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बसंती बयार

Posted On: 10 Feb, 2012 Others में

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Butea_monosperma1

महका महका सा दिन चला
महकी महकी सी रात चली
बही बसंती बयार जो
साथ फ़िज़ा मैं महक चली
फूल ये पलाश के
दहक रहे है आग से
सुगंध रच-बस सी गयी
महकी महकी ये साँस चली
महका महका सा दिन चला
महकी महकी सी रात चली
नव यौवना का रूप लिए
पुष्पों का श्रृंगार किये
धानी चुनर को ओढ़ कर
वसुंधरा भी सज चली
बहारों की सौगात चली
महका महका सा दिन चला
महकी महकी ये रात चली
पेडों की टहनियों मे
खिलने लगे रंग बहार के
दूर कहीं कोयल कुहुके
पीहू-पीहू करे पपीहा रातो मे
सुर लहरियां अब बह चली
महका महका सा दिन चला
महकी महकी सी रात चली
sarson

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63 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kksharma के द्वारा
February 14, 2013

बहुत ही रोचक महकी महकी प्रस्तुति,

February 22, 2012

दिव्या जी नमस्कार ! महका महका सा दिन चला, महकी महकी सी रात चली…बहुत खूबसूरत बसंत गीत । पता नहीं कैसे ये रचना मेरे से छूट गयी थी….बहुत अच्छी बन पड़ी है ये रचना….आपको बहुत बहुत बधाई और साधुवाद !!

    div81 के द्वारा
    February 25, 2012

    आदरणीय सूरज जी, सादर नमस्कार !!!! आप का तहे दिल से शुक्रिया रचना की सराहना के लिए

drmalayjha के द्वारा
February 15, 2012

दिव्या जी, स्नेह. कभी एक साहित्यिक रचना पढ़ी थी-”सारी दुनियां में हल्ला हो गया कि बसंत आ गया है, लेकिन मेरे पास आया बुखार, कम्बल में लिपटे,कड़वी दवाइयां पीते,काढ़ा पीकर मैं बसंत का स्वागत कैसे करूँ. दरअसल बसंत आता नहीं,लाया जाता है. जब दिल खुश हो,तभी बसंत है.” रंग और खुशबु का ये मौसम आपके दामन में ताउम्र भरा रहे.

    div81 के द्वारा
    February 18, 2012

    आदरणीय मलय जी, बिलकुल खुशियाँ और उमंग है तो बहारो को मौसम साथ होता है | आप का बहुत बहुत शुक्रिया इस अनमोल प्रतिक्रिया के लिए मेरी भी ऊपर वाले से ये ही प्रार्थना है कि ये खुशियों और उमंगो वाला बसंत सब के जीवन मे सदा के लिए आ कर ठहर जाए आमीन :)

rajkamal के द्वारा
February 13, 2012

दिव्या बहिन क्या पलाश के फूलों से अध्यात्मिक और गरिमामय होली खेलने वाला कोई रंग भी प्राप्त होता है ? किरपा करके मुझ नासमझ को जरूर बतलाने की किरपा कीजियेगा आभार सहित शुभकामनाये

    div81 के द्वारा
    February 14, 2012

    आदरणीय राजकमल भाई, आप की जानकारी बेहद वृहद है | बड़े हो आप मुझसे तो तजुर्बा भी आप का अधिक होगा | जी बिलकुल पलाश के फूलो को ही टेसू का फूल भी कहते है टेसू के फूल से होली के रंग भी बनते है | बंगाल की तरफ इसे पलाश का फूल कहते है | इसके रंगों के कारण इसको Flame of Forest भी कहते है | अपनी खूबसूरती से तो ये सब को मोह लेता है साथ ही इसके फुलो, पत्तों और जड़ो से विभिन्न बीमारी मे औषिधि की रूप मे भी प्रयोग किया जाता है |

rajkamal के द्वारा
February 13, 2012

दिव्या बहिन क्या पलाश के फूलों को ही टेसू के फुल कहते है ?

rajkamal के द्वारा
February 13, 2012

दिव्या बहिन आपसे एक बात पूछनी है क्या पलाश के फूलों में सुगन्ध समाई होती है या फिर यह कवी /कवियत्री की कल्पना और एहसास ही होते है ?

rajkamal के द्वारा
February 13, 2012

दिव्या बहिन सच में ही यह फुल इन मायनों में शानदार और जानदार है क्योंकि मेरी तरह और बहुत से ब्लागरो ने भी इनको पहली बार ही देखा होगा धन्यवाद

rajkamal के द्वारा
February 13, 2012

दिव्या बहिन ….. सादर अभिवादन ! आपने जो भी जुर्माना मुझ पर लगाने की सोची हो लेकिन अब आपको अपना विचार बदलना ही पड़ेगा क्योंकि मैंने आपके इसी ब्लॉग पर ही लिखना बेहतर समझा जिसको की अगर आपने स्वीकार कर लिया तो वोह एक भाई के लिए किसी भी इनाम से कम नहीं होगा हा हा हा हा हा हा हा हा हा

    div81 के द्वारा
    February 14, 2012

    राजकमल भाई ये तोहफा तो आप का सर आँखों में मगर आप से मुझे एक ब्लॉग पोस्ट की दरकार है और मैं उम्मीद करती हूँ की आप जल्द ही ब्लॉग पोस्ट करके एक और नायब तोहफे से नवाजेंगे | वैसे आप की इस लाला अमरनाथ वाली विशेष टिप्पणी के लिए विशेष आभार मगर मुझे संदेह है कहीं आप की इस विशेष टिप्पणियों के कारन भाई(बहन) भतीजावाद का आरोप न लग जाए

abhishektripathi के द्वारा
February 13, 2012

सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके मूल्यवान समर्थन की जरुरत है!

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin in bhaai sahib ne apne blog ka link to diya hi nahi hai bina address ke koi kisi ko kaise khoje

Rita Singh, 'Sarjana' के द्वारा
February 12, 2012

दिव्या जी , वसंत के आगमन से मन प्रफुल्लित हो जाता हैं , हर चीज नई और ताजगी लिए होता हैं , फिजा में रौनकता छा जाती हैं l सुन्दर रचना ………………..बधाई

    div81 के द्वारा
    February 14, 2012

    रीता जी आप को दोहरी मेहनत करनी पड़ गयी अपनी प्रतिक्रिया मुझ तक पहुँचाने में इसके लिए आप का एक बार फिर से दोहरा शुक्रिया

Rita Singh, 'Sarjana' के द्वारा
February 12, 2012

दिव्या जी , बसंत के आगमन से मन प्रफुल्लित हो जाता हैं ,हर चीज नयी और ताजगी से भर जाता हैं ,फिजा में रौनक सी छा जाती हैं ठीक आपकी रचना की तरह ………………………..सुन्दर , बधाई हो l

    div81 के द्वारा
    February 14, 2012

    रीता जी, जी बिलकुल बहारो का मौसम है | मौसम की ताजगी और खूबसूरती से मन प्रफुल्लित होना लाजमी है |ठीक उसी तरह से आप की प्रतिक्रिया से मन प्रफुल्लित है :) इस प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया रीता जी

Santosh Kumar के द्वारा
February 12, 2012

मुग्ध करती रचना दिव्या जी ,.बहुत बधाई

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    आदरणीय संतोष जी, नमस्कार आप का तहे दिल से शुक्रिया रचना की सराहना के लिए

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    DIVYA BAHIN ….. HMAARE SANTOSH JI SIRF MURAKH HI NAHI BALKI YH ANAND DIT AUR MUGADH BHO HOTE HAI SUNDR RACHNAAO PAR

आर. एन. शाही के द्वारा
February 12, 2012

दिव्या जी, मनभावन रचना । यह ॠतु ही ऐसी होती है, कि कुछ भी लिख दो तो बहार आ ही जाती है । वैसे ही, जैसे जवानी में हर प्राणी की खूबसूरती खिल-खिल उठती है । वसन्त और जवानी का चोली-दामन वाला साथ होता है । सुन्दर रंग में सुन्दर तस्वीरों के साथ गुदगुदाती इस रचना के लिये बधाई स्वीकार करें ।

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    आदरणीय शाही जी, सादर नमस्कार जी बिलकुल ये मौसम का खुमार और असर ही तो है | हर तरफ बहार का मौसम हो तो हर किसी को ये खूबसूरती बरबस अपनी और खिंच ही लेती है और मन खिल- खिल उठता है | इतनी प्यारी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin …. hmaare aadrniy shahi ji ko to hrek mamle par likhne ki khuli ajadi mili hui hai

abodhbaalak के द्वारा
February 11, 2012

दिवा जी आपने तो मंच पर जो खुशबू फैलाई है वो …………. उसकी महक तो एक लम्बे समय तक मंच पर छाई रहेगी बहुत दिन के बाद आपकी कोई रचना पढने को मिली है, इस लिए और भी http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    अबोध जी नमस्कार, खुले दिल से मेरे छोटे से प्रयास की सराहना के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया :)

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin ….. hmaare abodh ji ki aadhi aur adhuri baato se yh manch mahkta aur chahkta rahta hai

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    दिव्या बहिन हमारे अबोध जी जब तक अपनी नई रचना पोस्ट नहीं कर देते इनकी पुरानी रचना अपनी महक इस मंच पर बिखेरती ही रहती है

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 11, 2012

आदरणीया दिव्या जी, सादर अभिवादन. इस “बसंती बयार” से ” लगता है वसंत आ गया ” किसी को आनंद आया हो, न आया हो ह्रदय की गहराइयों तक भा गया. अति सुन्दर रचना.

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी, सादर नमस्कार, मुझे हार्दिक प्रसन्नता हुई आप का भी ह्रदय की गहराइयों से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin ….. yh is manch ke mahoul ka hi prbhaav hai ki bhagwaan ka naam lene wale aadrniy pardip jo ko bhi basant panchmi ke mata srswti wale rango ne apne paash me baandh loya hai

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 11, 2012

वसंत का वर्णन करने के साथ ही उसका अनुभव भी हुआ आपकी इस कविता के माध्यम से। सुन्दर काव्य के लिए हार्दिक बधाई दिव्या जी।

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    आदरणीय वाहिद जी, ये जान कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई की आप “बसंती बयार” के द्वारा उसका अनुभव भी कर पाए | इतनी प्यारी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    DIVYA BAHIN AB HAR KOI WAHID JI KI TARH SE ALLRAAOUNDAR TO NAHI NA HOTA KI LIKHE BHI AUR SAATH ME GAAYE BHI TANKI PAATHAK USKO MAHSUS BHI KAR SKE

अलीन के द्वारा
February 11, 2012

बसंती बयार से सजी कविता….मन को मंत्र-मुग्ध करती है.

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    अलीन जी, मन्त्र-मुग्ध करती इस प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    DIVYA BAHIN AAP YKIN MAANIYEGA ALIN JI NE BILKUL SACH HI KAHA HAI

yogi sarswat के द्वारा
February 11, 2012

बसंत के इस मौसम में चार चाँद लगाती रचना ! अति सुन्दर ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/07

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    योगी जी, उत्त्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin yogi ji apne rajnitik lekho dwara is manch ko chaar nahi aath chaang lgaaye hue hai

munish के द्वारा
February 11, 2012

दिव्या जी आपकी इस रचना के लिए केवल एक शब्द ही लिख सकता हूँ ” बेहतरीन ” http://munish.jagranjunction.com/2011/02/14/%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%B2%E0%A5%87/

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    आदरणीय मुनीश जी, उत्त्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin shukar hai ki vakil babu ne ek shabd to kaha lekin woh bhi itni jyada lambi punchh wala joki unke blag tak jaati hai

chaatak के द्वारा
February 11, 2012

दिव्या जी, बसंती बयार का ये सुगन्धित झोंका जागरण पर लाने के लिए आप का धन्यवाद! शब्दों के साथ बातें करते ये चित्र मन को सहसा किसी और दुनिया में पहुंचा देते हैं| प्रकृति की खूबसूरती को इतने सुरमई तरीके से चित्रित होते देख सुखद अनुभूति हुई| बेहतरीन रचना पर बधाई!

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    चातक जी, बहुत दिनों बाद ब्लॉग में आप की प्रतिक्रिया देख के सुखद अनुभूति हुई | मेरी कोशिश रहती है की जो कुछ मैं अनुभव करती हूँ उनको शब्दों ही नहीं चित्रों के माध्यम से भी आप सभी तक पहुंचा पाऊं और बहुत अच्छा लगता है जब मैं अपनी उस भावना को आप सभी तक पहुंचा पाती हूँ | इतनी प्यारी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin yh chaatak ji hi hai joki kala aur chitarkla dono ke hi kadrdaan hai

dineshaastik के द्वारा
February 11, 2012

दिव्या जी नमस्कार, आपकी इस रचना ने सचमुच ही मुझे प्रतिक्रिया देने के लिये महका दिया। प्रकृति का सुन्दर चित्रण………. कृपया मेरी “बहस” को देखकर अपने विचार व्यक्त करें। http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    दिनेश जी नमस्कार, आप की प्रतिक्रिया देख के हार्दिक प्रसन्नता हुई अच्छा लगा मेरे छोटे से प्रयास ने आप को प्रतिक्रिया देने के लिए महका दिया | बहुत ही सुंदर प्रतिक्रिया आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin aap inki behas ka sirf dur se hi njaara kijiyega

akraktale के द्वारा
February 11, 2012

दिव्याजी, बसंत पर बहुत सुन्दर रचना किन्तु इस बार सर्दियां ठीक से इस ऋतू का मजा भी नहीं लेने दे रही और लगता है सीधे ग्रीष्म ही आयेगा.बधाई.

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    आदरणीय आशोक जी, नमस्कार बिलकुल इस बार सर्दियाँ सही से इस ऋतू का आनंद नहीं लेने दे रही है मगर एक बार फिर से मौसम ने करवट ले ली है और फिर से बसंती बयार मौसम को खुशनुमा बना रही है | आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin aadrniy ashok ji ko na to sardi ki rut ke jyada badi hone ki khushi hai aur na hi garmi ki rut ke chhota ho jaane ki khushi hui hai

alkargupta1 के द्वारा
February 10, 2012

दिव्या जी , मुग्ध कर देने वाली मनोहारी बसंती बयार…….. बहुत ही सुन्दर सचित्र बर्णन हृदय को आनंदित कर गया……

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    आदरणीय अलका जी, सादर नमस्कार ये आप का बडप्पन है जो मेरी रचना की इतने खुले दिल से तारीफ की | आप ने भी बसंत आगमन की बहुत अनमोल रचना मंच में पोस्ट की थी | उस कृति के लिए कहा जा सकता है की मुग्ध कर देने वाली रचना | मेरे प्रयास की सराहना के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    divya bahin – is manch par naario ne hmesha hi kudrt ka sundrtm aur sjiv ttha stik vrnan kiya hai

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    दिव्या बहिन आदरणीय अलका जी अक्षरश सच ही कह रही है इस कविता के साथ इन चित्रों का मेल अदभुत बन पड़ा है

shashibhushan1959 के द्वारा
February 10, 2012

आदरणीय दिव्या जी, सादर ! खूबसूरत मौसम के दिलकश नज़ारे का मनमोहक वर्णन ! बहुत सुन्दर !

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    आदरणीय शशिभूषण जी, सादर नमस्कार इतनी खुबसूरत प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    rajkamal के द्वारा
    February 13, 2012

    दिव्या बहिन ! आदरणीय शशिभूषण जी हमेशा ही खूबसूरत प्रतिकिर्या अपने ही कविवर वाले अंदाज़ में दिया करते है

rajkamal के द्वारा
February 10, 2012

दिव्या बहिन ….. नमस्कारम ! तीस जनवरी को हमने माता रानी सरस्वती देवी जी की मूर्ति का जल में विसर्जन किया था और मैं सोच ही रहा था की पिछले साल तो इन दिनों के आसपास आपकी माता सरस्वती जी पर बहुत ही प्यारी रचना आई थी ….. लेकिन अब आपने इस बसंतमय रचना द्वारा सारी शिकायते दूर कर दी है ….. पता नहीं यह कमेन्ट पोस्ट हो पायेगा की नहीं आजकल YOU MUST BE LOGGED IN TO POST A COMMENT नामक लाइन से ही जबरदस्ती वाली अटूट दोस्ती हो गई है ….. इस सुंदर रचना पर मेरी तरफ से भी मुबारकबाद कबूल फरमाए आभार सहित

    div81 के द्वारा
    February 12, 2012

    आदरणीय राजकमल भाई, सादर नमस्कारम ! पिछली बार अपने भी बसंत पंचमी में वाग्देवी की पूजा अर्चना और मूर्ति विसर्जन का हाल-ए-बयां पोस्ट किया था कुछ कठिनाईयां आई थी जिसका जिक्र आप ने पोस्ट में किया था |माता रानी के कृपा से  इस बार सब कुछ अच्छे से सम्पन्न हुआ होगा | बहुत दिनों से मंच से आप की अनुपस्थिति अखर रही है उम्मीद है सब ठीक होगा | थोडा सा वक्त निकल के मंच में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दीजिये नहीं तो हम सब मिल के आप पर जुर्माना लगा देने :) आप की प्यारी सी मुबारकबाद काबुल कर ली है अब जल्दी से आप कोई बढ़िया सी पोस्ट डाल के हमें भी मुबारकबाद देने का मौका दीजिये :) आभार सहित

    akraktale के द्वारा
    February 13, 2012

    दिव्या बहन जी, आज आदरणीय राजकमल भाई साहब ने राईट टू रिजेक्ट का विकल्प ढूंढ़ ही लिया है इसी लिए एक साथ सभी को मत दे दिया है. भाई साहब बधाई.

    rajkamal के द्वारा
    February 14, 2012

    आदरणीय अशोक जी ….. सादर अभिवादन ! भाई साहिब ! मेरे ख्याल से शायद यह “राईट टू सिलेक्ट” है क्योंकि मैंने किसी को भी रिजेक्ट नहीं किया सिवाय उन स्नेही ब्लागरो के जिनके ब्लॉग पर YOU MUST BE LOGGED IN TO POST A COMMENT रूपी सन्देश पढ़ने को मिला आपके स्नेह के लिए हार्दिक आभार


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