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अनसुलझा सा राज हूँ

Posted On: 23 Sep, 2010 Others में

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4aleksejzajcev18f96e

जब सोचती  हूँ , कौन हूँ मैं

तो  लगता  है , सारी दुनिया  सी हूँ मैं

कभी  लगता  है कुछ अधूरी सी हूँ मैं,

कभी लगता है नील गगन सी विशाल हूँ मैं

तो दुसरे पल लगता है जर्रे के आस पास हूँ मैं

कभी लगता है एक किताब हूँ मैं

तो कभी  अनसुलझा सा राज हूँ मैं

कभी अपने आप मे ही एक सवाल हूँ मैं

कभी एक छोटा सा जवाब हूँ मैं

कभी अठखेलीयां करती लहर हूँ मैं

कभी सुनामी सा कहर हूँ  मैं .

कभी सुन्दर सा ख्वाब हूँ मैं.

और  कभी खाली हाथ हूँ मैं ……..

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chadndra kailash के द्वारा
October 19, 2010

        jajba har kisi mai nahi hota, dil -a-hal kahne ka khud ko mitana padta hai- kisi ko apna banane ke liye matlabi kya janenge ise , pyar mai mitna padta hai unhein pane ke liye this is for your feeling thanks

    div81 के द्वारा
    October 20, 2010

    बहुत खूब कैलाश जी जज्बा हर किसी में नहीं होता, दिल-ए-हाल कहने का खुबसुरत पंक्तियों में प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद |

Avi के द्वारा
October 8, 2010

Behatarin shabdo se rachi gai chhoti si kintu behatarin rachna…. badhai ki patra ho tum.

Pawan Tiwari के द्वारा
September 29, 2010

बहुत ही अच्छी कविता है…सच तो ये है कि हर तरफ से ये नारी रूप आकर्षक लगा…

    div81 के द्वारा
    October 2, 2010

    आप को कविता पसंद आई धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
September 28, 2010

आपने जीवन को पलों को कविता के रूप में ढाला है, वास्तव में हम अलग अलग छन में कुछ अलग ही महसूस करते हैं. सुन्दर कविता के लिए बधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    October 2, 2010

    सुनदर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

Tufail A. Siddequi के द्वारा
September 25, 2010

बधाई.

    div81 के द्वारा
    September 28, 2010

    तुफैल जी आप की प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

kamlesh pandey , हल्द्वानी के द्वारा
September 24, 2010

सुन्दर सा ख्वाब हूँ मैं. अच्छा प्रयास, अच्छी कविता बधाई

    div81 के द्वारा
    September 25, 2010

    कमलेश जी, आप की प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

मनोज के द्वारा
September 23, 2010

गागर में सागर

    div81 के द्वारा
    September 25, 2010

    मनोज जी गागर में सागर ये मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी, ये तो मेरा छोटा सा प्रयास है मेरी हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
September 23, 2010

खूबसूरत परिचय दिया है आपने अपना………….. स्वयं के काव्यात्मक परिचय के लिए आप को हार्दिक बधाई…………….

    div81 के द्वारा
    September 25, 2010

    पियूष जी आप को मेरा काव्यात्मक परिचय पसंद आया इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया

Dharmesh Tiwari के द्वारा
September 23, 2010

बहुत सुन्दर प्रस्तुती

    div81 के द्वारा
    September 25, 2010

    धर्मेश जी आप को मेरी कविता पसंद आई इसके लिए मैं आभारी हूँ उम्मीद है आप ऐसे ही मेरा हौसला बढ़ाते रहेंगे सह धन्यवाद

chaatak के द्वारा
September 23, 2010

खूब्सूरक भावों को मानस पटल उकेरती कविता के लेखन पर बधाई!

    chaatak के द्वारा
    September 23, 2010

    typo- X खूबसूरत

    div81 के द्वारा
    September 25, 2010

    चातक जी आप को मेरे कविता पसंद आई इसके लिए धन्यवाद


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