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आज कल के प्रेमियों को

Posted On: 14 Feb, 2011 Others,मेट्रो लाइफ में

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आज कल के प्रेमियों को
सस्ते  के भाव बिकते हुए देखा

कालेज  के चौराहों पर दिल को
प्रसाद कि तरह बांटते हुए देखा

आज बाहें डाले किसी के साथ तो
कल उसी को किसी और के साथ देखा

मोहब्बत को भी अमीरी गरीबी की
रेखाओं के बीच बंटते हुए देखा

आज कल के प्रेमियों को ………….
सस्ते के भाव बिकते हुए देखा

इश्क में भी अब नयी तरकीबे बनते हुए देखा
डेटिंग पर प्यार कि सेटिंग करते हुए देखा

नौजवानों में एक नया फंडा  देखा
जिसकी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं

उसे १४ फेब का इंतजार करते हुए देखा
मोहब्बत  को भी बेबस होते देखा

हसीनों को गिफ्ट के लालच में फंसते हुए देखा
आज कल के प्रेमियों को

बेमोल के भाव बिकते हुए देखा
उस पर भी ये इश्क आशां नहीं कि तर्ज में

हर ऐरे गैर को प्रेम दिवस में (वेलेंटाइन डे)
यह रोग लगते हुए देखा

आसमां छूते दाम और प्यार के नाम पर
सजी दूकानों पर तोड़ फोड़ मचाते हुए देखा

गली मौहल्लो और चौक से बाहर
प्यार को इन्टरनेट पर होते हुए देखा

प्यार का इजहार भी नेट पर ही
इकरार भी नेट पर होते हुए देखा

शादियाँ भी आन लाइन  हैं
बच्चे भी हो जाएँ ऑन लाइन

तो कोई हैरत नही
जमाना है आधुनिक अब

यह आठवाँ अजूबा भी होते हुए देखा

आज कल के प्रेमियों को

सस्ते  के भाव बिकते हुए देखा

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40 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jai... के द्वारा
April 24, 2011

वाह  ……

संदीप कौशिक के द्वारा
April 23, 2011

दिव्या जी, बहुत खूब | आजकल के \"कथित\" प्यार पर व्यंग्य करती आपकी इस रचना को हक़ीक़त के बहुत करीब पाया | इतने सुंदर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए आप निश्चित ही बधाई की पात्र हैं | कृप्या इसे स्वीकार करें || :)

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
February 20, 2011

लाज़वाब कविता ….. आपने प्रेम के बदलते स्वरुप को बखूबी दर्शाया है | बधाई

    div81 के द्वारा
    February 24, 2011

    शैलेश जी, ………………………….प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया

February 16, 2011

दिव्या जी, आजकल के प्रेमियों की सच्ची तस्वीर आपने अपनी रचना में उकेरी हॆ.आधुनिक प्रेम की सच्चाई को ब्यान करती सुंदर रचना के लिए बंधाई!

    div81 के द्वारा
    February 20, 2011

    आदरणीय पराशर जी, कविता को पसंद करने और प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया

anil9gupta के द्वारा
February 16, 2011

वाह दिव्या जी वाह क्या व्यंग है आपका आज के आधुनिक और वन डे मैच में तब्दील होते जा रहे प्रेम पर, आपने जो त्याग किया है में उसके लिए आपको नमन करता हूँ, अगर आप कांटेस्ट में भाग ले लेती तो आपका जीतना ते था, बहुत अची और सुंदर रचना.

    div81 के द्वारा
    February 20, 2011

    अनिल जी, वन डे से भी फास्ट २०-२० होता जा रहा है आज कल के प्रेमियों का हाल | त्याग जैसी कोई बात नहीं अनिल जी ये मंच तो एक परिवार की तरह ही है अब जीत जिसकी भी होगी ख़ुशी सबको होगी आप की प्रतिक्रिया से ही प्रतियोगिता जीतने जैसी ख़ुशी मिल गयी | आप का बहुत बहुत शुक्रिया

chaatak के द्वारा
February 15, 2011

वाह दिव्या जी, इस रचना से उत्कृष्ट तो कुछ भी नहीं हो सकता| इश्क का भाव कितना बेभाव हो गया है इसका आईना आपकी इस छोटी सी रचना ने बखूबी दिखा दिया| 5/5 बधाई !

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    चातक जी, जिस तरह से एक बच्चे को कोई गुब्बारा पकड़ा दे और उसे बहुत सी ख़ुशी मिल जाती है मेरे लिए ये प्रतिक्रिया वैसी ही है आप जैसे बुद्धिजीवी वर्ग से ऐसी प्रतिक्रिया मिलना सचमे बहुत बड़ी बात है उस पर 5 /5 ……………………. :) आप का शुक्रिया

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    मुनीश जी, प्रेमियों ने व्यापारिक प्रदर्शन से अपने भाव गिराए है या व्यापारिक प्रदर्शन ने खैर कुछ भी हो प्यार का असली स्वरूप खो गया है | आप का शुक्रिया

Alka Gupta के द्वारा
February 15, 2011

दिव जी , आधुनिक प्रेम के स्वरूप को बहुत सुन्दर तरह से बताया है आपने !

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय अलका जी, कविता को पसंद करने और प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया

abodhbaalak के द्वारा
February 15, 2011

Div JI kash aapne is rachna ko valentine day kantest ke liye ….. par chaliye, mujhe किसी का तो साथ मिला, यानि jisne meri tarah is kantest me bhag lena …. rahi is post ki baat, तो mai pahle hi kah chuka hoon, kash aapne ise is constest ke liye post kia hota,… aajkal ke prem aur premiyon par likhi ek bahut hi….. aapki har rachna apne aap me ek alag chhap liye hoti hai. aise hi likhti rahen http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    अबोध जी, आप ने भी तो कांटेस्ट हिस्सा नहीं लिया हम भी आप का साथ दे रहे थे | आप सब का साथ चाहिए यूँ ही हौसला बढ़ाते रहिये कोशिश यूँ ही जरी रहेगी |हौसला बढाने के लिए आप का शुक्रिया

    syeds के द्वारा
    February 15, 2011

    अबोध जी,हम भी आप लोगों के ही ग्रुप में हैं इस मामले में contest हिस्सा नहीं लिया… http://syeds.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    syeds जी, jj मंच एक परिवार कि तरह ही है बस ऐसा कुछ हुआ कि परिवार के कुछ सदस्य ने हिस्सा नहीं लिया मगर सपोर्ट तो सब को ही किया है अब कोई भी जीते ख़ुशी सभी को होगी |

    Syeds के द्वारा
    February 19, 2011

    जी बिलकुल दिव्या जी,हम आपकी बात से सहमत हैं…और सभी प्रतिभागियों को हमारी शुभकामनायें… :)

ashvinikumar के द्वारा
February 15, 2011

प्रेम शब्द नही प्रतीक नही भाव है जिसे सिद्दत से वही महसूस जिसके दिल में यह हो ,लेकिन यह भाव भिन्न भिन्न लोगों को विभिन्न तरह से महसूस होता है ,,यहाँ भी तू है वहां भी तू है,, मुझमे तू है तुझमे मे हूँ,, कौन सी ऐसी जगह जहां में, जहाँ पे तेरी नजर नही है,, तूं मेरी हर धडकन में है, साँसों में है जाप तेरा, माला के मनकों जैसा ही,, गिर्द प्रेम के घूम रहा,, ……………………जय भारत

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    प्यार सिर्फ एहसास है जिसे सिर्फ रूह से महसूस किया जा सकता है |प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
February 15, 2011

वर्तमान में तथकथित प्रेम,प्रेमी-प्रेमिका का सही चित्रण किया है आपने,दिव्या.

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय निशा जी,हम कहने को तो आधुनिक हो गए है मगर अपने मूल्य अपने आदर्श को भूलते जा रहे है | उसी का परिणाम है यह सब ……….आप का शुक्रिया

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 15, 2011

div जी, आपसे इससे कम की उम्मीद नहीं थी…मार्वलस रचना…..इकदम सटीक . आकाश तिवारी

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    अरे आकाश जी, थोडा बहुत लिख लेती हूँ | आप सभी कि हौसलाअफजाई है जो आगे लिखने कि प्रेरणा मिलती है | आप को मेरी रचना पसंद आई इसका तहे दिल से शुक्रिया

Deepak Sahu के द्वारा
February 15, 2011

दिव्या जी! आधुनिक प्रेमियों पर अच्छे व्यंग छोड़े है आपने ! बधाई!

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    दीपक जी , ……………..आप का शुक्रिया

Syeds के द्वारा
February 14, 2011

खूबसूरत कविता,हमेशा की तरह…वास्तव में आजकल प्रेम करने वालों(सच यह है की वह प्रेम को नहीं समझते) का स्तर बहुत गिर गया है…बड़ी खूबसूरती से आज कल के हालात को बयान किया आपने… रेटिंग वही पुरानी ही है…. :) ५/५

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    syeds जी, सच कहा आप ने की आजकल प्रेम करने वाले प्रेम को नहीं समझते | दिखावा और बनावट ही है | आप का शुक्रिया और हाँ आप की रेटिंग से हौसला बढ़ता है कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है :)

आर.एन. शाही के द्वारा
February 14, 2011

ज़माना बदल गया तो प्यार भी बदल गया । वैलेंटाइन दिवस के बावज़ूद यह रचना कांटेस्ट में नहीं है, शायद कुछ त्रुटि हुई है । बधाई ।

    rajkamal के द्वारा
    February 14, 2011

    आदरणीय शाही जी ….सादर अभिवादन ! दिव्या बहन ने मेरे कहने पर भी इस कांटेस्ट में भाग न लेने के अपने फैसले को नही बदला था ….. और हाँ हिमालिअई भूल तो आपसे हुई है , किरपा करके उसको सुधार ले ..

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    जमाना तो वो ही है मगर लगता है प्यार का अंदाज बदल गया है | आदरणीय शाही जी त्रुटी नहीं है कांटेस्ट में हिस्सा नहीं लिया है बिना हिस्सा लिए भी तो अपने विचार रखे जा सकते है | शुक्रिया

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    राजकमल भाई ,……….सादर प्रणाम ऐसा कुछ नहीं है बिना कांटेस्ट में भाग लिए उसका हिस्सा बनी हूँ | आपने मेरी इस कविता के लिए अपनी कुछ राय नहीं दी |

nikhil के द्वारा
February 14, 2011

दिव्या जी .. ये कविता बहुत अच्छी लगी.. आपने इसके नकारात्मक व्यवहार पर बहुत सटीक पंक्तिया लिखी है..

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    निखिल जी, …आज के दौर में प्यार को या कहे प्यार में दिखावे को जिस तरह से जरुरी समझा जाता है ये बहुत ही हैरान करने वाली बात है | आप को कविता पसंद आई लिखना सार्थक हो गया हौसलाफजाई के लिए शुक्रिया

rajeev dubey के द्वारा
February 14, 2011

आज बहुत दिनों बाद आपको सक्रिय देखा…दिव्या जी, आपकी व्यंग्य रचना का रंग कुछ अलग सा है माहौल से, आपकी बात व्यक्त करती रचना पर बधाई

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    राजीव दुबे जी, इस कविता को बहुत पहले सोचा था १४ फरवरी को पोस्ट करुँगी इस लिए आप सब के सामने प्रस्तुत करी | आप का शुक्रिया

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 14, 2011

आज कल के प्रेमियों को सस्ते के भाव बिकते हुए देखा क्या खूब कही आपने दिव्या जी| यही तो आज की सच्चाई है| ये तथाकथित प्रेमी (मनचले या शोहदे जो भी कहें) जिन्हें प्रेम का वास्तविक अर्थ भी नहीं मालूम हाथ पर दिल लिए घूम रहे हैं कुछ उसी तरह जैसे – तू नहीं और सही, और नहीं और सही, सितारों के आगे जहाँ और भी हैं.| आपकी जीवटता की दाद देता हूँ| आभार,

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2011

    और हाँ आपने अपना वादा बखूबी निभाया है|

    div81 के द्वारा
    February 15, 2011

    वाहिद जी, ये कविता मैंने कालेज टाइम में लिखी थी | फर्स्ट इयर में ही जो वहां का माहोल देखा वो ही लिखा | कालेज में चेहरे बदल गए है मगर अदाकारी वो ही है | आप को कविता पसंद आई उसका शुक्रिया


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