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मैं चुप रहूंगी

Posted On: 23 Apr, 2011 Others में

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मैं चुप रहूंगी
कह दूंगी तो हंगामा खड़ा करना इनका मकसद है
फिर से नया हंगामा खड़ा हो जायेगा
मैं चुप रहूंगी
कह दूंगी तो पल पल मरी हूँ हर बार  मैं
इक बार फिर से मेरी मौत का प्रबंध हो जायेगा
मैं चुप रहूंगी
कह दूंगी तो किया है तार तार मुझे कई बार फिर से
विनाश का मंजर नजर आ जायेगा
मैं चुप रहूंगी
कह दूंगी तो जिन आँखों में खून है
पानी कहाँ से उतर पायेगा
मैं चुप रहूंगी
क्यूंकि सच सुनने की अब आदत नहीं
सच किसी को पसंद कहाँ फिर  आएगा
मैं चुप रहूंगी
क्यूंकि इनके झूट के आगे सच कहाँ टिक पाया है
सच सुनने का हौसला सब में कहाँ से आएगा
मैं चुप रहूंगी
क्यूंकि  आज तक सच जीता ही नहीं है इनके आगे
फिर आज लाखो झूट से कैसे जीत पायेगा
मैं चुप रहूंगी
क्यूंकि
मैं चुप रहूंगी

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25 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

gagan parcha के द्वारा
July 7, 2012

दिव्या जी आपकी कविता का शीर्षक बहुत अच्छा है चुप रह कर बी बहुत कुछ बोल रहा है एक एक शब्द

allrounder के द्वारा
April 25, 2011

दिव्या जी, नमस्कार चुप्पी भले ही आपने नहीं तोड़ी किन्तु इसी चुप्पी के लिए मंच पर लिखने के लिए आपका आभार !

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    सचिन जी, नमस्कार आप का बहुत बहुत शुक्रिया इस चुप्पी पर आप की प्रतिक्रिया देख कर अत्यंत प्रसन्नता हुई :) एक बार फिर से आप का शुक्रिया

Alka Gupta के द्वारा
April 24, 2011

दिव्या जी , चुप रहकर भी भाव अपने सुन्दर रूप में बहुत कुछ कह गए श्रेष्ठ कृति !

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    आदरणीय अलका जी, नमस्कार……………आप का तहे दिल से शुक्रिया हौसला बढ़ाने के लिए भी और रचना की सराहना के लिए भी

syeds के द्वारा
April 24, 2011

क्यूँ चुप रहेंगी? आपकी कविता का शीर्षक देखकर जो पहली बात ज़हन में आई वह लिख दी…:) बेहद खूबसूरत कविता वेलकम बैक… ५/५ http://syeds.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    कई बार चीखते झूठ के आगे चुप भी होना ही बेहतर रहता है ये चुप्पी वहीँ के लिए है | बाकी तो आप सभी हौसला बढ़ाते रहिये हम कहने का हौसला करते रहेंगे | हमेशा की तरह इस हौसला अफजाई के लिए आप का शुक्रिया :)

vinita shukla के द्वारा
April 24, 2011

भावनाओं का सुन्दर इज़हार करती मार्मिक कविता. बधाई.

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    विनीता जी, ………………….आप का बहुत बहुत शुक्रिया

chaatak के द्वारा
April 24, 2011

दिव्या जी, आपकी ये एक चुप्पी लाखों बातों से ज्यादा असरकारक है. ये मौन की भाषा भी अजब-गजब है. आपके लिए सिर्फ इतना कहूँगा- सन्नाटा चिल्लाता है, खामोशी सुन कुछ कहती है, जिन्दा सारे दर्शक है और लाशें लडती रहती हैं; अच्छी रचना पर बधाई!

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    मुह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन आवाजो के बाजारों में ख़ामोशी पहचाने कौन चातक जी आप की प्रतिक्रिया का हमेशा से ही इंतजार रहता है | आप की दो लाइन के बाद कहने के लिए कुछ नहीं बचता | आप का तहे दिल से शुक्रिया

वाहिद काशीवासी के द्वारा
April 24, 2011

दिव्या जी, आपकी यह कविता अंतर्द्वंद का सुन्दर उदाहरण है| “चुप” रहना कतई बुरा नहीं है क्यूंकि कभी-कभी मौन के माध्यम से भी हमें अनेक गूढ़ रहस्यों से साक्षात्कार करने का सुअवसर प्राप्त होता है| एक दिन यह मौन ही असत्य से लड़ने और उसे हराने का संबल प्रदान करेगा| कहा भी गया है कि दबी हुई चिंगारी को जितना दबा कर रखा जाए वह भविष्य में उतने ही बड़े विस्फोट का सबब बन जाती है| आपकी कविताओं में भावनाएँ अपने प्रबल रूप में उभर कर सामने आती हैं पर कुछ पंक्तियों में दोहराव सा भी महसूस होता है| इस कमी को दूर करने का प्रयास करें, आपकी कविता एक अधिक उत्कृष्ट रूप में सामने आएगी, जिसका आस्वादन और भी सुखदायी होगा| लंबे समय के पश्चात मंच पर आपकी वापसी सुखद रही और हमें एक अच्छी रचना पढ़ने को मिली| साभार,

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    वाहिद जी, मुझे बहुत ख़ुशी हुई वाहिद जी आपने मेरी लेखनी में जो कमी है उसकी तरफ ध्यान आकर्षित किया | गलती को जाने बिना कोई भी अपनी कमी दूर नहीं कर सकता | इस भूल को सुधारने का प्रयास करुँगी और आशा करती हूँ की अगली रचना का आस्वादन सुखदायी रहे | इस पोस्ट में ये पहली प्रतिक्रिया है जो मुझे बहुत अच्छी लगी क्यूंकि प्रशंसा ही नहीं स्वस्थ आलोचना भी होनी चाहिए जिससे की बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है | आप का तहे दिल से शुक्रिया :)

abodhbaalak के द्वारा
April 24, 2011

दिव्जी काफी समय के बाद आपकी कोई रचना पढने को मिली, बहुत अच्छा लगा. आपने चुप रह कर भी जो कुछ कह दिया……………………. बहुत सुन्दर …., http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    अबोध जी, आप सब का स्नेह ही है जो एक बार फिर से मंच की और ले आया | आप की प्रतिक्रिया देख कर हमको भी बहुत अच्छा लगा ………………..आप का शुक्रिया

Nikhil के द्वारा
April 24, 2011

बहुत ही गहरी समझ लिए हुए एक अच्छी रचना. बधाई.

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    निखिल जी इस सराहना के लिए आप का बहुत बहुत शुक्रिया!

Ramesh Bajpai के द्वारा
April 24, 2011

कह दूंगी तो हंगामा खड़ा करना इनका मकसद है फिर से नया हंगामा खड़ा हो जायेगा मैं चुप रहूंगी दिब्या जी चुप्पी का ये सैलाब सब कुछ कह गया | नियति की काल कोठरी में कैद सत्य का सूर्य मौन की मुखरता के लिए व्याकुल है | सुन्दर प्रवाह | अच्छी प्रस्तुति | बधाई | ५/५

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    आदरणीय बाजपाई सर, सदर प्रणाम……………..आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है आपके शब्दों से बड़ा आत्मबल मिला| आप का तहे दिल से शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
April 23, 2011

दिव्या जागरण मंच पर बहुत दिन बाद तुम्हारी भावपूर्ण रचना पढने को मिली.”सच सुनने की अब आदत….बहुत सुन्दर.

    ipdc के द्वारा
    April 23, 2011

    sach mei mai chup rahungi– padha to kuch der ke liye mai to kho hi gaya, samjh gaya hun jo kehna chaha hai in panktiyo mei apne.. asha karta hun ki aap yunhi likhte rahoge.. maine to ek choti si website bana rakhi hai. http://www.music-fun-earn.com Agar ap izazat do to mai apki in pankiyon ko apni site par publish karna chahunga, taki vo yuva log bhi apki in panktiyon ko padh sake jo har bat ko majak mei lete hain. I will surely add some lines for you.— Amitjain

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 23, 2011

    दिव्या बहन …. नमस्कार ! आदरणीय निशा जी ….सादर अभिवादन ! आप ठीक कह रही है , इस मंच पर यदा कदा बीच -२ में अपनी हाजरी लगवानी ही चाहिए इनको …. और इस कलयुग में बेचारा झूठ अकेला दो कदम भी कहाँ चल पायेगा ….. अधूरे झूठ का सहारा लेकर , उसके कंधो पर सवार होकर ही तो बेचारा कहीं चल पायेगा …. इस बेधती हुई रचना पर बहुत -२ मुबारकबाद

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    आदरणीय निशा जी, नमस्कार कुछ मजबूरियां ऐसी हो गयी थी कि मंच से दूरी बनानी पड़ी, मगर आप के कहे को भी अनदेखा नहीं कर सकती थी | बिलकुल सही कहा आप ने कि सच सुनने कि अब आदत रही नहीं इस लिए सच को कई बार मौन हो जाना पड़ता है ………. आप का शुक्रिया

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    राजकमल भाई …….नमस्कार ! आप ने कह दिया आगे से ख्याल रखा जायेगा जागरण मंच में उपस्थिति दर्ज होती रहेगी | सच को कभी झूठे सहारो की आवश्यकता नहीं होती एक सच सौ झूठ का सामना कर सकता है कई बार चुप रहना श्रेयस्कर होता है मगर कलयुगी समाज का यही सच है | आप का बहुत बहुत शुक्रिया

    div81 के द्वारा
    April 25, 2011

    अमित जैन जी सादर अभिवादन ये मेरा खुद का अनुभव है जब कहीं कोई सच सुनने और मानने को कोई तैयार नहीं होता वहां मौन हो जाना ही उचित लगता है सराहना के लिए तहे दिल से आप की आभारी हूँ,


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