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तू कितनी भोली है, कितनी प्यारी है "माँ "

Posted On: 9 Jan, 2011 में

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हम को तो माँ का वो चेहरा याद है
फूंका करती थी अंगेठी को
वो फुंकनी  भरा हाथ याद है
प्यार से मिलती थी
गर्माहट और नरमाहट
वो प्यार भारी गोद याद है
सर्दियों कि धूप जैसा
माँ का वो चेहरा याद है
साईकिल से गिरी थी
जब पहली बार
मेरे दर्द में, उनका
आँसू भरा चेहरा याद

images

प्यार से रखा था, हाथ सर पर
वो प्यार भरा एहसास याद है
ठंडी छाँव जैसा
माँ का वो चेहरा याद है
मेरी गुड़िया कि शादी में
वो तमाम इंतज़ाम याद है
मेरी नादानियों में
वो हँसता मुस्कुराता चेहरा याद है
बसंत बहार सा
माँ का वो चेहरा याद है
कई बार हो जाती है
घर आने में जो देर
मुझे उनका वो
परेशानी वाला चेहरा याद है

jk

काली घटा सा

माँ का वो चेहरा याद है

गुस्से में कर जाती हूँ, जो ग़लतियाँ

वो उनकी नसीहत भरी डांट याद है

तपती दुपहरी सा

माँ का वो चेहरा याद है

मेरी परेशानियों में परेशान हो जाना

मेरी खुशियों में जश्न मनाता चेहरा याद है

बिन मौसम कि बरसात सा

माँ का वो चेहरा याद है

जब भी झुका है सजदे में सर उनका

मेरी खुशियों के लिए मांगी

हर एक दुआएं याद है

CB106347 सदा बहार सा

माँ का वो चेहरा याद है

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61 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Avi के द्वारा
February 1, 2011

wo kahte hai na “usko nahi dekha humne kabhi, par iski jaroorat kya hogi.. aye maa teri surat se alag bhagwaan ki surat kya hogi”…. jitne shabd bolo ya likho kam hi lagta hai…. isliye kahunga chhoti si par sundar kavita…. Jai Mata Di.

rajkamal के द्वारा
January 20, 2011

जब भी झुका है सजदे में सर उनका मेरी खुशियों के लिए मांगी हर एक दुआएं याद है aadrniy divya ji …. सादर अभिवादन ! वैसे तों सारी की सारी ही कविता लयात्मक है और अच्छी भी …. लेकिन मुझको तों सबसे ज्यादा यही लाइनें भायी ….. अच्छी कविता के लिए साधुवाद

    div81 के द्वारा
    January 21, 2011

    धन्यवाद राजकमल भाई माँ की स्नेहमयी आंचल की छाँव में जो आनन्द है उसके समछ स्वर्ग भी अगर कहीं है तो वह भी व्यर्थ है…….

    yusuf khan के द्वारा
    January 28, 2011

    MAA KE BIN SOONI HE DUNIYA, SOONA YE SANSAAR HE, MAA SE BADH KAR IS DUNIYA ME NAHI KISI KA PYAR HE apni mail id mail kare ya fon kare 9259433457 puri kavita fir kabhi / magar is kaivta ko sunne ke bad sunne walo ki aankho me aansu na aaye to kahna kyu ke ye kavita aansuo tar ho kar likhi gai he,,, jay hind – ajabpur kalan near masjid dehradun uttrakhand 9259433457

    div81 के द्वारा
    January 29, 2011

    युसूफ भाई,, JJ ब्लाग को आप जैसे मर्मस्पर्शी कवियों की आवश्यकता है ,अगर आप ब्लागिंग करेंगे तो न जाने कितनों की आखों में आंसू ला देंगे, मेरा आपसे अनुरोध है की आप ब्लागिंग सुरु कर दीजिये………

    rajkamal के द्वारा
    January 31, 2011

    दिव्या बहन …..नमस्कार ! यह मंच है ही ऐसा अनोखा की इसमें सभी समा जाते है … यहाँ पर हर किसी की अपनी -२ खासियत है + अपना अलग ही अंदाज़ है ….. यहाँ पर कविता या गजल वोह भी ऊँचे स्तर की , उनका तों हमेशा ही इंतज़ार रहता है ब्लागरो को ….यह अलग बात है की कोई टिप्पणी करे या ना करे , लेकिन पढ़ कर पसंद करते है और लिखने वाले का लोहा मानते है ….. धन्यवाद

    div81 के द्वारा
    January 21, 2011

    जी धन्यवाद

    div81 के द्वारा
    January 19, 2011

    प्रयाश करूंगी अतुल जी ,,मेरे हृदय के भावों पर आपकी नजरेइनायत हुई आपने सराहा ,,धन्यवाद …………..

danishmasood के द्वारा
January 18, 2011

“इलाज सम्भव है” “सखी सईंया तोह खूब ही कमात है” नव वर्ष का संकल्प मेरी प्यारी बेटी …………………….और अब माँ पर लिखी ये रचना अति सुन्दर मुझे जो अच्छा लगा उसकी तारीफ करना ज़रूरी था

    danishmasood के द्वारा
    January 18, 2011

    देरिके लिए क्षमा

    div81 के द्वारा
    January 19, 2011

    धन्यवाद दिनेश जी ये मेरे अंतर की अभिव्यक्ति है ,काश सबके अंतर में भी सदैव यह विद्यमान रहे इसी आशा के साथ ……………

Amit Dehati के द्वारा
January 13, 2011

आदरणीय दिव्या जी ! प्रणाम ! जी भर के रोने को नैन ब्याकुल है …………………… सच कहूँ तो किसी की अहमियत उनके न होने के बाद समझ में आती है | ऐसे में माँ ………………………………………………………………. बस दिव्या जी इससे ज्यादा अब कुछ नहीं कह पाउँगा ……………… बहुत बहुत बहुत सुन्दर रचना ………………… अपने तो माँ की याद दिला दी रे !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! आपका बहुत -बहुत धन्यवाद ! http://amitdehati.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    January 18, 2011

    अमित जी( माँ ) एह्शाश को रंच मात्र भी अगर हम अपने दिल में उतार लें तो यह दुनिया ही स्वर्ग (जो की शायद कहीं खो गया है ) बन जाए . जीवन क्षणभंगुर है हम सभी जानते हैं लेकिन मानने को तैयार नही होते ,बेवजह का आक्रोश धनलिप्सा एवं अन्यान्य तरह की विकृतियों से हमारा जीवन भरा रहता है (इस ममत्व की भावना एक बूंद भी अगर हम अपने ह्रदय में उतार लें ),फिर इस जगत में स्वर्ग का कोई नाम भी नही लेगा,क्योंकि यह जगत स्वयम ही स्वर्ग से बढ़कर होगा…

वाहिद काशीवासी के द्वारा
January 13, 2011

दिव्या जी! क़ुदरत के अनमोल तोहफ़े यानि माँ और बच्चे के बीच के सम्बन्ध को खूबसूरती से उकेरा है आपने| एक छोटा सा गीत याद आ गया.. “बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ, याद आती है चौका,बासन,चिमटा,फुंकनी जैसी माँ; बांध के खुर्री खाट के ऊपर हर आहात पर कान धरे, मुर्गे की आवाज़ पे खुलती घर की कुण्डी जैसी माँ;” शुक्रिया,

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    January 13, 2011

    आहात – आहट

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    January 13, 2011

    वैसे मुनव्वर राणा साहिब के अशआर का बहुत खूबसूरती से उद्धरण दिया है आपने अपनी हर प्रतिक्रिया में.

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    :) वाहिद जी निदा फ़ाज़ली जी पूरी ग़ज़ल याद दिलाने के लिए आभार मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती घर की कुंडी जैसी माँ बिवी, बेटी, बहन, पड़ोसन थोड़ी थोड़ी सी सब में दिन भर इक रस्सी के ऊपर चलती नटनी जैसी माँ बाँट के अपना चेहरा, माथा, आँखें जाने कहाँ गई फटे पुराने इक अलबम में चंचल लड़की जैसी माँ

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    January 13, 2011

    आपका ग़ज़लों का ज्ञान तो बेशुमार है| जानकर बहुत अच्छा लगा| शुक्रिया बाकी की पंक्तियाँ यहाँ quote करने के लिए|

deepa pandey के द्वारा
January 12, 2011

hello mam…srsly bhut khubsurart likha h hey hr raat apni maa ko yaad krke roti hu..mne maa ki kimat hstal m rhne k baad jani. kitni khubsurat hoti h maa..kbhi bhi tklif hoti h maa k cehre ko dekhkr sab jaise chala jata…..rly miss u a lot my maaaaaaaaa…..

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    hello दीपा ……….अपनों की कद्र तो उन से दूर जाने पर ही पता चलती है | घर में आप की थोड़ी से तबियत खराब हो जाने पर माँ सारा सारा दिन परेशान रहती थी और जब आप हॉस्टल में हो कितनी भी तबियत खराब हो जाये तब भी कोई प्यार से हर पर हाथ नहीं फेरता कोई पूछने वाला नहीं होगा की क्या खाना खा लिया ………….सच माँ की जगह कोई नहीं ले सकता इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है

K M Mishra के द्वारा
January 11, 2011

दिव्या बहन नमस्कार । किसी ने सच ही काहा है कि भगवान हर जगह नहीं पहुंच सकता इसलिये उसने मॉं बनायी । आभार ।

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    आदरनीय मिश्रा जी, …………………………..खुदा का नूर है माँ, इस जहाँ में काबा कशी है माँ

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    आदरनीय मिश्रा जी, …………………………..खुदा का नूर है माँ, इस जहाँ में काबा काशी है माँ

chaatak के द्वारा
January 10, 2011

दिव्या जी, एक और उत्कृष्ट रचना पर बधाई! वात्सल्य का यह रूप किसे न झंकृत कर देगा, माँ के सभी रूप आपने शब्दों के माध्यम से उकेरे और इतनी पूर्णता से उकेरे कि तारीफ़ के लिए शब्द नहीं मिल रहे| नव वर्ष की मंगल कामनाएं!

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं मां से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ चातक जी, आप का शुक्रिया ……….

Thakur के द्वारा
January 10, 2011

जब पड़ा था मेरी आँख में व्लोधर का ज़हरीला दूध तो रात भर स्तनों से दूध की धार मेरी आँख में डाल कर मेरी दर्द का इलाज करने का वो करिश्मा मुझे याद है !!! ८१ जी प्रणाम मेरी माता जी ने येही किया था और सुबह तक मैं ठीक हो गया था आपकी इस कविता नें मेरी आँखों में आंसू ला दिए इससे बड़ा तोहफा शायद दुनिया में कहीं नहीं है | बेहद शुक्रिया | प्रीतम |

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    भगवन हर समय हमारे साथ नहीं रह सकता तो उन के द्वारा दिया हुआ अनमोल तोफाह माँ है जो हर समय हमारे साथ रहती है और हमको हर परेशानी से सुरक्षित निकल लाती है | रिश्ते बहुत देखे मैंने मगर साथ मेरे हर कदम माँ मिली

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 10, 2011

इस विषय (माता या पिता) पर पढ़ते, लिखते या बोलते समय मैं अक्सर भावनात्मक हो जाता हूँ………इसलिए बहुत कुछ नहीं कहूँगा………. बस इतना ही कहना चाहता हूँ। की अपनी संतान के लिए माँ बाप अपनी सारी खुशियाँ लूटा देते है………. पर अपने सुख के लिए औलाद ही उसको बुढ़ापे मे छोड़ देती है……

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    \’मुनव्वर\’ माँ के आगे यूँ कभी खुलकर नहीं रोना जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती पियूष जी कुछ लोग है जो हीरे के परख नहीं जानते माँ बाप की कीमत उन से पूछिए जो उन के प्यार से महरूम रह जाते है |

roshni के द्वारा
January 10, 2011

दिव्या जी दुनिया का सबसे सुंदर प्यारा शब्द माँ ….. व्याख्या से परे …. सिर्फ अपने बच्चे के बारे में हर पल सोचती माँ उसके लिए दुआ मागती माँ …… क्या कहू मेरे पास तो शब्द बी नहीं सुंदर रचना

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    रौशनी जी, जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है, माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है कुछ मत कहिये माँ को एक जादू की झप्पी दे दीजिये देखना वो सब समझ जाएँगी :)

Aakash Tiwaari के द्वारा
January 10, 2011

div जी, इस उत्कृष्ट रचना पर क्या कहूं……मां से बढ़कर इस धरती पर क्या है? कुछ भी नहीं…..best ….. आकाश तिवारी

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    सच कहा आकाश जी आप ने माँ से बढ़कर कुछ भी नहीं है …………..आप का शुक्रिया

aditya के द्वारा
January 10, 2011

दिव्या जी, जननी पर उत्कृष्ट रचना के लिए हृदय से आभार………………माँ का त्याग और वात्सल्य अतुलनीय हैं…………………. कृपया मेरी कविता \"माँ\" पढने का कष्ट करें ……………….. धन्यवाद आदित्य http://www.aditya.jagranjunction.com

aditya के द्वारा
January 10, 2011

दिव्या जी, जननी पर उत्कृष्ट रचना के लिए हृदय से आभार………………माँ का त्याग और वात्सल्य अतुलनीय हैं…………………. कृपया मेरी कविता ”माँ” भी पढने का कष्ट करें ……………….. धन्यवाद आदित्य http://www.aditya.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    सुख देती हुई माओं को गिनती नहीं आती पीपल की घनी छायों को गिनती नहीं सच कहा आप ने माँ का त्याग और वात्सल्य अतुलनीय हैं…………आप का शुक्रिया

naturecure के द्वारा
January 10, 2011

दिव्या जी , वास्तव में माँ तो माँ है , माँ को परिभाषित करे -ऐसे शब्द मेरे पास नही हैं | सुन्दर रचना के लिए बधाई ……| डॉ. कैलाश द्विवेदी

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    डॉ. कैलाश द्विवेदी जी, माँ को परिभाषित नहीं किया जा सकता है माँ तो परिभाषा से परे है उनमे सारी दुनिया है, उसके ही अंचल में ही स्वर्ग है माँ के लिए कुछ भी कहूँ वो कम है | आप का शुक्रिया

allrounder के द्वारा
January 10, 2011

दिव्या जी, आपकी इस कविता मैं एक बार फिर से माँ के अपने बच्चे के प्रति सच्चे प्यार की झलक दिखाई देती है, मेरी नजर मैं माँ से ज्यादा सच्चा और निस्वार्थ प्यार आपको दुनिया मैं कोई दूसरा कर ही नहीं सकता ! बहुत ही प्यारी कविता के लिए हार्दिक बधाई !

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है सचिन जी, आप का शुक्रिया

ashvinikumar के द्वारा
January 10, 2011

तुम्हारी इस प्यारी खुबसूरत अभिव्क्ति की प्रशंसा के लिए मेरे पास शब्द नही है,, माँ तो बस माँ ही होती है , ममता अविरल बहती है , उसके जैसा कोई नही, वह तो खुद ईश्वर होती है , पहला शब्द भी माँ ही , पहले वाणी से निकलता है, पतझड़ में वसंत है वो , जीवन में ऊर्जा भरती है, प्रारम्भ है जीवन का सबके , छावों में उसकी स्वर्ग बसा , वह प्रथम किरण सी होती है, ममता उसकी निश्छल है , उसकी क्रोध में प्यार भरा , जग हो जाता है व्यर्थ वहां , जब आलिंगन में लेती है ,,.……………जय भारत

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    मेरी रचना को पूर्णता देने के लिए आप का आभार :) मैंने रोते हुए पोछे थे किसी दिन आँसू मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुप्पट्टा अपना

Dharmesh Tiwari के द्वारा
January 10, 2011

दिब्या जी वाक्य्यी,माता का हर क्रिया बच्चों के भलाई के लिए ही होता है ,माँ के याद में बेहतरीन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,धन्यवाद!

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    धर्मेश जी, माँ के लिए कुछ भी हम कर पाए वो बहुत कम होगा और वो माँ पूरा जीवन हमारे लिए समर्पित कर देती है ………………………प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया …

Arunesh Mishra के द्वारा
January 10, 2011

माँ, वो शब्द जहाँ पर दुनिया शुरू भी होती है और ख़तम भी…अच्छा पिरोया आप ने माँ की यादो को….

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    ऐ अंधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया, माँ ने आँखें खोल दी घर में उजाला हो गया अरुणेश जी, सारी कायनात माँ के कदमो तले मिलती है ………………….आप का शुक्रिया

Syeds के द्वारा
January 9, 2011

दिव्या जी बेहद खूबसूरती से पेश किया… वाकई में माँ औलाद के लिए महानतम हस्ती होती है…. राटिंग तो पुरानी वाली ही है….५/५

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    ज़रा सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाए दीए से मेरी माँ मेरे लिए काजल बनाती है ………………………………:) शुक्रिया

January 9, 2011

दिव्या जी, खूबसूरत और भावनात्मक रचना.

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    राजेंद्र जी, प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया …………

abodhbaalak के द्वारा
January 9, 2011

दिव जी आपकी रचनाओं की विशेषता ये है की आप भावना का का बड़ी कुशलता के साथ प्रयोग करती हैं और इसलिए रचना का अलग ही रंग ….. बहुत सुन्दर कविता, http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    अबोध जी, आप का तहे दिल से शुक्रिया ………….कविता को पसंद करने के लिए साथ ही हौसला बढाती तारीफी प्रतिक्रिया के लिए :)

Harish Bhatt के द्वारा
January 9, 2011

दिव्या जी नमस्ते, बहुत ही उत्कृष्ट माँ का वो चेहरा याद है, जब भी झुका है सजदे में सर उनका मेरी खुशियों के लिए मांगी, हर एक दुआएं याद है दिल को छू जाने वाली कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    अभी ज़िंदा है माँ मेरी, मुझे कुछ भी नहीं होगा, मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है आदरणीय हरीश जी, माँ तो ऐसी ही होती है हरदम बच्चो के लिए दुआएं मांगती हुई ………….आप का शुक्रिया

atharvavedamanoj के द्वारा
January 9, 2011

माँ तो बस माँ है… दिव्या जी इससे महान कुछ भी नहीं है..भगवान भी नहीं…आपकी कविता को मेरा नमन

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    लबों पर उसके कभी बददुआ नहीं होती, बस एक माँ है जो कभी खफ़ा नहीं होती…………………माँ तो बस माँ है……..आप का शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
January 9, 2011

दिव्या सच आपकी कवितायेँ सदा ही मन को छूने वाली होती है और `भावनाओं के समुन्द्र में गोते लगवा देती हैं.

    div81 के द्वारा
    January 13, 2011

    आदरणीय निशा जी, ये तो आप का प्यार है :) आप का प्यार को आशीर्वाद यूँ ही बना रहे ऐसी ही कमाना है मेरी ………..आप का तहे दिल से शुक्रिया


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