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पब्लिसिटी स्टंट

Posted On: 13 Nov, 2010 Others में

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सस्ती व  घटिया पब्लिसिटी के लिए टेलीविजन कलाकार कितनी  हद तक जा सकते है इसका ताजा उदाहरण परसों टी.वी में देखा | बेतुके समाचार के द्वारा ये लोग जनता के सामने प्रचार पाते रहते है | मगर इससे घटिया और बेहूदा तरीका कुछ और नहीं हो सकता |
टी.वी चेनल में प्रसारित बिग बॉस में सारा खान और अली का निकाह दिखाया या किया जा रहा था | शादी के रिवाज मुस्लिम धर्म के अनुसार निभाए जायेंगे | सीधी सी बात है दोनों (लड़का एव लड़की ) ही मुस्लिम है
जब से ये पता चला है की सारा और अली की शादी बिग बॉस में होगी सभी समाचार चेनल वालो की बांछे  खिल गयी उन के पास कोई और समाचार बचा ही नहीं था तो सारा और अली के घर चल दिए वहीँ से ज्ञात  हुआ की ये तो पहले से ही शादी शुदा है यानि के इनका निकाह हो चूका है |
अब सवाल ये उठता है जब ये दोनों ने पहले से ही अपनी गृहस्त   जीवन शुरू कर दिया है तो ये दिखावा क्यूँ , दूसरा सवाल एक निकाह के बाद मिया बीबी फिर से आपस में निकाह नहीं कर सकते फिर से निकाह का एक नियम है जिसमे की पति ने अपनी पत्नी को तलाक दिया हो अगर दोनों फिर से निकाह करना चाहते हो तो पत्नी इद्दत का एक समय पीरियड होता है उसके बाद उसको किसी दुसरे पुरुष से निकाह करना होगा फिर वो उसे तलाक देगा फिर इद्दत का समय के बाद वो अपने पहले पति से शादी  कर सकती है |
मगर यहाँ तो धर्म की, संस्कारो की भारतीयता की धज्जियाँ  उड़ाई जा रही है | और सभी की निगाहें उसमे गडी है की अब आगे क्या होगा |
मुझे लगता था की राखी सावंत ही ड्रामा क्वीन है वो अपना चेहरा हर चेनल में दिखने के लिए कुछ न कुछ नाटक रचती रहती है मगर यहाँ तो मासूम गुडिया सी दिखने वाली सारा खान ने सारी हदे पार कर दी गेम जीतने के लिए उसका अश्मित पटेल के करीब आना नाटकीय तरीके से अली का वाइल्ड कार्ड एंट्री लेना फिर बिग बॉस के द्वारा उनकी शादी की घोषणा करना सब कुछ पहले से तय है | तो ये रियलटी शो कहाँ से हुआ | गेम जीतने और टी.आर.पी बढ़ने के लिए लगे हाथो  चेनल वालो को  अश्मित और विना मालिक का भी निकाह पढवा देते तो कम से कम कुछ और घटिया सीन उपलब्ध हो जाते और आप के चेनल की टी.आर.पी बढ़ जाती और देश को पाकिस्तानी बहु मिल जाती | जिसका की अपने देश में बहुत नाम है क्या हुआ की वो बदनाम है
पहले तो चेनल वालो ने दोनों की शादी की फिर उस  पुन: नवविवाहित जोड़े को अलग से एक कमरा दिया जाता है | और दुसरे दिन अशलील सा गाना बजा दिया जाता है | आप टी.वी में दिखाना क्या चाहते  है | अशलीलता ,भोंडापन, घटिया टी.आर.पी |
हिन्दू वादी संगठन कहाँ गए जो भारतीयता का नारा लगा कर १४ फरवरी विरोध करते है , जहग जगह समाज के ठेकेदार और पहरेदार बन कर किसी भी युगल को देख कर अपनी दबंगई दिखाते है दुकानों में तोड़ फोड़ करते है | और सेंसर बोर्ड कहाँ गया |क्या अब  इन को इस शो में भारतीयता की झलक दिख रही है या तो ये सब अब अशलीलता नहीं रहा या अशलीलता की परिभाषा बदल गयी है |
हाँ अशलीलता दिखेगी भी क्यूँ  वहां तो शादी की गयी है जो की नेक काम है और शादी ही तो समाज द्वारा दिया गया सर्टिफिकेट है | फिर तो इसमें कोई अश्लीलता नहीं है |

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
November 15, 2010

सुश्री दिव्‍या जी, जब मियां बीबी राजी तो क्‍या करेगा काजी । अब टेलीविजन चैनलों को रोकने वाला कोई है नहीं । उन्‍हें स्‍वयं सेंसर की नीति का पालन करना है । ऐसे में पहले सब कुछ देखिए । फिर कुछ दिनों बाद उस पर खेद पढ़ लीजिए । बस यही होता रहेगा । अरविन्‍द पारीक

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    सही कहा आप ने जब मियां बीबी राजी तो क्या करेगा काजी | हम सब लोगो को मिल कर पाजी बना रहे है ये लोग | आप का शुक्रिया

ajaykumarjha1973 के द्वारा
November 14, 2010

दिव्या जी , इस पूरे प्रकरण में ऐसी श्रंखलाओं , उनके निर्माताओं , और प्रसारक चैनलों पर नकेल कसने व नियंत्रण करने के उद्देश्य से निर्मित संस्थाएं आखिर कहां सोई रहती हैं

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    अजय जी ये संस्थाए सोयी नहीं है सोच रही है ममोहन जी के अंदाज में इनको भी इंतजार है की कब ऑर्डर हो कब वो अपना आदेश दे |

saima malik के द्वारा
November 14, 2010

हाय,दिव्या: इन रियेलिटी शोज़ की तो बेबात की बात,और मुद्दे पैदा करना नियति बन गयी है,…….और आम पब्लिक को रियेलिटी प्रोग्राम को हँसते हुए झेलना दुर्भाग्य. आपके शीर्षक के अनुरूप मुद्दे पर मेरा ब्लॉग- ” राखी सावंत ६०% नग्न: फजीता डाट काम” देखे,और अपने सुझाव अवश्य दें.

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    हेलो, सीमा मलिक जी, सच कहा आप ने आप की प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया अभी तुरंत देखते है आप का लेख

abodhbaalak के द्वारा
November 14, 2010

दिव जी, आपने भी सुना ही होगा की TRP के लिए कुछ भी करेगा, सब ड्रामा है, और हम देखे ही क्यों इस तरह की नौटंकी को, जो दिख रहा है वही बिक रहा है, जैसा की निशा जी ने कहा, दोषी तो हम भी है, सराहनीय प्रयास http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    अबोध जी इस घटिया प्रोग्राम को देख कौन रहा है | इसकी टी.आर.पी. तो न्यूज चैनल वाले बढ़ा रहे है | इन के पास कुछ और काम तो है नहीं न्यूज इनके पास है नहीं अब अपनी रोजी रोटी चलने के लिए इनको कुछ तो करना है तो लगे है ये अपने काम में | आप का शुक्रिया

ashvinikumar के द्वारा
November 14, 2010

प्रिय बहन विषय बहुत अच्छा चुना है विश्लेषण भी लाजबाब है ,,लेकिन तुम्हारा यह प्रयाश कितने हृदयों को उद्द्वेलित कर पायेगा यह तो ऊपर वाला ही जाने ,,वैसे मै टेलीविजन देखता ही नही ,,यदा कदा ,डिस्कवरी ,नेशनल जियोग्राफिक या हिस्ट्री चॅनल देख लेता हूँ ,लेकिन लगभग एक माह से वह भी बंद है ,,सूचनाएं नेट से मिल जाती हैं ,उपरोक्त चैनल जिन्हें मै देखता था कार्यक्रमों की पुरावृत्ती होते रहने के कारण मन ऊब गया ,,और जहां तक समाज की बात है युवा पीढ़ी को देखो (somthing 30) को युवा वर्ग ही कहा जाता,, मुझे मेरे कुछ बाबा आदम के जमाने का कहते हैं,,अच्छा है मै यूँ ही भला ,,इन युवा वर्ग की सोच क्या है ,पोशाक (लडके /लडकियों )के कैसे हैं,,अगर मित्र मंडली में सम्मिलित होती होगी तो कुछ लिखने की आवश्यकता ही नही है ,,और जहां तक भारतीय संस्कृति के पैरोकारों की बात है ,,तो कुछ तो आपनी ही टी.आर.पी में लगे हुए हैं और कुछ केवल चाटुकारिकता ही करते हैं उन्हें भारतीय संस्कृति से क्या लेना देना ,,अधिक क्या लिखूं गंदी नाली की बात करके बदबू से सर भन्ना जाता है ,,..(तुम्हारे मेल पर पासवर्ड बदलने को क्यों कहा कारण बताउंगा )…….तुम्हे प्यार भी आभार भी

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    दादा आप का उत्तसाहवर्धक टिपण्णी के लिए शुक्रिया टीवी का माध्यम हमारे मनोरंजन के लिए है | कुछ वक्त परिवार के साथ बैठ कर मनोरंजक प्रोग्राम देखना पहले आच्छा लगता था | एक वक्त था जब अशलीलता का आरोप चैनल वी और फैशन टी.वी को लगता था इसका काफी विरोध भी हुआ मगर ये भारतीय चैनल नहीं है तो इस विषय में कुछ ज्यादा कहा भी नहीं जा सकता | मगर इन कुछ सालो से टी.वी में जो बकवास और बेहूदा से प्रोग्राम आ रहे है इसको देखने से अच्छा आप क्रिएटिव काम कर ले नहीं तो इन बेसिरपैर की बकवास को हजम करने के लिए कोई हाजमोला भी नहीं है | वैसे दादा आप ने सही कहा बाबा आदम और ओल्ड फैशन ही तो कहा जाता है हम को मगर कोई बाद नहीं मेरी तो दिल की तसल्ली इस बात से है ओल्ड इज गोल्ड | आप की मेल का इंतजार रहेगा |

    ashvinikumar के द्वारा
    November 18, 2010

    अरे नटखट मेल भेजूं भी तो कैसे मेल एड्रेस एक बार सही लिख कर कमेन्ट कर ,तेरी अगली पोस्ट पर कमेन्ट भी नही जा रहा है ,प्रतिबंधित क्यों कर रखा है,बहंस अगर तार्किक होगी तो देखेंगे…तुझे प्यार भी आभार भी…तेरा दादा ,(वैसे तेरे पास मेरा रैडिफ वाला एड्रेस होगा ,वैसे तुझ पर क्रोध भी आ रहा है ,मेल लिखा तो वापस मेरे मुह पर ही गूगल ने मार दिया एड्रेस गलत कह के ,,मेरे लेख पर प्रतिक्रया करना तो मेल एड्रेस सही लिखना)

nishamittal के द्वारा
November 14, 2010

दिव्या जी मेरा मानना है हम देखते हैं वो दिखाते हैं.अतः दोष उनका नहीं हमारा है.वो व्यापार है जब डीमांड नहीं होगी तो ऐसेप्रसारण स्वयमेव बंद हो जायेंगे.

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    निशा जी, मेरी राय यहाँ थोड़ी सी अलग है | आप ने सीमा मलिक जी ने मैंने इस विषय में लिखा आप को भी मलिक जी को भी और मुझे भी इस विषय में सभी ने प्रतिक्रिया दी है सभी ने इस विषय में हमारा समर्थन किया है | मैंने इस विषय में जिससे भी बात की सभी को ये प्रोग्राम को देखना पसंद नहीं है जीतने इसको देखने वाले है उससे जयादा इसको नापसंद करने वाले होंगे मगर क्या अशलीलता परोशानी बंद हो गयी | बहुत लोगो ने इस प्रोग्राम को नहीं देखा होगा क्यूँ की वो उस समय कौन बनेगा करोडपति देखते है मगर मिडिया इस बात को प्रमुखता के साथ पेश कर रही है कोई भी न्यूस चैनल देखलो कोई भी समाचार पत्र उठा लो इस विषय में जरुर लिखा है इस प्रोग्राम को डिमांडिंग कौन बना रहा है यहाँ डिमांड हो नहीं रही है इसको तो चैनल वालो के जरिये ही मिडिया पब्लिशिटी की जा रही है और टी.आर. पी. बड़ाई जा रही है

chaatak के द्वारा
November 13, 2010

दिव्या जी, आपकी यह पोस्ट आपके मुखर व्यक्तित्व की एक अच्छी बानगी प्रस्तुत कर रही है| ‘टी.वी.शो के नाम पर जो नई नैतिकता गढ़ी जा रही है वह हमें किस गर्त में ले जायेगी?’ शायद इस प्रश्न ने ही आपको ये ब्लॉग लिखने पर मजबूर किया है| कहना गलत न होगा कि आज आप जैसे मुखर युवाओं की सबसे ज्यादा जरूरत समाज, राजनीति और लेखन में है क्योंकि आपको पता है कि आप क्या लिख रहे हैं और क्यों लिख रहे हैं| इस सम्बन्ध में ना तो कोई हिंदूवादी संगठन कुछ कर सकता है और न ही कोई मुस्लिम्वादी संगठन, नारीवादी संगठनों की भूमिका वैसे भी राजनीति की राखी सावंत जैसी है| बचे सिर्फ युवा वो भी तमाम तनावों, प्रलोभनों और सपनो से घिरे हुए इन्हें ही अपनी कमियों को काबू करते हुए परिवर्तन के लिए बढ़ना होगा| अब यहाँ मैं आपका ध्यान एक कमजोर पहलू की ओर भी आकृष्ट करना चाहूंगा- १४ फरवरी का विरोध भी गलत नहीं है लेकिन हर गलत बात का विरोध करने के लिए हिन्दू संगठन का मुंह ताकना ठीक है क्या? सारा और अली ने यदि कुछ गलत किया तो क्या उसके लिए फतवा जारी करना ही जरूरी है? कितनी ही बार हिन्दुओं के सुधार के लिए हिंदूवादी संगठनो ने अपने सर पर जहालत ली है अब हमें खुद ही ऐसे अनैतिक कृत्यों का अपने स्तर से बहिष्कार करना चाहिए| कितनी बार अधार्मिक आचरण के लिए फतवे जारी किये जा चुके हैं लेकिन मुस्लिम समाज अगर हर मामले में फतवों का इंतज़ार करे तो ये ठीक नहीं, उन्हें स्वयं अपने समाज में होने वाले अनैतिक कृत्यों का बहिष्कार करना होगा| यदि हमें टी.वी. कार्यक्रम बुरे लगते हैं तो हमें सबसे पहले अपने घर से टी.वी. हटानी होगी| आशा है कि समाज से जुड़े हुए मुद्दों पर अपने विचार इसी प्रकार मंच पर रख कर जागृति की मशाल को जलाये रखेंगी| एक बेहतरीन पोस्ट पर कोटिशः बधाईयाँ!

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    चातक जी, मैं १४ फरवरी का विरोध करने वाले संगठन को गलत नहीं कह रही मगर जिस तरह से ये लोग उस दिन हर जगह नाकाबंदी कर देते है और हर किसी के साथ अतिउत्त्साह या जोश में भाई बहन को भी अपने प्रकोप से परेशां करते है वो गलत है | इतना उत्तसाह ये लोग समाज के लिए क्यूँ नहीं उठाते क्यूँ नहीं ये लोग राजनीती में जो भ्रष्टाचार व्याप्त है उसका विरोध करते, क्यूँ नहीं ये इस तरह के प्रोग्राम को रुकवाते है , क्यूँ नहीं ये देश के लिए इतना उत्तसाह दिखाते है जितना की ये १४ फरवरी को दीखते है | बिल्ली के डर से कबूतर अपनी आँखे बंद कर लेता है ऐसा ही कुछ होगा की मैं इस प्रोग्राम को पसंद नहीं करती टी.वी बंद कर दूँ मगर उसका प्रसारण तो नहीं रुकवा सकती | इस तरह के प्रोग्राम को या तो सेंसर बोर्ड बंद करवा सकता है या मनोरंजन विभाग या हम सभी लोगो को संगठित हो कर विरोध प्रदर्शन करना होगा | अपने घर से टी.वी हटा देने का मतलब है अपने घर से बीमारी हटा दी मगर जो बीमारी समाज में फैल रही है उसका उपाय तो समाज से ही होगा |चातक जी आप से भी आशा है की आप यूँ ही अपनी राय रखते रहेंगे और मेरा उत्तसाह बढ़ाते रहेंगे | आप की उत्तसाहवर्धक राय के लिए आप का शुक्रिया

kmmishra के द्वारा
November 13, 2010

“एक निकाह के बाद मिया बीबी फिर से आपस में निकाह नहीं कर सकते फिर से निकाह का एक नियम है जिसमे की पति ने अपनी पत्नी को तलाक दिया हो अगर दोनों फिर से निकाह करना चाहते हो तो पत्नी इद्दत का एक समय पीरियड होता है उसके बाद उसको किसी दुसरे पुरुष से निकाह करना होगा फिर वो उसे तलाक देगा फिर इद्दत का समय के बाद वो अपने पहले पति से शादी कर सकती है |” . दिव्या जी यह प्रश्न मेरे दिमाग में भी कौंध रहा था । शायद कोयी मुस्लिम ब्लागर भाई इस मुद्दे पर प्रकाश डाले । टीवी तो सरासर अब अश्लीलता पर उतर आया है । अभी तो इनकी सुहागरात भी टेलिकास्ट होगी । पराकाष्ठा है नंगई की ।

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 14, 2010

    मिश्रा जी अभिह्वादन, आपका और दिव्या जी का विश्लेषण बिलकुल ठीक है. टेलीविजन और कलाकारों ने तो काम के बहाने नंगई अपना लिया है. ये सीमा तोड़ें तो अधिक आश्चर्य नहीं. आश्चर्य हो रहा है उस काजी पर जो ज्ञानी-ध्यानी होने के बाद भी सादगी पसंद इस्लाम पर कलंक लगा गया. आखिर उसके टेलीविजन पर आने, दो लोगों का दोबारा निकाह करवाने पर अन्य मुस्लिम ज्ञानियों-ध्यानियों का ध्यान क्यों नहीं गया. क्यों उसके खिलाफ फतवा जारी नहीं किया गया ? क्यों उसे दण्डित नहीं किया गया और ये भी की इन सबने मिलकर आखिर कितने का वारा न्यारा किया ? और इस्लाम ने उसकी इजाजत उन्हें कैसे दे दी ? निसंदेह हमारे उपदेशक ही अपने समुदाय को दो आँखों से देखते है. इसमें कोई दो राय नहीं की हमारे अधिकांश मुल्ला-काजी भी अधिक सिरनी (प्रसाद) वाला घर ही तलाशते है. इनको जितना लताड़ा जाय, कम है.

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    तुफैल जी एवं मिश्रा जी, नमस्कार आप ने सच कहा टी.वी. कलाकारों ने हद कर दी है ये सीमा तोड़ते जा रहे मगर सच में जो हमे ज्ञान का रास्ता दिखाते है वो ही ऐसी बेवकूफी करे तो क्या कहा जाये |

आर.एन. शाही के द्वारा
November 13, 2010

आप, हम और सभी टीवी पर ऐसे कार्यक्रम देखना छोड़ दें, ये नाटक खुद ब खुद बन्द हो जाएंगे । मगर क्या ऐसा हो पाना संभव है? साधुवाद ।

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    सच कहा आप ने वैसे तो टी.वी देखने का टाइम मुझे मिल नहीं पता मगर ये सच है मैं टी.वी न भी देखूं मगर अपने पडौसी का टी.वी देखना बंद नहीं कर सकती और सभी चैनल्स में ऐसा ही कुछ बकवास और उबाऊ प्रोग्राम ही दिखाया जाता है | शुक्रिया |

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 13, 2010

महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाते इस लेख के लिए हार्दिक बधाई …………….. वास्तव में हमें सोचना होगा की 14 feb. को धर्म और संस्कृति को बचने वाले ऐसे शो के खिलाफ क्यों नहीं कुछ करते………. या वो खुद ही इनको पसंद करते हैं…………….

    div81 के द्वारा
    November 17, 2010

    शुक्रिया पियूष जी,……………… सही कहा आप ने की ये भी इस अशलीलता को पसंद करते है | नहीं तो शो के शुरुवात में दो पाकिस्तानी कलाकारों को लेने पर शिवसेना ने काफी हल्ला किया था की या तो उन पाकितानी कलाकारों को बहार करो नहीं तो हम आप का शो बंद करवाते है मगर न तो तब कुछ किया गया न ही अब जब की उसमे खुले तौर पर अशलीलता दिखाई जा रही है |


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