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"ऐसा हो गर जहाँ कोई"

Posted On: 18 Oct, 2010 Others में

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दुनियां से अलग एक जहाँ बनाना चाहती हूँ

मैं एक ऐसी दुनियां बसाना चाहती हूँ

जहाँ गम के बादल ठहरते न हो

आंसू की बारिश बरसती न हो

जहाँ लोगो का विश्वास हो अपनों पर

दुखो का बाज़ार सजता न हो

सजती हो जहाँ पर महफिलें दोस्तों की

दुश्मनों का पता कोई पूछता न हो

जहाँ दुनियां हो पर दुनियांदारी न हो

जहाँ दिल से मिले दिल उसमे मेहरबानी न हो

जुबान में दुआएं हो, किसी की दुवांये खाली न हो

टूटे  बिखरे न कोई ख्वाब हो

मंजिलें बासिंदों की खुद तलबगार हो

जहाँ प्यार का नाम सिर्फ मिलन हो

जहाँ राधा की मोहन से जुदाई न हो

“मोहबत जहाँ सब की पूरी हो अधूरी न कोई कहानी हो”

जहाँ दर्द भी सब का अपना सा हो

एक आँख का मोती सब के संग ढले तो वो सागर का सा पानी हो

मैं एक ऐसी दुनियां बसाना चाहती हूँ

दुनियां से अलग एक जहाँ बनाना चाहती हूँ

“DIV”

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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

तरुण कुमार ,सावन के द्वारा
November 22, 2012

बहुत अच्र्छी लगी आपकी यह कविता

Coolbaby के द्वारा
October 31, 2010

दुनियां से अलग एक जहाँ बनाना चाहती हूँ Sorry But I want this among my world, What is world ? For me its my surroundings………..the whole world is out of my reach so I try to make my where around the best as possible, who says its impossible actually he does not work in possible way, we should dream but everything takes its place as smallest form, but it evolves ,at least we hope (my words whether i am not a kavi) kyun khwab dekhen kyun khwab dikhare, chalo pas baite logo ko hansayen, ek hansti basti duniya basayen. Blessings

vinay sharma के द्वारा
October 31, 2010

बहुत अच्छी रचना हे हम तो कायल हो गए आपके…………………

Nikhil के द्वारा
October 23, 2010

बहुत खूबसूरत रचना. आभार, निखिल झा

    div81 के द्वारा
    October 24, 2010

    आप का बहुत बहुत शुक्रिया

harish के द्वारा
October 20, 2010

कविता को पढ़ते समय वैसी ही दुनिया में खुद के होने का अहसास होता है. जैसी दुनिया आप चाहती है. सोचते तो सब है पर शब्दों से एक नयी दुनिया की रचना करना बहुत सुखद अहसास है. इस कविता के लिए बधाई.

    div81 के द्वारा
    October 24, 2010

    ये मेरी खुशकिस्मती है की आप उस दुनिया में पहुंचे कविता के माध्यम से ही सही | सुखद अहसास आप की टिप्पणी का, आप का बहुत बहुत शुक्रिया

chadndra kailash के द्वारा
October 20, 2010

    Dreams are trues every time . for Dreams of ur poet expressed no limitations . this is feeling of god not human or u . u r god talking ur feeling or message to un-consious public

    chadndra kailash के द्वारा
    October 24, 2010

    maine apke comment ke liye blog dekha . apne koi comment nahi kiya . kyoun this r only try exdpress emotions . emotions majboor karte hain hamein likhne ke liye .

    div81 के द्वारा
    October 24, 2010

    मैंने दिल से क्षमा चाहूंगी | कोशिश के बावजूद यह उल्लास रह गया हर काम में हमेशा कोई काम रह गया ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी आप की टिप्पणी को जवाब दे रही थी मगर कोड इन्वेलिड आ रहा था ऐसा दो तीन बार हुआ तो मैंने सोचा बाद में अपना जवाब पोस्ट करुँगी मगर यहाँ पावर कट हो गया था | The excellent words said by Dr. Abdul Kalam………… \" Dream is not that what you see in sleep ……dream is the thing which dose not allow you to sleep\" . thanks for comment.

sdvajpayee के द्वारा
October 19, 2010

    ’रामराज’ का स्‍वपनिल विचार। जहां ‘त्रिविध ताप काहू नहिं ब्‍यापा ‘ और ‘ बारिद मांगे देहिं जल’ की    सुखमयी स्थिति होती है। ऐसी मोहक विचार- कल्‍पना क्षणिक ही सही एक सुखद एहसास तो कराती ही है। ”दुनियां” के बजाए दुनिया लिखना ठीक होगा।

    div81 के द्वारा
    October 20, 2010

    वाजपेयी सर जी, गलती के लिए माफ़ी चाहूंगी कोशिश करुँगी ऐसी गलती दोबारा न हो | आप की प्रतिक्रिया और गलती को स्पष्ट करने के लिए धन्यवाद |

chadndra kailash के द्वारा
October 19, 2010

      u r writing deeply. i m very impressed your feelings which is hearted to dil . its not a thought . it is emotions to live life with love and god .

    div81 के द्वारा
    October 20, 2010

    Our truest life is when we are in our dreams awake. thanks for comment.

subhash के द्वारा
October 19, 2010

thoda wait karo mangal par jeevan ke kuchh nisaan mile hai bas vahin duniya basaye………………… very good poem really appreciable

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    तो आप को भी लगता है ये सब पृथ्वी में सम्भव नहीं तो क्या ये संभव नहीं की मंगल में जाकर हम उसे जंगल बना दे | कोशिश यहीं से शुरू करनी होगी शुक्रिया

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 19, 2010

नमस्कार दिव जी,आपने बहुत अच्छे एक जहाँ की कल्पना कर डाली है…………जहाँ गम के बादल ठहरते न हो आंसू की बारिश बरसती न हो…………..वाक्य्यी अगर ऐसी जगह हो तो कितना अच्छा होगा! और हाँ अगर आप बुरा न माने तो आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ,खैर पूछ ही लेता हूँ,…………. दिव जी आपका नाम दिव ही है या कुछ और है क्योंकि यहाँ निचे कुछ बंधुओं ने आपका नाम दिव्या जी लिखा है,लेकिन आपने अपने कविता की लाईनों के अंत में दिव ही लिखा है सो थोडा कन्फ्युसन हो गया है बताने का कस्ट करें, धन्यवाद!

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    नमस्कार तिवारी जी, हम सब की कोशिश से ये जहाँ बन सकता है अगर हम निस्वार्थ हो के जियें तो मगर स्वार्थ हम सब को कहीं न कहीं घेर लेता है | आप बेझिझक पूछ सकते है | मेरा नाम दिव्या है और दिव नाम से मै लिखती हूँ | प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया

rajkamal के द्वारा
October 18, 2010

जहाँ प्यार का नाम सिर्फ मिलन हो जहाँ राधा की मोहन से जुदाई न हो “मोहबत जहाँ सब की पूरी हो अधूरी न कोई कहानी हो” आपकी सारी कविता में केवल एक यह पैरा ही मुझको सच्चाई के करीब लगता है वोह भी इस शर्त के साथ कि … हमारे  इस समाज में पुरुषों और इस्त्रियो का अनुपात बराबर हो ….

chaatak के द्वारा
October 18, 2010

div81 जी, आपकी इस कविता को पढ़कर मुझे ४ ऐसी जगहों की याद आ गई जहाँ वो दुनिया मिलेगी जो आप तलाश कर रही हैं मैं क्रमानुसार ऐसी जगहों का पता दे रहा हूँ पहली जगह आप की सोचो हुई दुनिया से भी अच्छी है दूसरी आपकी सोची दुनिया की तरह ही है तीसरी में थोड़ी कोशिश करके वह दुनिया बन जाती है और चौथी में मत जाइएगा क्योंकि वहां सब कुछ इतना आदर्श स्थिति में है कि आप कुछ देर बाद इसी दुनिया में लौटना चाहेंगी- १- लेक आइल ऑफ़ इनिस्फ्री (विलियम बटलर यीट्स) २- आइलैंड ऑफ़ यूटोपिया (सर टॉमस मूर) ३- वंडरलैंड ऑफ़ एलिस (लेविस कैरोल) ४- आइल ऑफ़ दि ब्लेस्ड (अल्फ्रेड लार्ड टेनिसन) चुकी आप साहित्य में रूचि रखती हैं और स्वयं भी साहित्य सृजन की और अग्रसर हैं इसलिए आपके लिए इन जगहों पर पहुंचना मुश्किल नहीं होगा| मैं स्वयं भी जग इस दुनिया की कृतिमता से ऊब जाता हूँ तो इन्ही में से किसी एक जगह चला जाता हूँ| आप भी कोशिश कीजिये (हैप्पी जर्नी)| आपकी कविता में जो अहसास हैं इन्हें जीवित रखियेगा इससे आपको तो हमेशा निराशा मिलेगी लेकिन आपके आस पास रहने वाले लोगों को उस दुनिया का एक इन्सान जरूर ऐसा मिल जायेगा जिस दुनिया को आप तलाश रही हैं| कविता के भावों के बारे में सिर्फ इतना कह सकता हूँ- ‘अद्भुत अनुभूति है !’ बधाई!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    October 18, 2010

    अरे वाह चातक जी, आपने तो सर टॉमस मूर का नाम देकर हमे राम राज्य में भेज दिया|दिव्या बहन,आपने जिस दुनिया की कामना की है वह मुझे भी चाहिए लेकिन क्या करूं इधर उधर हर जगह नजर दौड़ाया ऐसी दुनिया दिखी ही नहीं मैं तो सोंग ऑफ़ फ्री का पुजारी हूँ…लेकिन चातक जी ने जिन चारों किताबों का उल्लेख किया उसमे मैंने केवल दो पढ़ी है…लगता है शेष दो पुस्तकें मिलकर ही आपकी कविता के भाव को पूर्ण कर पाएंगी…चातक जी ने कहा है तो निःसंदेह बाकि दोनों में कुछ और होगा…बहुत ही सुन्दर कविता है…जय भारत,जय भारती

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    चातक जी एवं मनोज जी मैं आप दोनों की प्रशंशिका हूँ आप की विशेष टिपणी के लिए बस इतना ही कहूँगी शुक्रिया मेरा इसी तरह हौसला बढ़ाते रहिएगा

aftabazmat के द्वारा
October 18, 2010

दिव्या जी अपने दिल को छु लेने वाली पंक्तियाँ लिखी है, आप बहुत आगे तक जाएँगी… keep it up…

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    aftabzmat, जी आप सभी की हौसला अफजाई से आगे लिखने की प्रेरणा मिलती है आप सभी का स्नेह ऐसे ही बना रहे तो मेरी कोशिश को भी आकर मिलता रहेगा | शुक्रिया

Aakash Tiwaari के द्वारा
October 18, 2010

Div जी, बहुत सुन्दर पंक्तियाँ लिखी है आपने बहुत आनंद आया पढ़कर, आपकी लाइनों के लिए दो शब्द मेरी और से, जहा वो हों जहा हम हो जहा न कोई गम हो.. जहा काँटों में भी फूल खिलते हरदम हों, आप एक ऐसी दुनियां बसाना चाहती हैं. दुनियां से अलग एक जहाँ बनाना चाहती हैं..

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    काव्य रूप में प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आप के दो शब्द मेरे लिए कीमती रहेंगे ek बार फिर से शुक्रिया

kumar rajeev के द्वारा
October 18, 2010

एक सुन्दर संसार की कल्पना DIV जी आप जैसे 30% लोग हिंदुस्तान की तस्वीर बदल सकते हैं सच कहूँ तो इतना सुन्दर लिखा है आप ने जितनी तारीफ की जाय कम है http://kumarrajeev.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    कुमार राजीव जी , कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती, हिंदुस्तान की तस्वीर एक दिन जरुर बदलेगी | इस तारीफ और प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया |

syeds के द्वारा
October 18, 2010

दुनियां से अलग एक जहाँ बनाना चाहती हूँ मैं एक ऐसी दुनियां बसाना चाहती हूँ दिव जी बेहद सुन्दर कविता और विचार…हम सब को मिलकर इसी दुनिया में इतना प्रेम भर देना चाहिए कि वह आपकी कविता/सपनों कि दुनिया जैसी बन जाये. http://syeds.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    syeds, जी सही कहा आप ने बस सब को अपने हिस्से की ईमानदारी बरतने की जरुरत है फिर ये सपनो की दुनिया हकीकत में हो जाएगी | शुक्रिया

    bharatswabhiman के द्वारा
    October 20, 2010

    बस सब को अपने हिस्से की ईमानदारी बरतने की जरुरत है फिर ये सपनो की दुनिया हकीकत में हो जाएगी —— वाह क्या बात कही है |

kmmishra के द्वारा
October 18, 2010

बहन नमस्कार । इस अत्यंत सुंदर कविता के लिये आभार ।

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    मिश्रा जी, कविता को पसंद करने के लिए और प्रतिक्रिया के लिए आप का धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
October 18, 2010

“सजती हो जहाँ पर महफिलें दोस्तों की दुश्मनों का पता कोई पूछता न हो” दिवा जी अति सुन्दर कविता, मन को छूती हुई, इश्वर करे जिस जहाँ की आप कमाना कर रही हैं हों, वो हम सब को ही मिले, http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    मैं तो ऐसा ही चाहती हु अबोध जी, इस दुनिया में सभी हो

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    आप की प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद रहा गया था | आप के मन को मेरी रचना छु गयी ये बहुत बड़ी उपलब्धी है आप का तहे दिल से शुक्रिया

jalal के द्वारा
October 18, 2010

दिव जी बड़ी अच्छी सोच है. किसी की नज़र न लगे.

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    आमीन ………………..जलाल जी, प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया

ashvini kumar के द्वारा
October 18, 2010

अच्छी कविता (दिव्या)जी अज पहली बार आपकी कोई रचना पढ़ी ,,अच्छी सोच ,,समाज को एक अच्छा संदेश

priyanka के द्वारा
October 18, 2010

ऐसा जहां तो अब सिर्फ ख्यालो में ही मिला करता है ………… अच्छी कविता के लिए बधाई

    kumar rajeev के द्वारा
    October 18, 2010

    ऐसा नहीं है प्रियंका जी इन्सान चाहे तो क्या नहीं हो सकता इंसानों ने ही इस दुनिया का स्वरुप बदला है कुछ अच्छे थे वो अच्छा कर गए कुछ खराव थे वो ख़राब कर गए

    div81 के द्वारा
    October 19, 2010

    ख्यालो को अगर हकीकत बना दिया जाये तो सब कुछ संभव है impossible को सिर्फ अलग कर दीजिये तो वो i m possible हो जायेगा असंभव कुछ भी नहीं वो भी अपने आप में संभव है …………..आप को मेरी कोशिशि पसंद आई इसके लिए शुक्रिया


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