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हम - तुम

Posted On: 26 Dec, 2010 Others में

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ssboy
लड़का और लड़की समानता या श्रेष्ठा ये ऐसा विषय है जिसमे सभी लोग पड़ जाते है लड़के अपने को सब कुछ समझते है और लड़कियों   को कुछ भी नहीं और लड़कियों  का
भी यही हाल है वो अपने आगे किसी को श्रेष्ठ नहीं समझती | लड़कों ने कहा नहीं की चल तू लड़की है तू रहने दे हम कर लेंगे बस देखिये  वही वो कूद पड़ेगी |  मुझे रोक
कैसे दिया है इन से बेहतर तो मैं भी कर सकती हूँ,  बोल  कैसे दिया, रोक कैसे दिया  | अरे आप को कम नहीं आँका जा रहा न ही आप की क्षमता की बात हो रही है |

यूँ तो पहलवानी में भी लड़कियों ने अपना नाम कमाया है और भारोत्तोलन में भी | जितना दम  ख़म उन पहलवान लड़कियों में होता है उतना दम शायद एक सामान्य
लड़के में न हो मगर जरुरी नहीं की उतना दम हर लड़की में हो |

लड़का अपने विशेष गुणों के कारण अच्छा लगता है ताकत, सक्षम , विवेक कौशल, दूरदर्शिता हौसला वहीँ लड़कियाँ अपने गुणों  के कारण अच्छी लगती है नाजुकता,
समझ, व्यवहारकुशलता, सुक्ष्मदर्शिता , नम्र हृदय

हमेशा एक लड़के या पुरुष में चाहा जाता है वो बलशाली हो, आप उनके साथ सुरक्षित तभी महसूस करेंगी अगर आप के साथी  पुरुष में ताकत हो | सभी चाहते है लड़का

सक्षम हो (लड़कियाँ भी आज के दौर में सक्षम है मगर बिना लड़के के सक्षम हुए कोई भी माँ बाप या स्वयं लड़की भी नहीं चाहेंगी की लड़का कमाता न हो ) | विवेकी स्वभाव होना लड़कों में जरूरी है क्यूँ कि इतनी प्रतिस्पर्धा है समाज में शुरू से ही,  और अपने को बनाये रखना और तरक्की करना तभी संभव है जब बुद्धिविवेक  से सभी कार्य को अंजाम दिया जाये | दूरदर्शिता किस निर्णय से आगामी क्या परिणाम होंगे, तरक्की, सामंजस्य, ये सब आप की दूरदर्शिता पर ही निर्भर करता है| हौसला बड़े से बड़ा दुःख मुसीबत बिना जाहिर किये उससे से निकल जाना ये हौसला भी पुरुषों में होना स्वभाविक है और होना भी चाहिए |

वहीँ एक लड़की अपनी नाजुकता से सभी को आकर्षित करती है अपनी सूजबुझ से परिवार के सभी सदस्य का ख्याल रखती है | व्यवहारकुशलता से घर में मेहमानों की बीच , और समाज में अपना एक अलग मुकाम बनती है | हर बात हर चीज का सूक्ष्म निरिक्षण एक लड़की बहुत खूबी से करती है | नम्र ह्रदय तो एक महिला का विशेष गहना होता है सब को अपने में समाये हुए परिवार का सोचते हुए छोटे को समझाते हुए बड़ों को माफ़ करते हुए सिर्फ परिवार के लिए समर्पित किसी के भी दुःख में दुखी हर किसी की अच्छी कमाना करती हुई ऐसी ही तो होती है लड़कियाँ इन्ही गुणों के साथ वो अच्छी लगती है |

माहौल बदला है आज महिलाये घर में भी,  जॉब में भी,  समाज के साथ हर जगह सामंजस्य बैठा के चल रही है अब उनकी भूमिकाये बदल गयी है मगर फिर भी वो अपने
बदली हुई भूमिका को बखूबी निभा रही है |

मगर कुछ महिलाये और पुरुष भी अपनी खूबियों को भूल गए है | इस लड़ाई में की बेहतर कौन है | हमेशा एक ही  कोशिश में  कैसे एक दूसरे को निचा गिराया जाये क्या
तरकीब की जाये की सामने वाला अपनी हार मान ले |हार और जीत का तो कोई सवाल ही नहीं है | दोनों ही एक दूसरे के पूरक है | बिना सहयोग के कोई भी आगे नहीं बढ़
सकता |

अगर आप एक महिला है और इन सभी गुणों के साथ तो आप बेहतर है, और आप पुरुष है और अपने गुणों के साथ अपनी भूमिका को अच्छे से निभा रहे है तो आप बेहतर है
मगर महिलाये महिलाओ में बेहतर है और पुरुष पुरुषों में |

पर्वत अपनी विशालता और मज़बूती के लिए प्रसिद्ध है और नदी अपनी निर्मलता और निश्चलता के लिए | पर्वतों से निकली है उसी में समायी है उसी को भिगोती है और साथ ही
उसमे अपने निशान भी छोड़ देती है अपने अस्तित्व का निशान अपने प्रभाव का निशान | पर्वत अपनी  जगह अडिग है मगर नदी को सहारा दे उसी को आगे पहुँचता है |

अपने अहंकार को त्यागिये और पूरक बनिए एक दूसरे के एक दूसरे के बिना दोनों अधूरे है और एक दूसरे के सहयोग बिना भी | समूर्ण और बेहतर तभी बनेंगे जब एक दूसरे का
सम्मान और सहयोग करेंगे |
hd
और अंत में रमानाथ अवस्थी जी के लिखी हुई कुछ पंक्तियाँ
जीवन कभी सूना न हो
कुछ मैं कहूँ, कुछ तुम कहो
तुमने मुझे अपना लिया
यह तो बड़ा अच्छा किया
जिस सत्य से मैं दूर था
वह पास तुमने ला दिया
अब जिंदगी कि धार में
कुछ मैं बहूँ, कुछ तुम बहो
जिसका ह्रदय सुन्दर नहीं
मेरे लिए पत्थर वाही
मुझको नयी गति चाहिए
जैसे मिले वैसे सही
मुझको बड़ा सा काम दो
चाहे न कुछ आराम दो
लेकिन जहाँ थककर गिरुं
मुझको वहीँ तुम थाम लो
गिरते हुए इन्सान को
कुछ मैं गहुँ कुछ तुम गहो
संसार मेरा मीत है
सौन्दर्य मेरा गीत है
मैंने अभी तक समझा नहीं
क्या हार है क्या जीत है
दुःख – सुख मुझे जो भी मिले
कुछ मैं सहूँ कुछ तुम सहो |

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
December 28, 2010

div ji sach to ye hai ki ladke aur ladki me comparison hi galat hai. dono ke hi apni plus points hain, aur minus. par sach to ye ki dono hi ek doosre ke poorak hain. achha lekh, jiski ab aap ek pryay ban chuki hain http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    अबोध जी, सही कहा आप ने दोनों (लड़का और लड़की) में कोई भी comparison ही गलत है | हौसला बढाने और प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया |

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
December 28, 2010

सुश्री दिव्‍या जी, बहुत ही अच्‍छे तरीके से व्‍याख्‍या की है आपनें लड़के व लड़की के बारे में। और फिर इसके साथ आदरणीय रमानाथ अवस्‍थी जी की कविता जैसे सोने पे सुहागा । बहुत खुब । अरविन्‍द पारीक

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    आदरणीय अरविन्द जी, आप का बहुत बहुत शुक्रिया |

allrounder के द्वारा
December 27, 2010

दिव जी, लड़के और लड़कियों दोनों की ही अपनी अलग पहचान होती है, लड़के की शक्ति अलग होती है और लड़की की अलग, और दोनों ही समाज के पूरक हैं, दोनों की तुलनात्मक समीक्षा करता आपका ये लेख अति उत्तम है इसके लिए बधाई !

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    सचिन जी, हौसला बढ़ने और प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया |

roshni के द्वारा
December 27, 2010

दिव जी , अच्छे लेख के साथ बहुत अच्छी कविता …… औरत और पुरष उस परमात्मा के बनाये दो अधूरे इंसान है , जिन्हें अलग अलग qualities मिली है …..और जब ये दोनों एक साथ हो तब ये qualities एक होकर पूरा एक इंसान बन जाती है ….. संपूरण इंसान ……

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    रोशनी जी, सही कहा आप ने उस परमात्मा के बनाये दो अधूरे इंसान है , जिन्हें अलग अलग qualities मिली है …..और जब ये दोनों एक साथ हो तब ये qualities एक होकर पूरा एक इंसान बन जाती है ….बस इतनी सी बात सब समझ जाये तो झगडा ही न हो और न ही किसी के अंह का टकराव होगा | आप का शुक्रिया

Aakash Tiwaari के द्वारा
December 27, 2010

div जी, बहुत ही सुन्दर लेख,इकदम अलग टाइप का……रमन जी की कविता बहुत अच्छी लगी…… आकाश तिवारी

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    आकाश जी, बात तो सीधी सी है मगर अपने को बेस्ट साबित करने के चक्कर में दोनों ही ये भूल गए है की दोनों ही (लड़का और लड़की) सम्पूर्ण तब बनेगे जब एक दुसरे का सहयोग करेंगे | लेख को पसंद करने के लिए आप का शुक्रिया |

kmmishra के द्वारा
December 27, 2010

दिव्या जी पुरूष और नारी की विशेषताओं का विश्लेषण करता यह लेख बहुतों की जानकारी बढ़ायेगा । कविता तो दिल को छू जाने वाली है । आभार ।

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    आदरणीय मिश्रा जी, दोनों ही अपना अहंकार छोड़ कर एक दुसरे को सम्मान और सहयोग का भाव रखेंगे तो ही सम्पूर्ण होंगे जानते सभी है मगर अमल में कोई कोई ही लाता है| आप का शुक्रिया

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 27, 2010

वास्तव में धर्मं शाश्त्रों ने ये उल्लेख भी किया है की इंसान का शरीर स्त्री और पुरुष के अंश से बना है… इसी कारण कई बार जब किसी पुरुष में स्त्री अंश अधिक हो जाता है तो वो स्त्री वृत्ति का हो जाता है और इसी तरह कई बार लड़की पुरुष वृत्ति की हो जाती है…… शिव का अर्ध नारिश्वेर स्वरुप इसी बात को प्रमाणित करता है … अच्छे लेख के लिए बधाई…….

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    सृष्टि के निर्माण के हेतु शिव ने अपनी शक्ति को स्वयं से पृथक किया| शिव स्वयं पुरूष लिंग के द्योतक हैं तथा उनकी शक्ति स्त्री लिंग की द्योतक| पुरुष (शिव) एवं स्त्री (शक्ति) का एका होने के कारण शिव नर भी हैं और नारी भी, अतः वे अर्धनरनारीश्वर हैं| जब ब्रह्मा ने सृजन का कार्य आरंभ किया तब उन्होंने पाया कि उनकी रचनायं अपने जीवनोपरांत नष्ट हो जायंगी तथा हर बार उन्हें नए सिरे से सृजन करना होगा। गहन विचार के उपरांत भी वो किसी भी निर्णय पर नहीं पहुँच पाय। तब अपने समस्या के सामाधान के हेतु वो शिव की शरण में पहुँचे। उन्होंने शिव को प्रसन्न करने हेतु कठोर तप किया। ब्रह्मा की कठोर तप से शिव प्रसन्न हुए। ब्रह्मा के समस्या के सामाधान हेतु शिव अर्धनारीश्वर स्वरूप में प्रगट हुए। अर्ध भाग में वे शिव थे तथा अर्ध में शिवा। अपने इस स्वरूप से शिव ने ब्रह्मा को प्रजन्नशिल प्राणी के सृजन की प्रेरणा प्रदा की। साथ ही साथ उन्होंने पुरूष एवं स्त्री के सामान महत्व का भी उपदेश दिया।

jagobharat के द्वारा
December 27, 2010

दीवाजी बहुत सहजता के साथ आपने स्त्री पुरुष की क्षमताओं में एक सामंजस्य स्थापित किया है…. आपने विवाद को विराम देते हुए एक एक सुन्दर रचना की है…इससे आपकी परिपक्वता का पता चलता है….बधाई……

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    पंकज जी, विवाद कुछ है ही नहीं मगर जब अहंकार जन्म लेता है तो विवाद अपने आप आ जाता है | दोनों अगर एक दुसरे का सम्मान करेंगे सहयोग करेंगे तभी सम्पूर्ण होंगे | शुक्रिया

Preeti Mishra के द्वारा
December 27, 2010

सही कहा आपने दिव्याजी स्त्री-पुरुष एक दूसरे के पूरक है. अच्छी रचना के लिए बधाई.

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    प्रीती जी, आप का शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
December 27, 2010

चलो छोटी हो तो दिव्या चल सकता है,खुश. समाज में निरर्थक बहस के ऊपर एक अच्छा प्रहार.वास्तव में समाज,परिवार या देश किसी ही स्तर पर यदि हम एक दुसरे के आमने सामने नहीं अपितु अपनी क्षमताओं या नैसर्गिक विशेषताओं के साथ साथ साथ चलेंगें तभी आगे बढ़ सकते है,अवस्थी जी की पंक्तियाँ से परिचित करने हेतु धन्यवाद.

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    :) आदरणीय निशा जी, बहुत खुश, सही कहा निरर्थक बहस ही तो है ये कि दोनों ही अपने को बेस्ट साबित करने में लगे है | जबकि और दोनों बिना एक दूसरे के सहयोग के अधूरे है | अपनी अपनी विशेषताओ के साथ, साथ चलेंगे तभी आगे बढ़ेंगे :) | आप का शुक्रिया

ASHVINI KUMAR के द्वारा
December 27, 2010

प्रिय बहन एक उद्हरण (कुल्हाड़ी और उसके बेंट की कुल्हाड़ी अगर लोहे की और तीछन नही होगी तो लकड़ी नही काट पायेगी ,और बेंट अगर कोमल नही होगा तो काटने वाले के हाथों को दर्द का एहसास होगा ,,इसी तरह महिला पुरुष दोनों ही एक दूसरे के संपूरक होते हैं,इसमे कोइ शोषक शोषित नही होता ,,बशर्ते की कोइ रुग्न विचार अथवा अस्वस्थ मस्तिस्क का न हो ……..जय भारत

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    दादा, सही कहा महिला पुरुष दोनों ही एक दूसरे के संपूरक होते हैं,इसमे कोइ शोषक शोषित नही होता | बस अस्वस्थ मस्तिस्क या विचार नहीं होना चाहिए ये ही अस्वस्थ विचार सोच झगड़े और कुंठा को जन्म देते है |

Arunesh Mishra के द्वारा
December 27, 2010

एक अच्छा लेख…अवस्थी जी की कविता से अवगत करने के लिए धन्यवाद

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    अरुणेश जी, आप का बहुत बहुत शुक्रिया

Syeds के द्वारा
December 27, 2010

बेहद खूबसूरत लेख…बेशक औरत-मर्द एक दूसरे के पूरक हैं प्रतिस्पर्धी नहीं…कुदरत ने दोनों को बनाया है और दोनों उनकी जिम्मेदारियां दी हैं… दोनों की अपनी विशेषताएं हैं… दोनों को अपने अधिकार मिलने चाहिए….७/५ यहाँ ७ दे दिया वहां पर ५ ही दे सकतें हैं maximum… :( http://syeds.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    December 30, 2010

    syeds जी, आप की प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया आप के ……………७/५ यहाँ ७ दे दिया वहां पर ५ ही दे सकतें हैं maximum… :( का मतलब समझ नहीं आया |

    Syeds के द्वारा
    December 31, 2010

    rate this article option में ५ स्टार ही हैं…हम चाहते थे आपके इस लेख के लिए सेवेन स्टार दें…. http://syeds.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    December 31, 2010

    syeds ji,इस हौसला अफजाई के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

RaJ के द्वारा
December 26, 2010

MEN ARE MARS WOMEN ARE VENUS . THEY ARE COMPLIMENTARY TO EACH OTHER RATHER COMPETITIVE

    div81 के द्वारा
    December 31, 2010

    आदरणीय राज जी, इतनी छोटी सी बात अगर समझ आ जाये तो झगडा ही समाप्त हो जाये | आप की प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया


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