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हाय री नारी तेरी

Posted On: 7 Mar, 2011 Others,लोकल टिकेट में

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D7


हाय री नारी तेरी
किस्मत में बस रोना आया
जो न समझ सके तुझ को
उसने ही अबला कह डाला

abc

खड़े मंच पर करते
तेरी महिमा का गुणगान है
घर पर होती इनके ही हाथो
तू प्रताड़ना का शिकार है
शोभा बस तो घर भर कि है
नहीं करते तुझ पर ये कोई परोपकार
नारी सशक्तिकरण का नारा दे
ये नव राष्ट्र निर्माण करेंगे
अपने ही हाथो फिर
तुझको फिर से  छलेंगे
बाजारवादी सोच है इनकी
बाजार में लाकर तेरी ही
बोली लगा दी जायेगी
आजाद ख्याल का कहकर
लिव एंड relationship तक
तू खडी कर दी जायेगी
फिर एक दिन बाजारू कहकर
तुझ को तजा फिर जायेगा
क्यूँ छली जाती हो
दिखावे कि आजादी में
सीमा- रेखा लाँघ जाती हो
आवेश भावावेश कि अंधी में
रावन का है ये युग
फिर न कोई राम आएगा
परीक्षा हुई थी तब भी तेरी
फिर सवालो के कटघरे में
तुझको खड़ा किया जायेगा
खो कर अपना नारी स्वरूप
धर रही क्यूँ मर्द रूप
यहाँ भी तेरा शोषण होगा
तुझको न तेरा अधिकार मिलेगा
जिस सम्मान के लिए तरसी हो
उसको ऐसे न पाओगी
अपने नारी रूप में ही
आकश कि बुलंदी को
छू पाओगी
शक्ति रूपेण हो तुम
शक्ति रूप में कब आओगी
तुम को आजादी का नहीं
सम्मान का अधिकार चाहिए
नारी कि छदम काया नहीं
सशक्त रूप और स्वाभिमान चाहिए
अवसरवादी लोगो का असर
बिन सोचे समझे ले रही हो
अपने ही हाथो अपना
चीरहरण कर रही हो
दिखावे कि जिंदगी में
खुद को ही क्यूँ छल रही हो

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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rddixit के द्वारा
March 23, 2011

Dear Divyaji Fantastic and revolutionary ideas. A living poem. Congratulations and good wishes.

Syeds के द्वारा
March 19, 2011

महिला दिवस पर एक अच्छी रचना…बहुत अफ़सोस की बात है…आजादी के पचास वर्षों बाद भी महिलाओं की हालत बहुत ज्यादा नहीं सुधरी है… ५/५ http://syeds.jagranjunction.com

abodhbaalak के द्वारा
March 14, 2011

महिला दिवस पर महिलायों को समर्पित एक अति सुन्दर रचना …. एक अलग स्तर पर आप ने इस …. वैसे मेरा नाम अबोध है याद तो होगा न अभी ? :)

    div81 के द्वारा
    March 15, 2011

    अबोध जी, मंच से कहाँ गायब है आप ??…… हमको ये लग रहा है आप ने सी सब को भुला दिया है ….. ऐसा कैसे हो सकता है की अबोध बालक को भुला जाये :) हमेशा की तरह उत्त्साह बढ़ाने के लिए आप का शुक्रिया

allrounder के द्वारा
March 9, 2011

दिव्या जी नमस्कार आपके नए लेख पर कमेन्ट नहीं हो पा रहा इसलिए यहाँ देना पड़ रहा है ! लगता है इस महिला दिवस पर आपने शोषित नारियों को जागृत करने और समाज मैं उनका शोषण करने वाले पुरुषों को झिंझोड़ने का बीड़ा उठा लिया है, जिसके लिए आप बधाई की पात्र है ! एक अच्छे सामाजिक और सशक्त लेख पर हार्दिक बधाई !

    div81 के द्वारा
    March 15, 2011

    सचिन जी, सादर नमस्कार, कोशिश तो सभी तरफ से हो रही है देखिये कब तक परिवर्तन आता है दोनों की ही सोच में ……. हौसला बढाती प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

NIKHIL PANDEY के द्वारा
March 8, 2011

चित्रों ने तो कविता की संवेदना के भाव को और सजीव बना दिया है ,,,

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    निखिल जी,प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया

दीपक पाण्डेय के द्वारा
March 8, 2011

दिव्या जी, बहुत ही सुन्दर एव अर्थपूर्ण कविता है ये.

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    दीपक जी, प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 8, 2011

div जी, नारी पर आपकी ये रचना…बहुत ही सर्वश्रेष्ठ है…………… आकाश तिवारी

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    3सचिन जी, हमेश के तरह हौसला बढ़ने और प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया गलती से आकाश ji aap ki प्रतिक्रिया niche सचिन जी को दे दी gahai hai mafi chahungi

allrounder के द्वारा
March 8, 2011

दिव्या जी, नमस्कार लगातार दूसरी बार नारी की सामाजिक दशा पर प्रहार करती बेहतरीन रचना पर आभार !

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    आकाश जी, हमेश के तरह हौसला बढ़ने or प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया

surendrashuklabhramr के द्वारा
March 8, 2011

खो कर अपना नारी स्वरूप धर रही क्यूँ मर्द रूप यहाँ भी तेरा शोषण होगा दिव ८१ या दिव्या जी बहुत सुन्दर सार्थक रचना – तमाम सामाजिक परिदृश्य को लपेटे -साथ साथ आप का चित्र जो भेद खोल रहा उसके साथ होते जुर्म का पीड़ा का घर की कलह का -नारी का मर्द रूप रखना कहीं कहीं तो पुरुष से कन्धा मिला दौड़ में शामिल होने के लिए जायज है -अपवाद ही सही -फिर भी नारी को नारी रहना श्रेयस्कर है -हम अपना मूल क्यों खोएं जो इश्वर ने हमें दिया बधाई हो लिखते रहिये .. शुक्लाभ्रमर५

March 8, 2011

संवेदनात्मक।

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    आदरणीय अंशुमाली जी, आप का शुक्रिया

kaushalvijai के द्वारा
March 8, 2011

shandar,jandar kavita aur sath me sarthk pics bhi. bahut bahut badhaee. see also kaushalvijai.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    कौशल जी हार्दिक धन्यवाद एक प्रयाश को समर्थन देने के लिए आभार

Deepak Sahu के द्वारा
March 8, 2011

दिव्या जी! सुंदर रचना आपकी ! बधाई! दीपक साहू

shailandra singh के द्वारा
March 8, 2011

दिव्या जी सादर अभिबादन सुन्दर कविता के लिए मुबारकबाद, मेरी एक सोच है कि नारी ही नारी की दुश्मन है क्यों की जिस तरह से भी देखिये सहभागी रहती है चाहे दहेज़ का मसला हो या अतिविस्वास का खुद भी इन में शामिल दिखती है चाहे मजबूरी बस या द्वेष बस पता नहीं में सच हूँ या गलत धारणा लिए पर स्वम से जियादा ख़तरा है ना कि बाहर से फिर भी सार्थक रचना के लिए बधाई.

Ramesh bajpai के द्वारा
March 8, 2011

दिव्या जी यह प्रखरता कल के सशक्त रूप और स्वाभिमान की बुनियाद बन गयी है |बधाई

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    वाजपेयी जी,, मेरा प्रयाश रंच मात्र भी सार्थक हो जाए तो मे अपने आपको धन्य समझूंगी

March 8, 2011

दिव्या जी महिला दिवस पर महिलाओं की जागरूकता का आह्वान करती सुन्दर कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    राजेन्द्र जी ,,मेरा प्रयाश आपको पसंद आया धन्यवाद

vinita shukla के द्वारा
March 8, 2011

नारी को उसकी भावुकता से उबारकर, व्यावहारिकता सिखलाने वाली सार्थक कविता.

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    विनीता जी एक पहल करने का प्रयाश किया था सार्थक पहल आपको पसंद आया,, ह्रदय से धन्यवाद

Harish Bhatt के द्वारा
March 8, 2011

दिव्या जी नमस्ते, बहुत ही बेहतरीन दिल को छू जाने वाली कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    हरीश जी आपका हार्दिक धन्यवाद ,,

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 7, 2011

दिव्या बहन ….नमस्कार खड़े मंच पर करते तेरी महिमा का गुणगान है घर पर होती इनके ही हाथो तू प्रताड़ना का शिकार है यह आज कि एक अटल सच्चाई है ….. अपने ही हाथो फिर तुझको ‘को’ छलेंगे इस लाइन को एडिट द्वारा सही कर ले आदरणीय शाही जी ने सही कहा है कि वर्तमान समय के मुताबिक एक दिल को छू लेने वाली कविता पर बहुत -२ मुबारकबाद

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    राजकमल भाई,, हौसला आफजाई के लिये सुक्रिया

आर.एन. शाही के द्वारा
March 7, 2011

संवेदनाओं से भरी समसामयिक कृति दिव्या जी । बधाई ।

    div81 के द्वारा
    March 9, 2011

    आदरणीय शाही जी, नमस्कार …………. आप का तहे दिल से शुक्रिया |


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