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या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।

Posted On: 3 Feb, 2011 Others में

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saraswatig फरवरी लगते ही मैंने मौसम में एक सुखद बदलाव महसूस किया | जनवरी की जो कंपकंपाती   ठंड थी फरवरी लगते ही वो बहुत कम हो गई है ,वैसे तो बसंत दस्तक दे रहा है | चारों तरफ बसंती बहार है | कहीं खेतो में पीली पीली सरसों के फूल खिल रहे है तो वहीँ  पहाड़ों में पलाश के पेड़ो में कलियाँ फूट रही है | यही तो संकेत है बसंत के आगमन का,, वैसे तो सभी मौसम अच्छे लगते है मगर जब अति आने लगती है तो सब परेशान हो जाते हैं|

सर्दी का मौसम लगा नहीं कि सभी के बातों में एक विषय सर्दी का भी रहता है……अरे भाई कितनी सर्दी है ,हाड़ कंपाती ठंड ने तो घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है ……………..वहीँ औरतों का तो सबसे प्रिय मौसम जैसे सर्दी ही हो
घरेलू काम निमटा के स्वेटर बुनती हुई , ऑफ़िस के लंच ब्रेक में नया नमूना सीखती  हुई | मगर वह भी इस मौसम से त्रस्त रहतीं हैं |
बस फिर इंतजार गर्मियों के आने का गर्मी के मौसम से भी सभी बेहाल ही रहते है ……………..उफ़ कितनी गर्मी है ऊपर से बिजली विभाग कि मेहरबानी, सब लोगो कि परेशानी का सबब बनती है | पहले जब रात  को  पवार कट होता था हम बहुत खुश होते थे ……..खुले आँगन में सब के बिस्तर लग जाते थे | और हम बच्चे मिल कर तारे कि गिनती शुरू कर देते थे | और कभी अचानक टूटता तारा देख ले तो बहुत सारी भोली सी मन्नत मांगते थे |
मगर अब वो बात नहीं रही न तो खुला आँगन रहा न खुले आँगन में सोने का चलन ही अब रहा | वैसे ये अलग विषय है इस में फिर कभी सोचा जायेगा …..मगर अब पवार कट होते ही बिजली विभाग को कोसना शुरू हो जाता है साथ ही गर्मी से कैसे छुटकारा पाया जाये ये सोचा जाने  लगता है |
अब गर्मी से तो बरसात ही राहत  दे सकती है | तो शुरू हो जाता है बरसात का इंतजार …………………….आह बरसात मेरा पसंदीदा मौसम और बहुत से लोगो का भी ……कवि मन बरसात में हमेशा खुश रहता है | मगर सभी मन तो कवि नहीं होता | इस मौसम कि भी अपनी मुश्किलें है | पिछले बार कि बरसात याद है न पूरे भारत के साथ उत्तराखंड में भी भारी तबाही मचाई थी इस निर्मोही बरसात ने | कहीं  अति  ओलावृष्टि ने खेत तबाह किये तो कही अति वृष्टि ने पूरे गाँव के गाँव , कहीं बदल फटने से कई मासूम कि खिलखिलाहट शांत हो गयी तो कहीं शांत वादियों में हलचल मचा गयी पिछली बरसात |  | गंगा खतरे के निशान के ऊपर आ गयी तो वहीँ  यमुना भी अपने उफान पर आ गयी |

मंजर बचा तो सिर्फ तबाही का ……………..त्राहि त्राहि करते लोग सिर्फ बरसात के थमने का इंतजार कर रहे  थे |
वैसे कोई भी मौसम अगर अति पर होता है तो सरकारी विभाग कि बांछे  खिल जाती है …………अरे राहत कार्य के जरिये नए घोटाले को अंजाम देने के लिए | होड़ लग जाती है केन्द्र सरकार से कैसे ज्यादा से ज्यादा अनुदान प्राप्त किया जाये और कैसे ज्यादा से ज्यादा घोटाला किया जाये …..खैर ये भी अलग विषय है
हाँ तो हम  मौसम कि चर्चा कर रहे थे | अति वर्षा से बेहाल हो सर्दियों का इंतजार शुरू हो जाता है |
तो घूम फिर के मौसम चक्र वहीँ आ जाता है मगर इन सब मौसम में सबसे प्यारा, सुहाना, लवली मौसम बसंत का ……………….सब मौसम का सरताज मौसम ……..एक गाने कि लाइन याद आ गयी ………..एक बरस के मौसम चार मौसम चार …..पांचवा मौसम प्यार का इंतजार का
ये ही तो वो मौसम है बसंत बहार का …………इसी मौसम का तो सभी इंतजार करते है, सब जगह हरियाली, खुशहाली….अब नेचुरल सी बात है जहाँ हरियाली होगी वहीँ  खुशहाली होगी और वहीँ होगा प्यार भी |


बसंत के मौसम का एक अलग ही महत्व है | बसंत पंचमी उमंग, उल्लास, उत्साह, विद्या, बुधि और
ज्ञान का पर्व है ,,इसी दिन हम माँ सरस्वती का जन्मोत्सव मनाते हैं | सृष्टि के प्रारम्भ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों आ॓र मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं।
इसी दिन सरस्वती पूजन का विधान है | मुझे याद है अब भी स्कूल के दिनों कि जब स्कूल में बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन होता था | पूजन में मैम और सीनियर (10 और +2 ) कि छात्राए ही आगे पूजन में शामिल होती थी | हम को पीछे बैठाया जाता था | हम बस उस दिन का ही इंतजार करते थे कि कब हम भी आगे बैठे | पूरा स्कूल पीले फूलों से सज जाता था और पीले ही वस्त्रो में सजी हम सब छात्राए  | पूजन में शामिल हो कर हम सिर्फ एक ही कामना करते कि माँ अच्छे नम्बरों से पास हो कर आगे बढे |
स्कूल छूटते ही वो सब बाते भी छूट गयी है, मगर उस का महत्त्व आज भी मेरे लिए उतना ही है |
आज का वक्त इतना आपाधापी वाला हो गया है | हर दम आगे निकलने कि दौड़ में अपना खुद को  भूलते जा रहे है | सब कुछ पाने कि लालसा में छोटी छोटी ख़ुशियों को भूलते जा रहे है | हम लोगों ने जीतने की चाहत में ऐसे ऐसे कदम उठाये हैं कि हारने के डर ने कुंठा को जन्म दे दिया है, जो हर दम हम
को निराश और हताश माहौल में ले जाती है  | निराशा ने हमारे अंदर ऐसा घर कर लिया है कि हम अपने आस पास बिखरी खूबसूरती का आनन्द ही नहीं ले पाते |  कोई भी मौसम हो हम चूहा दौड़ में उलझे रहते हैं |
जैसे बसंत के आते ही हर जगह फूलो ने खूबसूरती और खुशियाँ बिखेर दी है | वैसे ही मेरी भी यही कामना है कि सब के जीवन में ये बसंत आ कर ठहर जाये और जीवन को उमंग एवं उल्लास भर दे , सबके जीवन में ख़ुशियों के फूल खिलें और बसंत ऋतू जैसा उल्लास और उमंग सबके जीवन में बना रहे | 

जीवन में ख़ुशियों के फूल खिलें,
उपवन सा ये जीवन महके ,
प्रस्फुटित हो रही कोपल की  ,
कोमलता जीवन में भर दे ,
वासन्तिक मधुरिम बेला ये ,
हर तन में स्पन्दन भर दे ,
इस नवल पर्व की पावनता में ,
कुछ नवीन संकल्प करें ,
इस  ज्ञान पर्व की छावों में ,
माँ भारती को नमन करें ,,

इसी कामना के साथ आप सब को बसंत पंचमी(ज्ञान पर्व)की ढेरो शुभकामनाये |

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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rddixit के द्वारा
March 23, 2011

divji, sundar lekh ke liye badhai. div stands for divya but 81 stands for what ?

syeds के द्वारा
February 13, 2011

दिव्या जी , मौसम के बदलते हुए(बदल चुके) मिजाज़ पर खूबसूरत लेख,वैसे हम आप के contest वाले लेख/कविता का भी इंतज़ार कर रहे थे लेकिन शायद आपने हिस्सा नहीं लिया उसमे… http://syeds.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    February 14, 2011

    | syeds जी, यहाँ का मौसम फिर बदल चुका है एक बारिश ने गर्मी कि दस्तक को बैरंग लोटा दिया :) |

Harish Bhatt के द्वारा
February 13, 2011

दिव्या जी नमस्ते. बसंत ऋतु पर बहुत ही बेहतरीन के लिए हार्दिक बधाई.

    Harish Bhatt के द्वारा
    February 13, 2011

    दिव्या जी नमस्ते. बसंत ऋतु पर बहुत ही बेहतरीन लेख के लिए हार्दिक बधाई

    div81 के द्वारा
    February 14, 2011

    हरीश जी, नमस्कार………….आप का शुक्रिया

February 12, 2011

दिव्या जी, अगर आपका नाम यही है तो कम से कम एक बार बता तो दीजिये वर्ना…..div जी, लेख पर तो मैं रोशनी जी के ही विचार रिपीट करूंगा. आप भले ही इस कंटेस्ट में भाग न लें पर अपने लेख तो डालते रहें. इस कांटेस्ट में भाग लेने लायक तो हम भी नहीं हैं पर दोस्तों की खातिर एन्जॉय कर रहे हैं……आप भी इसका मजा लीजिये….धन्यवाद.

    div81 के द्वारा
    February 13, 2011

    आप ने कभी पूछा ही नहीं रतूड़ी जी, बताते कैसे………………………..दिव्या नाम certificate के अनुसार है दिव नाम से लिखती हूँ | बसंत पंचमी के लेख का हाल देख कर डर गयी हूँ फीचर्ड हुए २ hour हुए ही थे फीचर्ड कब गायब हुआ पता ही नहीं चला | 1 से जागरण जंगशन में जो प्यार का शंखनाद हुआ है 14 तक उसी को सुनेगे | आप एन्जॉय कीजिये आप के लेख से हम भी एन्जॉय कर रहे है | बाकी हमारी शुभकामनाये आप के साथ भी है |

roshni के द्वारा
February 9, 2011

div ji माँ सरस्वती की कृपा से ही हम सब आज यहाँ है और माँ की कृपा ही सबको आगे ले जाएगी …….. हे माँ सरस्वती ऐसे ही आप अपना आशीर्वाद देती रहे …….. बसंत बहार की बहुत साडी शुभकामनये

    div81 के द्वारा
    February 12, 2011

    रौशनी जी, आप का बहुत बहुत शुक्रिया आप को भी बसंत बहार की शुभकामनाये :)

chaatak के द्वारा
February 9, 2011

बसंत के पर्व पर माँ वाग्देवी को समर्पित इस पोस्ट को पढ़कर अत्यंत प्रसन्नता हुई| वंदना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला लो| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    div81 के द्वारा
    February 12, 2011

    चातक जी, बहुत दिनों बाद आप की कोई प्रतिक्रिया प्राप्त हुई अच्छा लगा | आप का शुक्रिया बिलकुल सभी के स्वर मिलेंगे तभी एक स्वर बनेगा |

ashvinikumar के द्वारा
February 5, 2011

काश हम भारतीय केवल ज्ञान के लिए वैदेशिक जीवन शैली का अनुकरण करते लेकिन अफशोश भारतीय युवा अंधी दौड़ (जिसे आधुनिकता कहा जाता है,,)में इतने तल्लीन हैं कि संस्कारों को रीति रिवाजों को सम्मान को भारतीयता को यहाँ तक कि मातृभूमि को भी भूल चुके हैं ,,यह वही भारत है जहां न जाने कितने लोग अपनी ज्ञान पिपासा शांत करने आये और तृप्त होकर गये ज्ञान के अनेकों आयाम इसी माँ भारती की कोख से उपजे ,,प्रेम जो आजकल इस मंच का लक्छ्य बना हुआ है ,,क्या प्रेम शब्दों के माध्यम से प्रकट किया जा सकता है मेरे विचार से तो नही ,,यह अनुभूति होती है हम मह्शूश कर सकते हैं लेकिन बता नही सकते यह ऐसी वस्तु है जिसे शब्दों में बाँधा नही जा सकता ठीक परम पिता परमात्मा की तरह वस्तुतः दोनों चरम पर एक ही हैं जिस तरह उसके सम्बन्ध में व्यक्ति मूक बन जाता है उसके गुण व्यक्त कर सकता है लेकिन उसे नही यही स्थिति प्रेम के विषय में भी है हम उसके गुणों को शब्दों में व्यक्त कर सकते हैं लेकिन प्रेम को नही ,,दोनों ही स्थितिया एक जैसी होने के बावजूद भी पूर्णतया एक दूसरे के विपरीत हैं हम प्रेम के कुछ एक गुणों को व्यक्त कर पाते हैं लेकिन प्रेम को नही ,,प्रेम हृदयगत विषय है जहां मष्तिष्क चलना बंद होता है वहीं से प्रेम का पथ शुरू होता है (एक उक्ति है प्रेम अँधा होता है ,,पूरी तरह सत्य है ,इसके एक पहलू को चुनते हैं,, आप किसी को प्रेम करते हैं (क्या इसमे वासना है ,,जी हाँ है एक आलम्बन की तरह है ,, लेकिन वह प्रेम नही है अनेक रास्तों में से एक रास्ता) क्योंकि जिसे आप चाहते हैं वह आपकी इस चाहत को कैसे मह्शूश कर पायेगा ,कुछ तो भौतिक क्रिया करनी होगी प्रेम को शुरू करने के लिए फिर स्वयमेव ही प्रेम का अंतर्बोध आप दोनों को होने लगता है फिर किसी आलम्बन की आवश्यकता शेष नही बचती दोनों एक दूसरे को मह्शूश करने लगते हैं (यह मानव एवं ईश्वर दोनों के ऊपर लागू होता है दोनों को प्रारम्भिक स्फुरण के लिए भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है एक बार स्फुरण हो गया फिर प्रेम अविरल बहने लगता है माध्यम वहीं रह जाते हैं और आप ऊपर उठ चुके होते हैं वहां जहां से आप उसे दूसरों के लिए व्यक्त नही कर सकते (या तो मै जानू या फिर मेरा खुदा )…………जय भारत

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2011

    आपके विचारों से साम्य है कुछ न कुछ अश्विनी जी.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 4, 2011

दिव्या जी, ऐसे समय में जब सारे ब्लॉगर वैलेंटाइन कॉन्टेस्ट में जुटे हैं, माँ शारदा को समर्पित आपका यह लेख और उसमें व्यक्त सुन्दर विचार हृदय को प्रफुल्लित कर गए|बहुत शुक्रिया इस पावन पर्व पर कुछ लिखने के लिए,

    div81 के द्वारा
    February 4, 2011

    वाहिद जी, माँ शारदा का ही आशीर्वाद है कि थोडा बहुत कुछ लिख पाती हूँ | जिस तरह से जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो व्यापारियों के लिए अपने बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है। चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं। बस छोटी सी कोशिश कि है ऊनको नमन करने कि उन का आशीर्वाद सब पर यूँ ही बना रहे

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 5, 2011

    दिव्या जी, सत्य कहा आपने| कुछ ऐसे ही विचार मेरे भी हैं| बिना माँ के आशीर्वाद के कला और कृति किसी का भी सृजन संभव ही नहीं|ये तो उन्हीं की सदाशयता है जो थोड़ा बहुत हम लिख पाते हैं|आपने लिखा कि आप प्रतियोगिता में भाग नहीं ले रही हैं जानकर दुःख हुआ|आप इतनी प्रतिभासंपन्न रचनाकार हैं, इतनी अच्छी कविताएँ लिखती हैं, हृदय को छू जाने वाले लेख लिखती हैं फिर भी? यह आपका व्यक्तिगत निर्णय है, कारण भी आप ही जानती होंगी पर निवेदन है आपसे कि आप भी हिस्सा लें ताकि हमें आपसे कुछ और खूबसूरत रचनाएँ मिल सकें| विनम्र आग्रह समेत,

    div81 के द्वारा
    February 5, 2011

    वाहिद जी, राजकमल जी को जो जवाब दिया वो ही आप को भी दे रही हूँ | प्यार और प्रतियोगिता कुछ अटपटा सा लगता है | सोचा है इस का हिस्सा नहीं बनूँगी | मगर कुछ लिखा है उसे आप सब के सामने बिना प्रतियोगिता में हिस्सा बने रखूंगी | उम्मीद है पसंद आये |

allrounder के द्वारा
February 4, 2011

दिव्या जी, नमस्कार सबसे पहले तो आपको धन्यबाद इस बात के लिए की आपकी पोस्ट खोलते ही सबसे पहले माँ सरस्वती के दर्शन हुए, उसके बाद आप के लेख मैं इतनी अच्छी बातें लिखी गई हैं जो हमें अतीत मैं ले जाती हैं, और अतीत की यादें सदा ही सुखद होती हैं, कुल मिलकर एक शानदार लेख पर हार्दिक बधाई !

    div81 के द्वारा
    February 4, 2011

    सचिन जी, माँ सरस्वती का आशीर्वाद यूँ ही हम सभी पर बना रहे | सच कहा आप ने आतीत की खट्टी मिट्ठी यादे हमेशा सुखद होती है | और मुझे ख़ुशी है की आप इस लेख के जरिये अतीत के झरोखों में झांक आये | आप का शुक्रिया

vinita shukla के द्वारा
February 4, 2011

ज्ञान के पर्व का बहुत सुन्दर और जीवंत चित्रण किया आपने दिव्या जी . अच्छी पोस्ट के लिए बधाई.

    div81 के द्वारा
    February 4, 2011

    विनीता जी, आप का तहे दिल से शुक्रिया

Preeti Mishra के द्वारा
February 4, 2011

दिव्याजी आपने बचपन की याद दिला दी. बसंतपंचमी के दिन हम पीले वस्त्र तो पहनते ही थे. साथ ही साथ हम अपने स्कूल के रंगारंग कार्यक्रमों में भाग लेते थे.अच्छी रचना. बधाई.

    div81 के द्वारा
    February 4, 2011

    मुझे ख़ुशी है प्रीती जी की मेरा ये लेख आप को एक ख़ूबसूरत यादो के झरोखों में ले गया . आप का शुक्रिया

rajkamal के द्वारा
February 3, 2011

दिव्या बहन …नमस्कार ! आपको भी बसंत पंचमी की बहुत -२ मंगलकामनाए ….. क्या आप इस प्रतियोगिता में हिस्सा नही ले रही ? वैसे आप के पास किसी भी मौके के लिए रचनायो की कमी नही होगी ,ऐसा मेरा मानना है … और अपनी खुद की मर्ज़ी तो सर्वोपरि होती ही है ….

    div81 के द्वारा
    February 4, 2011

    नमस्कार राजकमल भाई . शुक्रिया आप का,…. माँ सरस्वती का आशीर्वाद आप par बना रहे आप को भी बसंत पंचमी की ढेर सारी बधाई… प्यार और प्रतियोगिता कुछ अटपटा सा लगता है | सोचा है इस का हिस्सा नहीं बनूँगी | मगर कुछ लिखा है उसे आप सब के सामने बिना प्रतियोगिता में हिस्सा बने रखूंगी | उम्मीद है आप बिना पूर्वाग्रह के प्रतिक्रिया जरुर देंगे |

Amit Dehati के द्वारा
February 3, 2011

आपने सही फरमाया| बहुत ही सुन्दर kavita आपने प्रस्तुत किया …. वाकई काबिले तारीफ ..!. बहुत अच्छे शब्दों से लिख कर उत्क्रिस्ट किया … aapko bhi hardik शुभकामना http://amitdehati.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    February 4, 2011

    अमित जी, आप का शुक्रिया एक बार फिर से बसंत पंचमी की आपको भी ढेर सारी बधाई…

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 3, 2011

दिव्य जी आपको भी बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें….. अच्छे लेख की प्रस्तुति….. आप बहुत दिनों बाद दिखीं इस मंच पर आशा करता हूँ सब कुछ ठीक ही होगा…. आपका स्वागत है….

    div81 के द्वारा
    February 4, 2011

    आदरणीय हिमांशु जी, जी बिल्कुल बहुत दिनों बाद इस मंच पर आई हूँ | तबियत ठीक नहीं है | बस थोडा सा समय निकाल कर ये लेख पोस्ट कर पाई हूँ | आप का बहुत बहुत शुक्रिया

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 3, 2011

div जी, बसंत पंचमी की आपको भी ढेर सारी बधाई… आकाश तिवारी

    div81 के द्वारा
    February 4, 2011

    माँ सरस्वती का आशीर्वाद आप बना रहे आप को भी बसंत पंचमी की आपको भी ढेर सारी बधाई…


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