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"करवा चौथ का चाँद"

Posted On: 27 Oct, 2010 Others में

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karwa-chauth-celebrations करवा चौथ का चाँद ये

उदासी आँगन में भर गया

389173469_1f32de251c सुहागन के हाथो में मेहँदी रचाते  रचाते

उसके सुने हाथो को रंग गया

भरम था ये मेरा मैं खुश हूँ

फिर आज क्या ये हो गया

करवा चौथ के चाँद को देख

कुछ शूल सा दिल में चुभ गया

Mehandi_Design_NiceFun_14_422_00उसकी रुखी हंसी सुन

क्यूँ दिल यूँ मेरा  रो दिया

आज फिर किसी मासूम का दिल

उदासी से  है भर गया

चूड़ी भरी हाथो की खनक  से

दिल उसका डूब  गया

बिंदिया की चमक में,

सपनो  का रंग सो गया

पायल की छम छम में

हंसी का संग खो गया

मधम सी चांदनी में

आंसुओ का बांध टूट गया

आज फिर किसी मासूम  का दिल

उदासी से  है भर गया

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28 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Arvind Pareek के द्वारा
November 1, 2010

कभी पढ़ा था वियोगी होगा पहला कवि आह से उपजा होगा गान । आज उसे देख भी लिया । आदरणीय वाजपेयी जी ने सही लिखा है कि यहां पतझड़ भी है और वसंत भी । इसलिए निराशा त्‍याग दीजिए । अब कुछ उत्‍साहपूर्ण उल्‍लासपूर्ण अभिव्‍यक्ति दीजिए । अरविन्‍द पारीक http://bhaijikahin.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    आदरणीय सर ………… मैं निराशावादी नहीं हूँ | ये किसी की आह से ही उपजा गान है |

Ramesh bajpai के द्वारा
October 28, 2010

बिटिया दिब्या ……..बोझिल ही सही पर रचना शुरू से अंत तक बांधे रही . प्रकृति के आचल को देखे तो यहाँ पतझर भी है और रंग बिरंगी छटा बिखेरता बसंत भी . बस जीवन भी कुछ ऐसा ही है

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    आदरणीय सर …………………..सही कहा आप ने हर तरह का मौसम मिलते है | और हर वक़्त एक सा भी नहीं होता |

abodhbaalak के द्वारा
October 28, 2010

दिव जी, आपने बात तो करवा चौथ के पर्व की, की है पर आपकी रचना इतनी उदास क्यों है? वैसे रचना सदा की भाँती सुन्दर है. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    आप की प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया

atharvavedamanoj के द्वारा
October 27, 2010

दिव्या जी…. चातक जी ने एक घटना का उल्लेख किया तब जाकर बात मेरी समझ में आई….वस्तुतः यह व्रत जिन संकल्पों को समाहित किये हुए है उसमे पति और पत्नी का परस्पर आत्मभाव ही प्रदर्शित होता है…न वा अरे मैत्रेयि! पत्यु कामान पति प्रियो भवती…आत्मानों कमी पति प्रियो भवती…उपनिषदों का सन्देश है की पति इसलिए प्रिय नहीं है की वह पति है बल्कि उसमे आत्मा है इसलिए प्रिय है….इस परिप्रेक्ष्य में कविता कारुणिक रही…आभार

Manish Singh "गमेदिल" के द्वारा
October 27, 2010

प्रभावित करने वाली कविता………….. करवाचोथ पर लिखी कविता कुछ ग़मगीन लगी………. शायद यह दिन एक सुहागिन के लिए खुशनसीब होता है……… यह मेरी अपनी राय है………. http://manishgumedil.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    सही कहा आप ने मगर किसी के लिए ये खुशनसीबी कम ही थी या है ही नहीं |

saima malik के द्वारा
October 27, 2010

आप और आपका लेख,अति सुन्दर है,…………मेरा लेख “अरुधंति और शेखचिल्ली” पड़कर अपने विचार अवश्य दें.

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    माफ़ कीजियेगा कुछ व्यस्तता और कुछ तबियत ठीक नहीं थी | जल्द ही आप का लेख पढ़ कर अपने विचार रखूंगी |

October 27, 2010

यूँ किसी का कोई त्यौहार न हो की ख़ुशी की जगह उसे दुःख का पहाड़ मिले ……… दर्द भरी इस रचना के लिए हार्दिक बधाई भी नहीं कह सकता क्योकि किसी के दर्द की बधाई किसी को कैसे दी जा सकती है………

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    मुझे इस बात का ही संतोष है वो दुःख आप तक भी पहुँच पाया | आगे क्या कहू कुछ समझ नहीं आ रहा है |

chaatak के द्वारा
October 27, 2010

दिव्या जी, आपकी कविता कल फैजाबाद में एक लेखपाल की पत्नी के साथ घटित घटना को अक्षरशः व्यक्त करती है| बेचारी पत्नी अपह्रत पति के इंतजार में करवा चौथ का व्रत किये बैठी थी और शाम को पति की लाश आ गई| विधाता भी न्यायी प्रतीत नहीं होता| पोस्ट वर्तमान हालत से जुडी होने के कारण कुछ ज्यादा ही गंभीर है, मैं कुछ कह नहीं सकता, कुछ समझ में नहीं आ रहा!

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    चातक जी .. ये बहुत ही दुखद घटना है | कुछ ऐसी ही घटना यहाँ दून की है एक औरत अपने पति का २२ सालो से इंतजार कर रही है वो लापता है या पता नहीं मगर उसका इंतजार चल रहा है | शब्द यहीं आ के मोन हो जाते है |

parmod risalia के द्वारा
October 27, 2010

करवा चौथ पर विशेष ये कविता अति सुन्दर है  parmodrisalia.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    प्रमोद जी शुक्रिया

parmod risalia के द्वारा
October 27, 2010

करवा चौथ पर विशेष ये कविता अति सुन्दर है

Aakash Tiwaari के द्वारा
October 27, 2010

div जी आखिर ऐसी क्या बात है जो आपने करवाचौथ को अपनी लेखन कला से इतना गमगीन कर दिया….. पता नहीं क्यों मुझे लिखी हुई लाईने तो पसंद आई मगर उसके शब्दों का अर्थ नहीं अच्छा लगा…..क्षमा कीजियेगा….. आकाश तिवारी

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    सच्चाई अकसर अच्छी नहीं लगती | क्षमा मांगने वाली कोई बात नहीं आप को पसंद नहीं आया आप कह सकते है मेरी रचना की लाइन को पसंद करने के लिए शुक्रिया

ashvinikumar के द्वारा
October 27, 2010

प्रिय बहन ,,दिल को छू लेने वाली कविता है ,,पता नही क्यों पर तुम्हारी लगभग सभी रचनाओं से दर्द टपकता है ,,मै भी लिखता था लिखता हूँ आगे वो जाने (लेकिन इतना जीवंत लेखन, इतनी गहराई में जाने के लिए पात्रों में खुद को में जीना पड़ता है ,और उनसे मुक्त होने में भी समय लग जाता है ,,लेकिन हम अपने स्नेहियों को व्यथित अवश्य कर देते हैं ) कभी कुछ मधुर भी ले आओं *****तुम्हे प्यार भी आभार भी

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    दादा आप ने सही कहा मगर मैंने जो लिखा है उसमे सच्चाई है और उस सच्चाई से नजर नहीं चुरा सकी | जरुर आप की बात सर आँखों में |

K M MIshra के द्वारा
October 27, 2010

दिल को छूती कविता के लिए आभार.

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    शुक्रिया आप का

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 27, 2010

नमस्कार दिव्या जी करवा चौथ पर विशेष ये कविता अति सुन्दर है ,धन्यवाद!

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    धर्मेश जी धन्यवाद

harish के द्वारा
October 27, 2010

एक और अच्छी कविता के लिए बधाई. ऐसे ही लिखती रहो.

    div81 के द्वारा
    November 4, 2010

    धन्यवाद हरीश जी


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