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शादी की चिंता

Posted On: 31 Oct, 2011 Others में

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कहते है कि एक लड़की के लिए सुयोग्य वर ढूंढना सबसे मुश्किल काम है | लड़की के सयानी होते ही माँ बाप चिंता में घुलने लग जाते है | योग्य वर ढूंढते ढूंढते जूते चप्पल घिस जाने कि कहावत चरितार्थ होने लगती है | रातों कि नींद कब उड़ जाती है पता ही नहीं चलता | ऐसे ही हालात मैंने अपने घर में देखे जब दीदी के लिए मम्मी पापा अक्सर चिंतित हो कर बात किया करते थे और वो बात कब बहस और बहस कब लड़ाई का रूप इख़्तियार करती थी पता ही नहीं चलता था | लड़ाई तक इसलिए क्यूँ कि पापा जी सिद्धांतवादी  हैं | नहीं चाहते कि दहेज़ दे कर बेटी के लिए दूल्हा ख़रीदा जाये मगर माँ का दिल तो माँ का ही होता है | बस वो जल्दी -से- से जल्दी प्यारी बेटी को उसके घर का कर देना चाहती थी | और ये सब बाते कब बहस और बहस से लड़ाई में तब्दील हो जाती थी पता ही नहीं चलता था
हम बस इंतजार करते थे कि जब हमको इस बहस में एन्ट्री लेनी है
मगर पापा के सिद्धांत भी अपनी जगह ठीक है और माँ कि चिंता करना भी|
चलिए दीदी को तो योग्य वर मिल गया | माँ पापा की चिंता ख़ुशी में बदल गयी | इसी ख़ुशी के मौके पर कई परिचितों ने नयी चिंता उन को दे डाली कि ………………………………भाई साहब बेटी तो उसके घर की कर रहे हो अब बहु भी ले आईये, भाभी जी बेटी का सुख देखा है अब बहु ला कर राज कीजिये …………लीजिये बेटी कि चिंता से मुक्त नहीं हुए दूसरी चिंता सर पर आ कर खड़ी मुस्कुरा रही थी
मगर ये इतनी बड़ी चिंता हमें प्रतीत नहीं हुई क्यूंकि लड़की ढूंढना हमें लगा टेढ़ी खीर नहीं होती जल्द ही इस बात का भी ज्ञान हो गया कि हम कितने गलत थे
लड़की ढूंढना उतना ही मुश्किल था जितना के लड़का |
लड़की ढूंढना एक अभियान कि तरह शुरू हो गया
किसी परिचित ने एक रिश्ता बताया कि ……….बस भाईसाहब लड़की तो हीरा है ….घर भर देगी आप का
पापा ने कहा दहेज दिया नहीं तो लेने का सोच के पाप का भागीदार नहीं बनना बस लड़की गुणवान चाहिए जिसके आने से घर स्वर्ग बन जाये
बस भाईसाहब कोई नहीं वो तो लड़की का धन है
आप धन रहने दीजिये लड़की बताइए कौन है ? कहाँ से है ?
परिचित ने कहा इस रविवार चलिए सीधे मिलवा देते है ……………………नेकी और पूछ पूछ हम तैयार थे रविवार को उनके घर जाने के लिए
उत्सुकता पूरी चरम पर थी कैसी होगी यही सब सोचते हुए उनके घर पहुँच गए ………………..हमें वहां पहुँच कर बहुत ज्यादा निराशा हाथ लगी क्यूंकि लड़की के पिता की सोच ऐसी लगी कि वो पैसो से सब कुछ खरीद सकते है | हम लोगो ने उन्हें साफ़ बता दिया कि हमारे लिए लड़की ही सबसे बड़ा दहेज़ है
तभी कुछ महिलाओ के साथ एक लड़की ने बैठक में प्रवेश किया हम सब को हेल्लो बोल कर चाय सर्व करने लगी हम सब जैसे उसे देख कर ठगे से बैठे हुए थे | लड़की लगा फैशन परेड में आई हो चेहरे से लगा अभी किसी पार्लर से आई हो | दोनों हाथो के नाख़ून तराशे हुए पैरो का भी वही नज़ारा था |
लड़की के पिता ने अपनी बेटी कि तारीफ़ में कहा ये हमारी बेटी बड़े लाड़-प्यार में पली है
मम्मी जी ने कहा जी लग रहा है ये सुनते ही हमारी हँसी निकल आई :) सब कि नजर हम पर थी अपने को बचाने के लिए जल्दी से हमने एक सवाल लड़की कि तरफ दागा
पढ़ रही हो …………….जी अभी B .A में एडमिशन लिया है | अंकल ने जो उम्र बताई थी उस हिसाब से तो पोस्ट ग्रेजुएशन हो जाना चाहिए था या हो रहा होता हमने फिर दूसरा सवाल कर डाला
+2 कब किया था ……………….पांच साल पहले
इतना लम्बा गैप क्यूँ
वो पापा ने कहा ग्रेजुएशन कर लो तो कर रही हूँ
गुड अच्छा किया
अब बारी सवाल करने कि मम्मी की थी
बेटा आप के शौक क्या क्या है
जी कुछ नहीं
सभी कि कुछ पसंद होती है आप कि भी होगी अच्छा ये बताओ इन पांच सालो में जब आप पढ़ नहीं रही थी तो क्या करती थी
कुछ नहीं बस टी.वी. देखना पसंद है और म्यूजिक का
गुड संगीत कि ज्यादा जानकारी नहीं है फिर भी संगीत मुझे भी पसंद है जो दिल को शुकून दे कानो में रस घोले…………. तो हमने पूछ लिया क्या सुनना पसंद करती हो आप
जी एडम, रैआना मैडोना शकीरा को सुनती हूँ
आप भी सुनती है इनको ………………….हाँ थोड़ा बहुत…
आप कि पसंद क्या है मैं तो जगजीत गुलाम अली रफ़ी कैलाश नुसरत साहब इनको ही सुनती हूँ
ओह्ह्ह
क्यूँ क्या हुआ
नहीं थोडा सा बोरिंग है ये सब मेरे लिए
मैं बस मुस्कुरा भर गयी
बेटा खाना तो बनाना आता होगा माँ ने डरते डरते पूछ ही लिया
कैसा बेतुका सवाल किया था माँ ने मगर अब किया भी क्या जा सकता था जिस जवाब की उम्मीद थी वो ही जवाब मिला
इस बार जवाब लड़की कि माँ ने दिया अरे बहनजी सबसे छोटी है जरा लाड प्यार में पली है हमें कौन सा खाना बनाना आता था शादी के बाद सब सीख गए थे आप गाइड करेंगी तो ये भी सीख जएगी
हाँ हाँ क्यूँ नहीं
जाओ बेटी चाय के बर्तन ले जाओ माँ ने हमारे सवालो से तंग आ कर बेटी को वहां से जाने को कह दिया
अच्छा अब हम को भी इजाजद दीजिये
अरे बैठिये न बात ही कहाँ हो पाई
आप शादी कैसी चाहते है लड़की के पापा ने पूछा
सादगी पसंद लोग है तामझाम नहीं ये अंकल ने कहा जो मिलवाने लाये थे
तभी माँ ने कहा शादी के विषय में बाद में बात करते है आप जन्मपत्री दे दीजिये मिलवा के आप को सूचित कर देंगे
बस अब चलते है
अरे ऐसे कैसे बिना खाना खाए तो जाने नहीं देंगे
भाई साहब रिश्ता पक्का हो जाये तो खाना पीना सब होगा अभी आप बस इजाजद दीजिये पापा ने कहा
अरे लड़की के पिता ने कहा आप लड़के वाले हो ऐसे कैसे बिना खाए जाने देंगे
तकल्लुफ़ रहने दीजिये खाना भी खा लेंगे फिर कभी बस अब चलते है हम सब उठ गए और उन से विदा लेकर घर को बुधु वापस आये
हमारा तो हँस हँस के बुरा हाल था मगर माँ का गुस्सा सातवे आसमां में था |
एक लड़की घर जोड़ती है उसके संस्कार से ही मकान घर बनता है | मगर यहाँ तो कुछ ऐसा था कि खैर जिस गली जाना नहीं तो उस विषय में अब और कुछ कहना सही नहीं
ये हमारा पहला तजुर्बा था | भगवान करे कि आख़िरी ही हो मिशन अभी जारी है ………………
इस तज़ुर्बे को पोस्ट करने में थोड़ा वक़्त लग गया | खुशख़बरी ये है कि भैय्या कि शादी नवम्बर कि ६ तारीख को है इस वक़्त मैं वहीँ पर व्यस्त हूँ | कुछ खट्टे- मीठे अनुभव यहाँ भी हुए है जिसको कि मैं जल्द ही कलमबद्ध कर के आप सब के साथ बाटूंगी |



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56 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

syeds के द्वारा
November 22, 2011

दिव्या जी, हार्दिक बधाइयां… आपके भाई साहब और भाभी जी को भी ढेरों मुबारकबाद.. http://syeds.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    November 24, 2011

    syeds जी, नमस्कार शुक्रिया इस प्यारी सी मुबारकबाद के लिए आप का एक बार फिर से शुक्रिया :)

allrounder के द्वारा
November 19, 2011

दिव्या जी, नमस्कार भाई की शादी और ब्लोगर ऑफ़ द बीक चुने जाने पर हार्दिक बधाई, हालांकि आपकी तस्वीर ब्लोग्गर ऑफ़ द वीक से उतर चुकी है फिर भी हमारी ओर से बधाई और आपकी ओर से मिठाई तो बनती है …..

    div81 के द्वारा
    November 24, 2011

    सचिन जी, स्वागत आप का शुक्रिया…………. ये सौभाग्य तो मुझे भी नहीं प्राप्त हुआ सचिन जी, बस साथी ब्लोगर्स कि प्रतिक्रिया से ही इस बात का पता चला | बिलकुल मिठाई तो बनती है जल्दी ही मिठाई का इंतजाम भी जेजे मंच में हो पाए ये कोशिश जारी है :) …………… आप का तहे दिल से शुक्रिया सचिन जी

Rajkamal Sharma के द्वारा
November 19, 2011

दिव्या बहिन …… नमस्कारम ! स्वागतम ! आदाब ! आदर सहित अभिनन्दन और आभार ! आपके भैया जी की शादी हो गई –भाभी श्री जी की घर में ले आने की मुबारकबाद ……. आपने मेरे लिए ब्लागर आफ दा वीक की शुभकामनाये भेजी थी….. वोह कहते है ना की “कर भला तो हो भला” अगर मेरे लिए उस खास समय में आपने कुछ और मांग लिया होता तो आज आपको ब्लागर आफ दा वीक की बजाय वोह भी मिल गया होता …… आगे से ख्याल रखियेगा ….. हा हा हा हा आप सभी को सपरिवार इस शुभ कार्य के सम्पन्न होने की और परिवार में फिलहाल एक सदस्य की बढोतरी होने की ढेरों शुभकामनाये और मुबारकबाद !

    div81 के द्वारा
    November 24, 2011

    राजकमल भाई सादर नमस्कार, शुक्रिया, मेहरबानी, करम इस इज्जत अफजाई के लिए शुक्रिया राजकमल भाई ये बात तो मैंने बचपन से देखी है जब भी अपनों के लिए मांगती हूँ वो जरुर पूरा हो जाता है मगर जैसे ही भगवान के दरबार में अपनी फाइल पहुंचाती हूँ तुरंत फाइल गायब हो जाती है छोटा सा प्रार्थना - पत्र भी रद्द कर दिया जाता है तब से अपने लिए प्रार्थना करना छोड़ दिया है | जब से ब्लॉग लिखना शुरू किया तब से हर पोस्ट के प्रार्थना शुरू हो जाती थी ये तो ब्लागर ऑफ द वीक चुना जाये मगर हर बार रद्द ही हुई प्रार्थना मगर जब आप के लिए कहा तो तुरंत करवाही हो गयी :) तब तो आप मेरे लकी चार्म हुए :) भगवान करे आप का हर लेख हिट हो जाये और ब्लोगर ऑफ द वीक चुना जाये :) :) :) :) इस बहुत प्यारी सी शुभकामना के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया राजकमल भाई :)

आर. एन. शाही के द्वारा
November 7, 2011

जिसे लाना नहीं था, उसे जो चाहा, कह दिया । लेकिन जो भाभी घर में परमानेन्टली रहने आ रही है, उसके विषय में ज़रा सम्भल कर लिखियेगा दिव्या जी ! बाद में कभी भी आपके ब्लाग पर नज़र पड़ी और बिफ़र पड़ीं, तो फ़िर भैया भी पहले वाले भैया नहीं रह जाएंगे आपका पक्ष लेने के लिये । ब्लागर आफ़ द वीक की बधाइयां !

    div81 के द्वारा
    November 24, 2011

    आदरणीय शाही जी, नमस्कार बहुत ही पते कि बात कही आपने भाभी श्री के विषय में संभल के लिखना होगा और लिख भी दिया तो ब्लॉग तक न पहुंचे उनकी नजर ऐसा कुछ बंदोबस्त भी करना होगा :) | नहीं तो न घर के रहेंगे न ………:) आप का तहे दिल से शुक्रिया शाही जी

roshni के द्वारा
November 4, 2011

दिव्या जी बहुत बढ़िया से लिखा अपने .. एक बार शुरू किया तो पूरा ही पड़ती गयी .. आप बीती काफी दिलचस्प है .. मगर हाँ ये सच है जितना वर खोजना कठिन है उससे भी मुश्किल वधु तलाशना … हम भी बस इसी तरह के हालत से निकल रहे है… बहुत बढ़िया ब्लोगेर ऑफ़ दी वीक चुने जाने पर बधाई

    div81 के द्वारा
    November 22, 2011

    रौशनी जी, नमस्कार बहुत दिनों बाद आप कि कोई प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है | शुक्रिया आप का भगवन करे कि आप के परिवार को भी जल्द से जल्द जिसकी तलाश है वो मिल जाये | तहे दिल से शुक्रिया आप का रौशनी जी

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
November 4, 2011

दिव्या जी मुबारक हो .ब्लागर आफ दी वीक और …..ननद और भाभी का बड़ा ही प्यारा रिश्ता है खूब निभाइएगा यादगार बन जाए ..हम सब भी हंसें ख़ुशी हों …..इंतजार है बाकी खबर का ……….भ्रमर ५ हमारा तो हँस हँस के बुरा हाल था मगर माँ का गुस्सा सातवे आसमां में था | एक लड़की घर जोड़ती है उसके संस्कार से ही मकान घर बनता है | मगर यहाँ तो कुछ ऐसा था कि खैर जिस गली जाना नहीं तो उस विषय में अब और कुछ कहना सही नहीं ये हमारा पहला तजुर्बा था |

    div81 के द्वारा
    November 22, 2011

    भ्रमर जी  इतनी प्यारी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

munish के द्वारा
November 4, 2011

दिव्या जी, मुबारक हो आप ननद बनने वाली हैं……….! ये बात सही है की शादी के लिए लड़की या लड़के का चयन आसान नहीं होता………! एक बिलकुल ऐसा ही वाकया मेरे छोटे भाई के रिश्ते के समय भी हुआ …….. और लड़की बड़ी मेहनत के साथ कई साल से B A करने में मशगूल थी…….. लेकिन ये सब हमने उसका बायोडाटा पढ़ कर और उस लड़की के पिताजी से बात करके ही पता कर लिया हमें लड़की देखने जाने की जरूरत नहीं पड़ी………..! और वैसे भी हमारे पिताजी और मैं तो लड़की देखने जाने के भी खिलाफ हैं जब तक की बायोडाटा और फोटो देखकर पूरी तरह संतुष्ट न हो……….. लेकिन ये भी तो कहते हैं की जोड़ियाँ ऊपरवाला बनाता है…… तो ये सब हमारी भाग दौड़ तो………….!

    div81 के द्वारा
    November 22, 2011

    आदरणीय मुनीश जी, नमस्कार शुक्रिया :) ननद बन तो गयी हूँ मगर अभी तक ननंद वाली फीलिंग नहीं आ पाई, भाभी इतनी प्यारी हैं कि माँ से उनकी चुगली ही नहीं लगा पाती ;-) | बिलकुल सही कहा आप ने जोडियाँ तो ऊपर से बनती है ये भाग दौड भी ऊपर वाला ही करवाता है कहते है न मेहनत किये बिना फल भी नहीं मिलता बस सारी भागा दौडी उसी फल के लिए होती है | हमारा मानना भी यही है लड़की देखने जाने से पहले बायोडाटा फोटो और जन्मपत्री का मिलान करा कर ही आगे कि बातचीत कि जाये | जिससे दोनों तरफ के लोगो को समस्या का सामना न करना पड़े | आप का बहुत बहुत शुक्रिया

shaktisingh के द्वारा
November 4, 2011

दिव्या जी, ब्लॉगर ऑफ़ दा वीक बनने पर आपको बधाई , काफी सुन्दर लेख

    div81 के द्वारा
    November 22, 2011

    शक्ति सिंह जी, आप का तहे दिल से शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
November 4, 2011

बधाई दिव्या ब्लोगर ऑफ़ दा वीक बनने पर

    div81 के द्वारा
    November 22, 2011

    आदरणीय निशा जी आप का तहे दिल से शुक्रिया

Rajkamal Sharma के द्वारा
November 3, 2011

दिव्या बहन ….. सादर अभिवादन ! यह जान कर मन प्रसन्न हुआ की आपकी भाईसाहिब की शादी के लिए लड़की देखने की चिंता दूर हो गई है और अब अपनी भाभी श्री जी को घर पर ले आने की तैयारी मे जुट गई है …… सच कहा है आपने की लड़के वाले लड़की को ढूँढना बहुत ही आसान काम समझते है….. और आपकी हैलो से याद आ गया वो चुट्कला जिसमे की माडर्न लड़की भगवान बजरंग ब्ली जी को फ्लाइंग नमन करते हुए कहती है की “हाय –हनु” !!! ….. भगवान करे की आपके आपसी संबंध ननद –भोजाई की बजाय सखी सहेली जैसे और उन से भी बढ़कर गहरे आपसी समझ वाले हो ……इस शुभ कारज की आप सभी को ढ़ेरो मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    div81 के द्वारा
    November 22, 2011

    राजकमल भाई, सादर प्रणाम ! अभी तो आधी चिंता दूर हुई है बाकि कि आधी चिंता तो तब दूर होगी जब ब्लोगिंग में कई शादी करने वाले मेरे भाई कि सच का शादी का लड्डू खा पाऊँगी आप का बहुत बहुत शुक्रिया भाई बिलकुल चाहे लड़की हो या लड़का दोनों का रिश्ता तलाशना बहुत ही मुश्किल काम है…. कोई भी रिश्ता हो उसमे सबसे जरुरी आपसी समझ का होना बेहद जरुरी है नहीं तो कड़वाहट घुलने में और रिश्तों के बिखरने में वक्त नहीं लगता | आप का तहे दिल से शुक्रिया भाई

ziawaris के द्वारा
November 3, 2011

बेशक आप की बात बिलकुल सही है की बच्चो की शादी में माँ बाप बहोत दिक्कते झेलना पड़ती है खासकर लड़की की शादी को लेकर वो हर वक़्त चिंतित रहते है kuch bhi आप accha likhti है

    div81 के द्वारा
    November 19, 2011

    लेखनी की सराहना के लिए आप का बहुत बहुत शुक्रिया |

ziawaris के द्वारा
November 3, 2011

बेशक आप की बात बिलकुल सही है की बच्चो की शादी में माँ बाप बहोत दिक्कते झेलना पड़ती है खासकर लड़की की शादी को लेकर वो हर वक़्त चिंतित रहते है

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    बिलकुल माँ बाप के लिए बच्चो की शादी एक सुयोग्य पात्र से करना चिंता का विषय तो है ही | बेटी के लिए चिंता इस लिए ज्यादा होती है क्यूँ की उसको विदा जो करना होता है |

Amita Srivastava के द्वारा
November 3, 2011

शादी के साथ-२ ब्लोगर ऑफ़ दा वीक का लड्डू भी ड्यू हो गया दिव्या जी मुबारकवाद

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    अमिता जी, लड्डू क्या पूरी पार्टी का इंतजाम होगा :) बस जागरण जंक्शन से वार्ता चल रही है जैसे ही मंजूरी मिलती है लड्डू का भी इंतजाम हो जायेगा | इस प्यारी सी मुबारकबाद के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया अमिता जी

Tamanna के द्वारा
November 3, 2011

मोस्ट व्यूड ब्लॉगर ऑफ द वीक बनने के लिए हार्दिक बधाई दिव्या जी.

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    तमन्ना जी आप का तहे दिल से शुक्रिया

Santosh Kumar के द्वारा
November 1, 2011

दिव्या जी ,.बहुत ही रोचक वर्णन ,..भाई साहब को शुभकामनये ,..अगली पोस्ट की प्रतीक्षा रहेगी ,..साभार

    Santosh Kumar के द्वारा
    November 4, 2011

    ब्लागर ऑफ़ वीक बनाने की हार्दिक बधाई भी स्वीकार करें ,..साभार

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    आदरणीय संतोष जी, आप का अनेको अनेक धन्यवाद जी बिलकुल स्वीकार कर ली ये बधाई भी आप का एक बार फिर से धन्यवाद :)

akraktale के द्वारा
October 31, 2011

दिव्या जी शादी मुबारक हो, आपके भाई साहब की! शादी तो ऊपर वाले का बनाया गठबंधन है मगर कई बार वह भी कांफ्युस दिखता है.लड़का लड़की देखने के दौरान इस प्रकार की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं. फिर भी शादी के बाद के वृत्तान्त का इन्तजार रहेगा. साधुवाद.

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    आदरणीय अशोक जी धन्यवाद जी बिलकुल सही कहा आप ने जोड़े ऊपर से ही बन कर आते है मगर वहाँ का कन्फ्यूजन ही ऐसी रोचक घटना को जन्म देता है | एक बार फिर से आप का धन्यवाद

vinitashukla के द्वारा
October 31, 2011

रोचक शैली में लिखे लेख के लिए आपको बधाई और भाई के विवाह हेतु शुभकामनायें.

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    रोचकता तो उस घटना ने प्रदान की है जो ये लेख आप पसंद आया | विनीता जी आप का तहे दिल से शुक्रिया |

nishamittal के द्वारा
October 31, 2011

दिव्या भाई की शादी की शुभकामनाएं व बधाई.जो आशाएं आपको नववधू से हैं और नववधू को आपके परिवार से हैं,सब पूर्ण हों.सब मंगल ही मंगल हो.विवाह चाहे लड़के का हो लडकी का परिवार में दोनों का समान ही उत्तरदायित्व रहता है.

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    आदरणीय निशा जी प्रणाम इस स्नेह आशीष के लिए आप का अनेकोअनेक धन्यवाद जी बिलकुल सही कहा आपने दोनों परिवार का उत्तरदायित्व समान रहता है | बहुमूल्य प्रतिक्रिया और इस आशीष के लिए आप का फिर से शुक्रिया

Amita Srivastava के द्वारा
October 31, 2011

दिव्या जी बहुत ही रोचक लगा आपका लेख जैसे कि आँखों के सामने ही सब कुछ हो रहा है | भाई की शादी की बहुत -२ मुबारकबाद |

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    अमिता श्रीवास्तव जी नमस्कार शुक्रिया आप का इतनी प्यारी प्रतिक्रिया के लिए

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 31, 2011

दिव्या जी, आपका ये तजुर्बा पढ़ना तो बड़ा ही रोचक रहा। बीच-बीच में गुदगुदाती हुई चुटकियों से मज़ा आ गया। आपके भाईसाहब का विवाह सन्निकट है और हम सब परिवार वालों (ब्लॉगर परिवार) को कोई ख़बर ही नहीं। चलिए अब पता चल गया है तो ये भी उम्मीद है कि देर-सवेर हम सबको भी दावत ज़रूर मिलेगी। आनंददायक लेख। साभार,

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    November 3, 2011

    अंततः यह शुभ दिन भी आ ही गया जब आप आखिरकार ब्लॉगर ऑफ़ द वीक बन ही गयीं ( पहली बार जहाँ तक मुझे याद है)। दावत के साथ अब तो इसके लिए भी कुछ पकवान चाहिए। मुबारक हो आपको। :D

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    वाहिद जी, अतंत: यह शुभ दिन भी आ ही गया जब मेरे कमेन्ट की संख्या १००० तक पहुँच गयी :) और ये शगुन का १००१ आप के नाम :) मुझे बहुत खुशी है की भाई की शादी के साथ मेरा लेख ब्लॉगर ऑफ द वीक चुना गया मगर जिस दिन की कई दिनों से प्रतीक्षा की उस पल को देख नहीं पाई ये जानकारी ब्लॉग में आई प्रतिक्रिया से ज्ञात हुई | चलिए खाता खुला तो सही :) | जी बिलकुल पकवान भी खिलाया जायेगा जेजे मंच से सिफ़ारीश लगाती हूँ की किसी आयोजन का प्रबंध कर दें वो जिसमे सभी साथी ब्लोगर्स एक साथ एकत्रित हो सके वहाँ पकवान का प्रबंध मेरी तरफ से रहेगा :d आप का तहे दिल से शुक्रिया :)

Tamanna के द्वारा
October 31, 2011

भाई के विवाह के लिए शुभकामनाएं ..लेख बहुत बढ़िया है.

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    शुक्रिया तमन्ना जी आप की शुभकामनाओ और इस सरहाना के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

rudrapunj के द्वारा
October 31, 2011

दिव्या जी सादर नमस्कार भैया की शादी है ,जाहिर है आप बहुत व्यस्त होंगी,लेकिन इतनी व्यस्तता में भी आपने हमें आपके इस स्तम्भ को बार-बार पढने और हंसने और प्रतिक्रिया लिखने के लिए मजबूर कर दिया | मुझे उम्मीद है कि आप भैया की शादी खूब इंज्वाय करेंगी और “आज मेरे भैया की शादी है “गाना गाकर खूब नाचेंगी और शादी से फुर्सत पाकर अपने अगले आलेख से हमें रूबरू कराएंगी | रूद्र

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    रूद्र जी सादर नमस्कार इस स्तम्भ को आपने बार बार पढ़ा साथ ही प्रतिक्रिया लिखने को भी आप को मजबूर होना पढ़ा ये मेरे लिए खुशी की बात है | बिलकुल भाई की शादी में खूब खूब इन्जॉय किया साथ ही इस गाना भी गाया :) | आप का अनेको अनेक धन्यवाद रूद्र जी

shashibhushan1959 के द्वारा
October 31, 2011

ये तो  कुछ  भी  नहीं, इसे  बस  ट्रेलर  जानें । पिक्चर में तो पता नहीं क्या-क्या मिल जाये। ऐसे - ऐसे   प्रश्न  खड़े   होते   हैं   सुनकर, अच्छे-अच्छों का  भेजा  फ्राई हो  जाये।।

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    आदरणीय शशिभूषण जी नमस्कार,  भेजा फ्राई होने की स्थिति से तो बच गए है और उस ट्रेलर को देख के ही पिच्चर देखने का प्रोग्राम भी नहीं बनाया | भईया को उनकी जीवन संगिनी मिल गयी है :)  | आप का शुक्रिया

Lahar के द्वारा
October 31, 2011

प्रिय दिव्या जी सप्रेम नमस्कार मज़ा आया पढ़ कर , बीच – बीच में हंसी भी आयी ! आप की पहली खोज काफी दिलचस्प रही ! वैसे आज – कल तो ये कहानी घर – घर की हो गयी है | भैया की शादी के लिए मुबारकबाद | http://lahar.jagranjunction.com/2011/10/23/नारी-एक-अबूझ-पहेली/

    abodhbaalak के द्वारा
    October 31, 2011

    दिवा जी पहले तो आपके भय्या की शादी की अडवांस में मुबारकबाद, वैसे आपका पहले तजुर्बा तो बड़ा मज़ेदार रहा……………. काश ऐसे ही और तजुर्बे आपको देखने सुनने को मिलते और हमें पढने को :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    लहर जी आप को भी मेरा स्नेही आशीर्वाद :p ये जानकर की आप को इस अनुभव को पढ़ के मजा आया तो समझिए अपने अनुभव को मंच में साझा करना सार्थक हो गया सच कहूँ तो मजा मुझे भी आया था | बिलकुल सत्य वचन ये कहानी घर घर की है जब से एकता कपूर ने टी वी साम्राज्य में अपने कामयाबी के झंडे बुलंद किये है तब से घर घर की कहानी बदल गयी है | आप का बहुत बहुत शुक्रिया :) ……..

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    अबोध जी नमस्कार, शुक्र है की वो पहला तजुर्बा आखरी ही रहा वरना दिन में तारे वाली कहावत सच हो जाती :) आप का अनेक अनेक धन्यवाद अबोध जी

sadhana thakur के द्वारा
October 31, 2011

एक अच्छा लेख ,जो हमेशा देखने और सुनने को मिलता है ..

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    जी बिलकुल साधना जी, जहाँ भी वर या वधु खोजो अभियान चलता है वहां इस तरह के अनुभव जरुर हुए होंगे या होते है | आप का शुक्रिया

Amar Singh के द्वारा
October 31, 2011

प्रणाम, बहुत अच्छा लेख लिखा है आपने. बहुत बधाई. http://singh.jagranjunction.com

    div81 के द्वारा
    November 18, 2011

    प्रणाम अमर सिंह जी , लेख पढ़ने और सराहना के लिए आप का अनेको अनेक धन्यवाद |


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