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आतंक का साया

Posted On: 25 Nov, 2010 Others में

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बिखर गयी थी जिंदगी,

इधर उधर अनगिनत चिथडौ में

बिलख रही थी जिंदगी टूटे- फूटे किस्सों में

बिखरी हुई थी लाश वहां

अलग- अलग हिस्सों में

मातम मना रहा था अपना पराया

टूटे हुए रिश्तो में

ढूंढ़ रही थी आँखे वहां

जिंदा हो कोई  किसी हिस्सों में

तोडा था इंसानियत को जहाँ

मिल रही थी मानवता फिर उन्ही हिस्सों में

दौड़ रहा था कोई किसी को लेकर,

थाम रहा था हाथ अनजाने उस रिश्तो में

रो रही थी कई आँखे क्यूंकि

जिन्दा था अभी भी कोई  किसी के किस्सों में

आ रहा हूँ कह कर गया था,

क्या पता था आएगी उसकी लाश इतने हिस्सों में

२६/११ को जब मुंबई आतंक के साये में जी रही थी | सभी जगह से सिर्फ एक ही दुआए आ रही थी वहां फंसे लोग बच जाये | और हमारे जाबांज एन. एस. जी कमान्डोस  ने अपनी जान की परवाह किये बगैर कई मासूमों को बचाया | दुआए कबुल हुई मगर इन सब में कई सैनिक शहीद हुए अपने परिवार, शहर देश का नाम रोशन कर गए | मगर सत्ता में बैठे ये लोग इस गौरव को क्यूँ धूमिल कर देते है |
२६/११ की पहली बरसी पर प्रधानमंत्नी मनमोहन सिंह ने बड़ी भावुकता से कहा कि  हम कुछ भूलेंगे नहीं. लेकिन उन्हें किसी ने याद नहीं दिलाया कि हमलों के बाद महाराष्ट्र के जिस गृहमंत्नी का इस्तीफा लिया गया, उसे दुबारा उसी पद पर बिठा दिया गया. जाहिर है, हम भूल चुके हैं. या तो वह इस्तीफा एक राजनीतिक मजबूरी था या फिर मंत्नी की बहाली. यानी सरकार ने और पार्टी ने तब भी और अब भी जो फैसला किया, उसमें राजनीति की जरूरत ज्यादा रही, मुंबई का सवाल कम या सरोकार कम.
मुंबई जिस आतंक के साये में रही, जो दर्द  अपनों के खोने का है वो बस वो ही समझ सकते महसूस कर सकते है राजनितिक पार्टिया नहीं नहीं तो कसाब को अब तक फाँसी मिल गयी होती और कविता ककरे और विनीता कामटे और उन जैसे  शहीदों के परिवार के लोग की आत्मा को  कब तक ऐसे ही सताया जायेगा कब तक जनता की भावना के साथ खिलवाड़ किया जायेगा | राजनितिक पार्टिया जब तक देश का नहीं सोचेगी तब तक कोई न कोई कसाब बहार से या अफजल गुरु जैसा देश द्रोही ऐसे ही आतंक फैलाते रहेंगे और हम फिर से अपने को लोटा पीटा महसूस करेंगे |

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले ।
वतन पर मरने वालों का यही आखिरी निशां होगा…
इससे ज्यादा अपमानजनक स्थिति क्या होगी की हमारे शहीदों के धूल स्मारक खा रहे है | सभी राज्य की सरकार कोई न कोई उत्सव में करोडो रूपए फूंक देती है मगर किसी शहीद की शहादत की तारीख इनको याद भी नहीं होगी | इन शहीदों के नाम से कोई पर्व होना चाहिए जिस दिन छोट्टी न हो मगर सब मिल कर उनको याद करे उनको नमन करे | इन शहीदों की तस्वीरों को भी समाचार पत्र में जगह मिले इनकी शहादत को याद किया जाये  उन शहीद के परिवार की तरह ही सभी देश वासियों को गर्व महसूस हो |


क्या वाकई इनकी चिताओं पर मेले लग रहे हैं |

मेरी भगवन से ये ही प्रार्थना है की भगवन उन सब को हौसला दे और सभी शहीदों को मेरा कोटि कोटि नमन है

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajeev dubey के द्वारा
November 27, 2010

देश जाग रहा है फिर से, कुछ देर हो गई है। जन चेतना के अंदर एक अंगड़ाई उठ रही है … आइये लगे रहें इस युद्ध में, यह हमारा देश है और हमें ही इसे आगे बढ़ाना होगा …. अच्छा लेख

    div81 के द्वारा
    November 30, 2010

    राजीव जी, बहुत सही कहा आप ने हमें ही इसे आगे बढ़ाना hai | मगर अब और देर नहीं करनी | आप का शुक्रिया |

HIMANSHU BHATT के द्वारा
November 26, 2010

बेहतरीन लेख…… नेताओं कि बात तो छोड़ ही दें…… हम तो देश के शहीदों को हमेशा याद करेंगे……

    div81 के द्वारा
    November 30, 2010

    नेताओ को छोड़ना ही तो नहीं है | आप का शुक्रिया |

aftabazmat के द्वारा
November 26, 2010

दिव्या जी उच्च कोटि का लेख. बधाई.

    div81 के द्वारा
    November 30, 2010

    शुक्रिया……………

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 26, 2010

दिव्या जी नमस्ते,शहीदों के याद में बेहतर प्रस्तुती,उन जाबाज शहीद बीरों को मेरे तरफ से नमन,धन्यवाद!

    div81 के द्वारा
    November 30, 2010

    धर्मेशजी, आप का शुक्रिया

chaatak के द्वारा
November 26, 2010

दिव्या जी, इस पोस्ट में जिस खूबी के साथ आपने नेताओं का दोगला चरित्र और शहीदों के नाम पर होने वाली बेशर्मी का बयान किया है उसकी जितनी तारीफ़ की जाय कम है| विचारणीय लेख पर आपको कोटिशः बधाईयाँ!

    div81 के द्वारा
    November 30, 2010

    चातक जी, नेताओ की बेशर्मी के बार में क्या कहे इनके बारे में लिख लिख के सारी उपमाये खत्म हो गयी है, कलम घिस गयी है मर ये तो गाँधी जी ३ बन्दर है जो आंख, कान, मुह में हाथ रख kar बैठ गए है | न तो इनको कुछ दिखाई देता है न कुछ सुनाई देता है मगर मुह से साथ jab देखो hata rahta है और जबान फिसली रहती है | आप का शुक्रिया

kmmishra के द्वारा
November 26, 2010

दिव्या जी नमस्कार । देखिये आप नेताओं पर गलत सलत इल्जाम लगा रही है । वे तो शहीदों के लिये नये नये स्मारक बनवा रहे हैं । मुंबई में अभी आदर्श अपार्टमेंट बन ही रहा है । सब को पता है उस मेले में शहीदों को छोड़ कर बकी सबको याद किया गया फ्लेट बांटने में । 26.11 की बरसी पर शहीदों की शहादत को नमन करता हूं ।

    div81 के द्वारा
    November 30, 2010

    मिश्रा जी नमस्कार, अँधा बनते रबडी फिर फिर अपने को दे | ये तो बेशर्मी की इन्तहां है | आप का शुक्रिया |

suryaprakash tiwadi के द्वारा
November 25, 2010

सटीक वार किया है आपने सरकार की कार्यशैली पर.अच्छे लेख के लिए बधाई

    div81 के द्वारा
    November 30, 2010

    काश इस वार का कुछ तो असर हो पाता | आप का शुक्रिया |

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 25, 2010

एक अंतराल के बाद आए……….. इस बेहतरीन लेख के लिए बधाई……… वास्तव मे ये राजनेता जनता की यादाश्त जो की संजय सिंघानिया (गजनी मे आमिर का किरदार) की यादाश्त की तरह हैं………. जो बड़ी जल्दी सबकुछ भुला देती है………… आज के घोटाले ये चुनावों तक भूल जाए तो कोई आश्चर्य नहीं……….. इसी यादाश्त का कमाल है की हम शहीदों को कभी का भुला चुके है……………….. एक बार फिर बधाई…………

    div81 के द्वारा
    November 30, 2010

    इस बीमारी का इलाज करना होगा नहीं तो मुश्किलें कड़ी हो जाएँगी | आप का शुक्रिया


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