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कौन है वो??

Posted On: 15 May, 2011 Others में

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कौन है वो??
जो दूर रह कर भी क़रीब होता है;
जागता है मेरे ख़याल में जब ये दिल सोता है;
कौन है वो??
मुझे तकलीफ़ होती है तो वो भी रोता है;
हमारे मिलने के कई तसव्वुर संजोता है;
कौन है वो??
मेरे आंसू को अपने आंसुओं से धोता है;
मेरे बोझ को अपने काँधे पे ढोता है;
कौन है वो??
कुछ मैं भूल जाऊं तो उसका भी कुछ खोता है;
कहीं तन्हाई में गुमसुम हूँ, तब भी साथ होता है;
कौन है वो??
मेरे दर्द की दवा है वो;
जो साँस लूं वही हवा है वो;
साथी कहो, दोस्त कहो,
यार कहो, मीत कहो,
मेरी ख़ामोशी का शब्द है वो,
और मेरे बोलों का,
मौन है वो!!
मेरे बोलों का,
मौन है वो!!

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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

narayani के द्वारा
May 27, 2011

नस्कर दिव्या जी बहुत सुन्दर पंक्तिया है , मेरी ख़ामोशी का शब्द है वो , मेरे बोलो का मौन है वो अच्छीरचना है धन्यवाद नारायणी

    narayani के द्वारा
    May 27, 2011

    नमस्कार दिव्या जी, बहुत सुन्दर पंक्तिया है , …मेरी ख़ामोशी का शब्द है वो , मेरे बोलो का मौन है वो… अच्छी रचना है धन्यवाद नारायणी

Mala Srivastava के द्वारा
May 16, 2011

दिल को छूती हुई पंक्तिया ..

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    माला जी, मुझे ख़ुशी हुई की “कौन है वो” के भाव आप के दिल तक पहुंचे प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

वाहिद काशीवासी के द्वारा
May 16, 2011

दिव्या जी, आज आपका अंदाज़े बयां बदला-बदला सा नज़र आ रहा है| इस कविता में ये “कौन” कौन है ऐसा लगा कि आगे जाकर पता चल जायेगा मगर अंत में मौनरुपी यवनिका ने उसे भी ढक दिया| फिर भी मेरे विचार से ये “कौन” और “मौन” दोनों ही उस लेखनी के लिए प्रयुक्त हुए हैं जिससे इस कविता को रचा गया है| ‘मेरी ख़ामोशी का शब्द है वो, और मेरे बोलों का मौन है वो..’ ये पंक्ति सबसे ज़्यादा पसंद आई| अच्छी कविता के लिए शुक्रिया अदा करता हूँ|

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    वाहिद जी, अंदाजे बयां बदला नहीं है कभी कभी ख्वाबो – ख्यालो की दुनिया कहीं और ही ले जाती है बस उन्ही क्षणों में ये रचित हुई है | ये रचना मेरे दिल के करीब है :) | इतनी अच्छी प्रतिक्रिया के लिए मैं आप का शुक्रिया अदा करती हूँ |

Aakash Tiwaari के द्वारा
May 16, 2011

div जी, कुछ कविता,ग़ज़लें ऐसी होती है की एक एक पंक्ति पढो तो पूरा पढ़े बिना छोड़ने का मन नहीं करता….. आज आपकी ये रचना बहुत पसंद आई…. आकाश तिवारी

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    आकाश जी, आप स्वयं इतनी अच्छी कविता और ग़ज़ल कहते है | आपकी ये प्रतिक्रिया पढ़ कर ख़ुशी हुई कि आपको ये रचना इतनी पसंद आई|

priyasingh के द्वारा
May 16, 2011

हाले दिल बयान करती हुई सुन्दर रचना……………..

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    प्रिया जी, आप का तहे दिल से शुक्रिया……………..

shuklabhramar5 के द्वारा
May 16, 2011

दिव्या जी हमें बहुत ही भुलावे में रखा कयास ही लगाते रहे हम अंत तक तब ये पहेली सुलझी बहुत खूब -सुंदर रचना -मौन सच में हमारे बहुत ही काम आता है जीवन में इसको अपने पास हमेशा सजा रखना है – मेरी ख़ामोशी का शब्द है वो, और मेरे बोलों का, मौन है वो!! मेरे बोलों का, मौन है वो!! बधाई हो

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    शुक्लाभ्रमार जी, आप ठीक कह रहे हैं..मौन हमारे जीवन में बहुत काम आता है| ये मौन ही जब गहराई में जाता है तो ब्रह्मनाद कहलाता है| अंग्रेज़ी की एक प्रसिद्द कहावत भी है कि speech is great but silence is greater. आप का तहे दिल से शुक्रिया……………….

RAJ के द्वारा
May 16, 2011

बहुत  रबुब

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    राज जी, आप का शुक्रिया

Tufail A. Siddequi के द्वारा
May 16, 2011

दिव्या जी अभिवादन, अन्य रचनाओं की भांति एक और सुन्दर रचना. बधाई !! http://siddequi.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    तुफैलजी , नमस्कार हमेशा की तरह हौसला बढ़ने के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया………….

Nikhil के द्वारा
May 16, 2011

दिव्या जी, खूबसूरत रचना. बधाई.

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    निखिल जी, आप का बहुत बहुत शुक्रिया …..

R K KHURANA के द्वारा
May 16, 2011

प्रिय दिव्या जी, जो दूर रह कर भी क़रीब होता है; जागता है मेरे ख़याल में जब ये दिल सोता है; सदा की तरह एक अच्छी रचना राम कृष्ण खुराना

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    आदरणीय सर, नमस्कार हमेशा की तरह हौसला बढ़ने के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
May 16, 2011

दिव्या रचनाएँ तुम्हारी पठनीय व सराहनीय सदा ही होती हैं,ये रचना बहुत अच्छी लगी.ऐसे रिश्ते और अहसास दिव्य होते हैं.

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    आदरणीय निशा जी, नमस्कार ये तो आप का प्यार और बडप्पन है जो सदा ही हमारी हौसलाफजाई करती है आप, आपने इतना स्नेह दिया है तो उसका कुछ प्रभाव तो पड़ना ही था| सच में ऐसे रिश्ते और अहसास दिव्य होते हैं

Deepak Sahu के द्वारा
May 16, 2011

दिव्या जी नमस्कार! बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ प्रस्तुत की हैं अपने! बधाई स्वीकार करें! दीपक साहू

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    दीपक जी, नमस्कार हौसला बढ़ाने के लिए आप का बहुत बहुत शुक्रिया ……………….

syeds के द्वारा
May 16, 2011

दिव्या जी,हमेशा की तरह बहुत खूबसूरत रचना.हर लाइन दूसरे जैसी है… :) 6/5

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    syeds जी, नमस्कार हर बार की तरह हौसला बढाती प्रतिक्रिया आप की | हौसलाफजाई के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया :)

संदीप कौशिक के द्वारा
May 15, 2011

दिव्या जी, मन की कशमकश को बहुत सुंदर तरीके से अल्फ़ाजों में ढाला है आपने !! बधाई !! http://sandeepkaushik.jagranjunction.com/

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    संदीप जी, आपको ये रचना पसंद आई आपने इसे सराहा इसके लिए बहुत धन्यवाद आपका..

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 15, 2011

दिव्या बहन …..नमस्कार ! नियमित अंतराल पर आपको इस मंच पर देख कर बहुत ही खुशी हुई ….. यह सारी की सारी रचना आपस में कुछ इस तरह से गुंथी हुई है की किसी एक लाइन का चुनाव करना बहुत ही कठिन हो गया ….. अगर किसी एक को चुन लेता तो फिर बाकि की लाइनों के साथ नाइंसाफी होती ….. इस बेहतरीन रचना पर ढ़ेरो बधाईयां आभार सहित

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    राजकमल भाई………….. नमस्कार ! आप बड़े भाई हो मेरे आपके आग्रह को कैसे टाल सकती हूँ | ये रचना जिन भावों को लेकर लिखी गयी है वो खुद भी ऐसे ही आपस में गुंथे हुए हैं| आपसे तो हमेशा ही प्रोत्साहन मिलता है ………………आप का तहे दिल से शुकिया

Gajendra Pratap Singh के द्वारा
May 15, 2011

आपकी ये पंक्‍तियां दिल को छू लेने वाली है.

    div81 के द्वारा
    May 19, 2011

    सराहना के लिए शुक्रिया गजेन्द्र जी..


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