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खुद से, जिंदगी से और खुशियों से

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"मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया था"

Posted On: 25 Oct, 2010 Others में

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endoflifeone2

बचपन में ही बुढ़ापा जी लिया था

मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया था

क्या होती है गरीबी और मुफलिसी

मैंने अमीरों को देख जान  लिया था

raziaमाँ के आंसू देखे नहीं जाते थे,

इसलिए समझौता करना सीख लिया था

मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया था

सर्द हवाओं का रुख मोड़ नहीं सकता था

the laugh of life true child laughइस लिए चुप रहना सीख लिया था

मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया था

भीड़ से अलग दिखने की चाहत मन में थी

इसलिए दुनिया से अलग रास्ता चुन लिया था

मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया था

अपनों की बातों में परायापन बहुत था

इसलिए उन को सोचना छोड़ दिया था

मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया था

दो वक्त की रोटी मिलती मुश्किल से है

इसलिए  मेहनत  करना सीख लिया था

मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया था

अंधेरो में छोड़ जाती है परछाई भी साथ

ये सुनकर मैंने, अंधेरो में हौसला करना सीख लिया था

मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया था

darkness

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28 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Moni के द्वारा
October 27, 2010

दिव्या जी…. जिन्दगी का फलसफा कितने ही सहज अंदाज़ में आपने बयां कर दिया……………

K M MIshra के द्वारा
October 26, 2010

माँ के आंसू देखे नहीं जाते थे, इसलिए समझौता करना सीख लिया था बेहतरीन प्रस्तुति. आभार. रौशनी बहिन इधर सैयद अलीशाह गिलानी और अरूंधती राय के बीच हुये संसर्ग से एक और राष्ट्रद्रोही कूलबेबी ने जन्म लिया है । कश्मीर पर मेरे लेख ‘कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है’ पर आकर उन्होंने भारतीयों को अपनी अमूल्य राय दी । नीचे दे रहा हूं । Amazing ! Kashmeer is not your matter……..It is matter of those who stay in kashmeer.I read here your comments and alike you buddies,But It appears to be double standard in your mind,what have been done by Indira gandhi is right? then you have to accept Mahmood Ghaznavi as a Great Reformer because he united India at time the various kings here fighting for their own throne….

Aakash Tiwaari के द्वारा
October 26, 2010

सामजिक ताने-बाने पर बुनी हुई आपकी ये रचना मुझे बहुत पसंद आई…आपकी रचनाओं में से सबसे बढ़िया रचना कह सकता हूँ इसे….. अपने अंदाज में दो शब्द कहूँगा.. ‘सबने अनसुना किया था, बातों से जख्मी किया था. पर बेवफाई के बंधन में हमने जीना सीख लिया था”…. आकाश तिवारी http://aakashtiwaary.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    आकाश जी, बहुत खूब कहा आप ने आप का धन्यवाद साथ ही रचना को इतना पसंद करने के लिए शुक्रिया |

harish के द्वारा
October 26, 2010

मन को छू जाने वाली कविता के लिए बधाई.

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    हरीश जी, किसी भी कलाकार की कला तभी सार्थक होती जब वो पसंद की जाये उसके भाव दिल को छु जाये आप का तहे दिल से शुक्रिया |

ravish kumar के द्वारा
October 26, 2010

दिवा जी आपकी रचना सराहनीय है. आशा है आप इसी तरह लिखते रहेंगे. गंभीर से विषय को सरलता के साथ प्रस्तुत किया लाजबाव है…..

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    रविश जी, आप सभी के साथ और सराहना से लिखने की प्रेरणा मिलती है | मुझे ख़ुशी है की मेरी ये प्रस्तुती आप को पसंद आई आप का तहे दिल से शुक्रिया |

abodhbaalak के द्वारा
October 26, 2010

दिवा जी, सराहनीय रचना, आपने एक बहुत ही गंभीर से विषय को सरलता के साथ प्रस्तुत किया है, और चित्रों के प्रयोग ने इसे और भी सुन्दर बंद दिया है बधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    अबोध जी, मेरी कोशिश को पसंद करने और सराहना के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया |

Amitkr Gupta के द्वारा
October 26, 2010

बहुत ही सुन्दर लेखन .बधाई http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    गुप्ता जी, आप का शुक्रिया |

jalal के द्वारा
October 26, 2010

वक़्त बड़ा ही ताक़तवर होता है. और अपने आपको को सही से बनाये रखना बहुत ही मुश्किल. बहुत अच्छी रचना. बधाई हो.

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    जलाल जी, असली परीक्षा की घडी तो तभी होती है | जब बिगड़े हालत में भी हौसला न टूटे आप का शुक्रिया

Tufail A. Siddequi के द्वारा
October 26, 2010

दिव्या जी अभिवादन, आपकी रचनाओं में समाज के जिस वर्ग विशेष के लिए दर्द झलक रहा है, वह कम ही लोगों से सीने में होता है. इसके लिए आप बधाई की पात्र है.

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    तुफैल जी, नमस्कार , मानवता की बात अगर सब करे तो ये दर्द का इलाज हो जाये |

Deepak Jain के द्वारा
October 26, 2010

दिव्या जी, बेहतरीन रचना

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    दीपक जी, आप का शुक्रिया ऑ

syeds के द्वारा
October 26, 2010

जिंदगी का खूबसूरती से लेकिन मार्मिक चित्रण, सुन्दर रचना .

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    syeds जी, कविता के भाव आप तक पहुँच गए ये मेरी कविता को सार्थक कर गया | आप का शुक्रिया |

Coolbaby के द्वारा
October 26, 2010

something makes me feel sad here. Life is like coin has two sides ………If you are sad …think Moments are gone. If there is happiness gain everyone fully and feel each one with deep heart . aaaah Nice May God bless you

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    सिक्के के दो पहलु होते है मगर एक हमेशा छुप जाता है और वो छुपा हुआ पहलु ही अपने आप में कितने अनसुलझे राज लिए होता है | शुक्रिया बहुत बहुत शुक्रिया आप का |

October 25, 2010

अंधेरो में छोड़ जाती है परछाई भी साथ ये सुनकर मैंने, अंधेरो में हौसला करना सीख लिया था मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया था खूबसूरत पंक्तियों के लिए हार्दिक बधाई…………..

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    पियूष जी, आप का शुक्रिया आप की टिप्पणी नया कुछ करने की प्रेरणा देती है ऑ

chaatak के द्वारा
October 25, 2010

दिव्या जी, एक और अच्छी रचना ने मंत्रमुग्ध कर दिया| जीवन के काफी करीब जाकर जीवन का चित्रण कर रही हैं आप| अच्छी कोशिश पर बधाई, आगे के लिए शुभकामनाएं!

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    चाताक जी, हम जिनके प्रशंसक हो उनके द्वारा ये सुनना सच में ख़ुशी की बात होगी | मैं तो बस कोशिश कर रही हूँ ज़िन्दगी को करीब से देखने की आप को उसका चित्रण पसंद आया मेरे लिए ख़ुशी का विषय है | शुक्रिया आप का, आप की शुभकामनाओ का, आप की टिप्पणी का|

ashvinikumar के द्वारा
October 25, 2010

दिव्या जी आप की हर प्रस्तुति सराहनीय होती है ,जिन्दगी का जितना जीवंत चित्रण आप करे हो वह मुझे मंत्रमुग्ध कर देता है….(आपका अगर इजाजत हो एवं स्वीकार करें तो भाई )

    div81 के द्वारा
    October 27, 2010

    अश्विनी दादा , (दादा इस लिए मैं अपने बड़े भाई को दादा ही बोलती हूँ) मुझे ख़ुशी होगी | ये मेरे लिए गर्व की बात है |


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