर 2008 को हो हमला किया था जिसमे 166 लोग मारे गए थे

मुंबई पर 26/11 को हुए हमले के 17महीने के बाद फैसला आया है  3 मई को उसे विशेष अदालत के न्यायधीश ने फैसला सुनते हुए उसे 4 मामलों में दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई पांच अन्य मामलों में उसे उम्र कैद की सजा सुनाई

कसाब को मौत की सजा ये समाचार सुनने के बाद देश में हर तरफ ख़ुशी की लहर फैल गयी हर कोई इस खबर को सुन कर खुश हुआ लोगो ने अपनी ख़ुशी प्रकट करने के लिए या तो मिटाई बाटी या आतिशबाजी की मगर सब के दिलो में सुलगता हुआ सवाल अभी भी है कि जैसे अफजल गुरु को फँसी की सजा सुनाई गयी है और उस गद्दार की याचिका अभी भी राष्ट्रपति के पास है वहीँ दूसरी और कंधार विमान अपहरण कांड जिसमे तीन खूंखार आतंकवादी मसूद अजहर मुश्ताक, अहमद अजहर और शेख  अहमद उमर सईद की रिहाई  के साथ पटाक्षेप हुआ था |

कसाब का अंत कैसे होगा ??????????

इस समय सभी के दिलोदिमाग में एक ही बात होगी कि कसब को सजा तो सुना दी मगर क्या ये सजा जल्द से जल्द उस दरिन्दे को मिलेगी भी या यूँ ही हम सब देखते रहेंगे कि कब उसको मृत्यु दंड दिया जायेगा और इस बीच फिर कोई विमान का अपरहण कर के उस किलर मशीन को छुड़ाने का नया ड्रामा रचेगा और हम सिर्फ हाथ में हाथ रखे बैठे रहेंगे हम को कसाब और अफजल जैसे आतंकवादियों को जल्द से जल्द सजा दे कर एक ऐसा सबक सीखन चाहिए जो अपने देश के साथ गद्दारी करते है तथा उन हजारो नए कसाब जैसे लोगो को जो तैयार हो रहे हैं मासूमों कि हत्या करने के लिए, देश को क्षति पहुँचाने के लिए, उन सभी दुश्मनों को ये एक सन्देश होगा कि जिसके भी नापाक इरादे इस देश को, यहाँ के बाशिंदों पर हमला करेंगे उसका हश्र ये होगा

क्यूँ कसाब पर हर रोज के 2 लाख रुपये खर्च किये जा रहे हैं ये लाखो रुपये देश के उन पिछड़े और अविकसित जगहों में किये जाये तो हमारा देश ही प्रगति के रस्ते में एक कदम और आगे बढेगा इन रुपयों को देश के उन जांबाज सैनिको के ऊपर खर्च किया जाना चाहिए जो अपने प्राणों कि चिंता किये बगैर देश कि रक्षा के लिए असुविधा में रह रहे हैं

हमारे देश में एक  ऐसा  कानून क्यूँ नहीं बनता जिसमे देश के गद्दारों को शीघ्र अति शीघ्र सजा का प्रावधान हो लम्बी न्यायिक प्रक्रिया न हो

कानून के अनुसार कसब को दी गयी मौत कि सजा को अभी उच्च न्यायलय द्वारा पुष्ट करना होगा कसब के पास निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायलय में भी चुनौती  का अधिकार है उच्च न्यायलय का यह फैसला कायम रखने के बाद कसब उच्चतम न्यायलय में अपील कर सकता है यहाँ से भी सजा कायम रहने पर उसके पास राष्ट्रपति के सक्षम दया याचिका का अधिकार होगा

उस शैतान को क्यूँ इअतनी सुविधा दी जा रही है ?????????? पुख्ता सबूतों के साथ उन 600 गवाहों के बाद भी क्यूँ उस हत्यारे को मौका दिया जा रहा है ???????????

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Avi के द्वारा
October 7, 2010

Sabse pahle to aapko bahut-bahut badhai ki aapne apne suvicharo ko hum sab se share kiye. ye sawal to har sachche bhartiya ke dil me baar baar uthta hai.gussa aata hai phir apne desh ke kanoon aur netaon par nikala jaata hai.. jabki sabse jyada galat to hum swayam hain kyunki jahan tak netaon ki baat hai to unhe hum log hi chunte hain to hum unhe kaise dosh de sakte hain, hum me se jyadatar log vote dete samay vyakti vishesh se jyada parti vishesh ko dhyan me rakh kar vote dete hain, kai logo ko to apne kshetra ke sabhi ummeedwaro ka naam bhi nahi pata hota hai, aur jahan tak rahi iss desh ke kanoon ki baat to humare desh ka samvidhan aisi paristhiti me bana tha jaha par kuchh to angrejo ne aur kuchh hum logo ne hum logo ko bant rakha tha kahin jaati ke aadhar par to kahin dharm ke aadhar par to aise me jab samvidhan bana to ye iss baat par jor diya gaya ki kisi ke saath kisi bhi prakar ka bhedbahav na ho jaaye, iss baat par jor diya gaya ki chahe 10 gunahgaar chhoot jaye par kisi begunah ko saja na ho, shayed kuchh kamiya hum sab ki hain ki bahar ke log aakar iss baat ka fayda utha rahe hain, hum logo me kurbani ka jajba kahin kho gaya hai agar wo jajba jo bhagat singh ji , rajguru ji, aazad ji aur subhash chand bose ji me tha wo hota to kabhi kandhar me aatankvaadi chhode nahi jaate… phir bhi hum agar hum chahte hain ki desh ke gaddaro ko sighra se sighra saja mile to har bhartiya ko apne vote ka mahatva samajhna padega. Jai Hind.

Pawan Tiwari के द्वारा
September 29, 2010

हर तरफ राजनीतिक रोटियां सेंकी जाती हैं…कोई कहता है कि कसाब को फांसी मिलनी चाहिए तो कोई यही बात रोकने कि कोशिश करता है…सच तो ये है यहाँ का संविधान ही ऐसा है बुरे लोगों को बचाया जाता है जबकि अच्छे लोगों कि सुनी ही नहीं जाती..

I.S.RATHORE के द्वारा
September 20, 2010

DIVYAA JEE, OUR CONSITITUTION ,LAYERS AND MAGISTRATE ARE SO MUCH LAZY, MOSTLY SUCH CASES ARE DELAY AND DISTRUBED TIME TO TIME AGAIN & AGAIN BY POLITICIANS.

    div81 के द्वारा
    September 21, 2010

    Thanks for your comment.

आर.एन. शाही के द्वारा
September 20, 2010

दिव्या जी आपकी चिन्ता वाज़िब है । यह वाक़ई समझ से बाहर है कि एक खूंखार आतताई को बिरयानी खिला-खिला कर मोटा करने का सबब आखिर है क्या? और क्या हासिल होना है उससे जो हम इंतज़ार किये जा रहे हैं । इस देश की राजनीति का यह रहस्यमय स्वरूप हमेशा से खटकने वाला रहा है, जिसके लिये हमने बड़ी-बड़ी क़ीमतें चुकाई हैं । बधाई ।

    div81 के द्वारा
    September 21, 2010

    आर.एन. शाही जी आप की प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद , -राजनेता सैनिको की सहादत को नहीं समझ सकते क्यूँ की उनके घर से सैनिक नहीं नए धूर्त नेता निकलते है

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
September 20, 2010

अक्सर यही कहा जाता है की हमारे देश का कानून लचर है……….. पर ये कहने वाले ये भूल जाते हैं… की जब कानून ऐसे फैसले देता है.. जिनमे कसाब जैसे लोगों को फांसी की सजा का फैसला होता है तो राजनीति करने वाले लोग इस फैसले को अपने वोट बैंक से जोड़ लेते हैं…….. और जब तक ऐसा होगा तब तक कानून के बदलने का कोई फायदा नहीं……… पहले ये सोच बदलनी होगी……. अच्छा लेख………….. हार्दिक बधाई……………

    div81 के द्वारा
    September 21, 2010

    आप ने सही कहा कि हमको पहले सोच बदलनी होगी साथ ही ऐसे नेताओं को भी जिनको हम चुन लेते है पियूष जी आप की प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया

vijai kaushal के द्वारा
September 20, 2010

gr8 way to express anger . this is pseudo-secularism. gr8 people are talking abt bhagwa aatankwad but they are ignoring real terrorism. see also kaushalvijai.jagranjunction.com


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