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वो ..... खत का इन्तजार

Posted On: 12 Apr, 2012 में

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सुनो !!! नामाबर

मेरे नाम से कोई तो

खत अब तुम ले आओ

लाओ उस खत के साथ तुम

सौंधी महक मेरे अपनों की

थोड़ी धूल, थोड़ी बारिश के छींटे भी

या तुम तपती गर्मी की

तपिश  साथ ले आना

हमारे बिना जो खिला था

बसंत, शहर मे मेरे

उसकी खुशबु भी साथ ले आना तुम

या तुम उस खत के साथ

किसी की दुआएं साथ ले आना

पढ़ा नहीं बहुत सालो से कोई खत

जिसमे होती थी

कुछ अपनी कुशलता का विवरण

कुछ कामनाये हमारी कुशलता की

कुछ अपने सुख दुःख के किस्से

कुछ हमारे सुखो का

पूछा जाता था हाल

कुछ अपने बेफिक्री के आलम

कुछ नसीहते हमारी

बेफिक्री तबियत को

कुछ मौसम का हाल

और जानना खत के साथ

यहाँ के मौसम का मिजाज

साथ पूछ लेना

पड़ोसियों का भी हाल चाल

या फिर याद करना

नुक्कड़ की जलेबियों का स्वाद

घोल जाती थी वो सब बातें

खत मे भी मिठास

वो खत के अंत मे मांगा  जाना

गलतियों के लिए माफ़ी

वो कहना बडो को प्रणाम,

देना छोटो को प्यार

आपके खत के इन्तजार मे

आपकी 5758151728_5ac9bb5edb



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53 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Himanshu Nirbhay के द्वारा
March 15, 2013

दिव्या जी, सादर स्नेह… आजकल के sms और इन्टरनेट के दौर मैं ख़त (चिट्ठियों) वाले दिनों के याद दिलाना और वो ही बड़ी सटीक रचना के माध्यम से, बहुत बहुत साधुवाद….. सुश्री अंजुम रहबर की एक बरी ही सुन्दर रचना है चिट्ठियों के दौर के बारे मैं…. “पड़ती रहती हूँ मैं सारी चिठ्ठियाँ| रात है और हैं तुम्हारी चिठ्ठियाँ| तुम हो मेरे पास लेकिन दुःख है ये, अब नहीं आती तुम्हारी चिठ्ठियाँ| हम नज़र आयेंगे एक एक हर्फ़ (अक्क्षर) मैं, जब जलाओगे हमारी चिठ्ठियाँ| लिख तो राखी हैं मगर भेजी नहीं, हैं अभी तक वो कुंवारी चिठ्ठियाँ| डाँटते “अंजुम” हैं मुझको घर के लोग, सबने पद ली हैं तुम्हारी चिठ्ठियाँ|” अच्छे लेखन के लिए धन्यवाद…………..

Abhinav Srivastava के द्वारा
May 8, 2012

दिव्या जी नमस्कार, आशा है आप सकुशल हैं, रचना बहुत सुन्दर, बीते दिनों की याद कराती हुई, मैंने भी बहुत से ख़त संभाल के रखे हैं …. उनके बाद सिर्फ परीक्षाओं के प्रवेश पत्र आते थे और अब तो डाकिया सिर्फ टेलीफोन का बिल लाता है….. शेष फिर, बड़ों को प्रणाम, उत्तर की प्रतीक्षा में, अभिनव

    div81 के द्वारा
    May 11, 2012

    अभिनव जी, सादर नमस्कार मैं कुशलता से हूँ और आप कि मंगल की कामना करती हूँ :) अच्छा लगा जान कर की आपने खतों को अब भी संभाल के रखा है आज भी ये खत पढ़ो तो उन्ही बीते हुए दिनों मे पहुंच जाते है…………..  शेष का इंतजार रहेगा, बडो ने आशीर्वाद भेजा है हमारा भी प्राणाम कहियेगा बडो को :) इस प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    Abhinav Srivastava के द्वारा
    May 14, 2012

    आपका जवाबी ख़त अच्छा लगा….आशीर्वाद के लिए आभार… जब बड़ो से मिलूँगा, आपका प्रणाम पंहुचा दूंगा….फ़िलहाल मेरी शुभकामनायें … कभी हमारे घर (ब्लॉग पर) भी कोई ख़त डालियेगा… :-)

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    अभिनव जी, कुछ बातो का कभी आभार प्रकट नहीं किया जाता आप कि श्भ्कम्नाओ के लिए शुक्रिया अब आप के घर का पता मिल गया है साथ ही निमन्त्रण भी अभी आप के पते में एक खत डाल के आते है ………..बैरंग नहीं होगा वो ख़त :)

chaatak के द्वारा
May 6, 2012

दिव्या जी, ख़त का ये इंतज़ार काफी अच्छा लगा| आपने उन दिनों की याद दिला दी जब हम ख़त लिखते थे बड़ी ताकीद के साथ पोस्ट करते थे और बेकरारी से जवाब की प्रतीक्षा करते थे| अच्छी पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

    div81 के द्वारा
    May 11, 2012

    आदरनीय चातक जी, आप कि ये प्रतिक्रिया बहुत अच्छी लगी बहुत दिनों बाद आप मंच मे आये है | जी बिलकुल खत पोस्ट होते ही जवाबी खत का इंतजार होने लग जाता था :) आप तहे दिल से शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
April 17, 2012

दिव्या ,यदा कदा पोस्ट देखने को मिलती है,पता नहीं कैसे मैं इसको देख नहीं सकी,याद दिलाई उस समय की जब सरल जीवन के साथ हम परस्पर शेयर करते थे,बेसब्री से खत का इंतज़ार और फिर लिखना .

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय निशा जी, सादर नमस्कार ! कोई बात नहीं निशा जी आप मेरे पोस्ट तक पहुंची मेरे लिए खुशी की बात है | आप का तहे दिल से शुक्रिया

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
April 16, 2012

पढ़ा नहीं बहुत सालो से कोई खत जिसमे होती थी कुछ अपनी कुशलता का विवरण कुछ कामनाये हमारी कुशलता की कुछ अपने सुख दुःख के किस्से कुछ हमारे सुखो का पूछा जाता था हाल दिव्या जी सुन्दर रचना ..अब तो दुनिया है बेहाल ..काम कर रहा है सब अंतरजाल ..घर घर में टैबलेट होगा आकाश और आप पढ़ेंगी फिर से पुराने पत्रों के स्कैन और सारा जंजाल सच में पहले का आनंद और ही कुछ था ..प्यारी छवि दिव्या जी भ्रमर ५

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी, सादर नमस्कार ! आदरनीय अलका जी के शब्दों को ही दोहराना चाहूंगी “जो आत्मीयता खतो को पढ़ के उनके इंतजार मे रही है वो और किसी संचार साधन मे नहीं है” पहले का कुछ और ही था सही कहा आप ने इस प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
April 14, 2012

दिव्या जी नमस्कार! आपकी इस रचना ने ख़त के इंतजार के पुराने दिनों की याद ताजा कर दी.अब मोबाइल की दुनिया में ख़त एक सपना बन गए.सुन्दर रचना.

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    भूपेश जी सादर नमस्कार, जी सपना ही बन गया है खत का इंतजार इसी लिए तो डाकिये से एक खत की इल्तजा कर रही हूँ :) आप का शुक्रिया

Sumit के द्वारा
April 13, 2012

१४ फरवरी के बाद आज आपको पढने का मोका मिला ,,,,सुंदर रचना ,,,,एक बात के लिए और शमा चाहता हूँ ,,,मैंने ये सबसे पहले पढ़ ली थी मगर कमेन्ट अब किया .,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    जी बिलकुल १४ फरवरी के बाद अब मौका लगा है और जैसे ही मौका लगा पहला काम कविता पोस्ट करने का ही किया | पहले पढ़ लिया था और देर से कमेन्ट किया इस बात के लिए तो इतना ही कहूँगी देर आये दुरुस्त आये :) क्षमा मांग के शर्मिंदा न कीजिये | आप का शुक्रिया देर से ही सही आपने कमेन्ट तो किया :)

jlsingh के द्वारा
April 13, 2012

आदरणीय दिव्या जी, सादर अभिवादन ! आज चिठ्ठी कि आत्मा कितनी संतुष्ट हुई होगी ! उसने गर्व महसूस किया होगा कि आज भी किसी ने उसे याद रखा ! गुमनामी के अँधेरे में खोई चिट्ठी की याद ताजा करने के लिए हार्दिक आभार ! बिलकुल वैसी ही होती थी चिट्ठी जैसा आपने वर्णन किया है! मेरी माँ बोलती थी और मैं लिखता था, बचपन में! आपने तो मेरी माँ (जो अब इस संसार में नहीं है) को भी याद दिला दिया! बहुत बहुत आभार!

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय जवाहर सिंह जी, सादर नमस्कार बिलकुल चिठ्टी लिखना तो माँ ने ही सिखाया है हमें भी वो बोला करती थी और हम लिखा करते थे :) आपने भी वो बीता समय याद दिला दिया | चिठ्ठी की आत्मा आज हर्षित होगी की उसको याद करने वाले है अब भी :) आप का तहे दिल से शुक्रिया

April 13, 2012

खतों की खुशबू ताज़ा हो गयी.. आज के युग की खताओं में से एक यह भी है.. सुन्दर प्रस्तुती हेतु बधाई स्वीकारें.. सादर.

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    टिम्सी जी, उसी खुशबू ने लिखने के लिए प्रेरित किया ………. सच कहा आप ने आज के युग की हटाओ मे से एक यह भी … आप का तहे दिल से शुक्रिया

shashibhushan1959 के द्वारा
April 13, 2012

आदरणीय दिव्या जी, सादर ! आज चिठ्ठी कि आत्मा कितनी संतुष्ट हुई होगी ! उसने गर्व महसूस किया होगा कि आज भी किसी ने उसे याद रखा ! गुमनामी के अँधेरे में खोई चिट्ठी की याद ताजा करने के लिए हार्दिक आभार !

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय शशिभूषण जी, सादर नमस्कार बहुत बहुत शुक्रिया आप का चिठ्ठी की आत्मा आज सच बहुत खुश हुई होगी को उसको याद करने वाले बहुत से है | एक बार फिर से शुक्रिया आप का

minujha के द्वारा
April 13, 2012

दिव्या जी आपने मेरे जैसे जाने कितने लोगो के मन की बात कह दी इस रचना में,मैने अपनी अंतिम चिट्ठी आज से सात साल पहले पढी थी……..,धन्यवाद आपका, उन लम्हों को याद दिलाने के लिए

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    मीनू जी, सादर नमस्कार सच बहुत वक्त गुजर गया है अपने अंतिम खत को पढ़े और लिखे भी ……………….. मुझे खुशी हुई की आप उन लम्हों तक पहुंची लिखना सार्थक हो जाता है अपने भाव को आप सब तक पहुँचा पाने मे आप का तहे दिल से शुक्रिया

alkargupta1 के द्वारा
April 13, 2012

दिव्या जी , मंच पर बहुत दिनों बाद आपकी अति सुन्दर मनोहारी भावपूर्ण अभिव्यक्ति पढने को मिली….खतों में जो आत्मीयता की सुरभि का अहसास होता है वह अन्य कहीं किसी संचार साधन में नहीं….बहुत ही सुन्दर रचना के लिए बधाई

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय आलका जी, सादर नमस्कार काम की अधिकता की वजह से मंच से दुरी बना ली थी कुछ समय के लिए | जी बिलकुल जो आत्मीयता खतो को पढ़ के उनके इंतजार मे रही है वो और किसी संचार साधन मे नहीं है ……….. बहुत ही प्यारी सी प्रतिक्रिया आप की इस प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का ह्रदय से आभार

rekhafbd के द्वारा
April 13, 2012

दिव्या जी ,आज की भागती जिंदगी में खत का इंतज़ार बहुत अच्छा लगा ,बधाई

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    रेखा जी, सादर नमस्कार अच्छा लगा आप की प्रतिक्रिया देख कर आप का शुक्रिया

yogi sarswat के द्वारा
April 13, 2012

या तुम उस खत के साथ किसी की दुआएं साथ ले आना पढ़ा नहीं बहुत सालो से कोई खत जिसमे होती थी कुछ अपनी कुशलता का विवरण कुछ कामनाये हमारी कुशलता की कुछ अपने सुख दुःख के किस्से आदरणीय दिव्या जी , जितनी तारीफ करून उतनी कम ! कितने गहरे भाव ! ख़त भले ही कम हो गए हैं , उनका स्थान भले ही मेल ने ले लिया है किन्तु ख़त की खुशबू अभी भी बनी हुई है ! वाह !

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय योगी जी, सादर नमस्कार ज़र्रानावाजी के लिए आप का शुक्रिया आप खुद ही बहुत अच्छा लिखते है | जी बिलकुल ख़त की खुशबू अब भी बनी हुई है उसी खुशबू ने लिखने के लिए प्रेरित किया | आपका तहे दिल से शुक्रिया :)

चन्दन राय के द्वारा
April 13, 2012

दिव्या जी सादर नमस्कार, अत्यंत मनोहारी ख़त है आपका , ख़त पढ़ा और जाना की तन्हाई में ख़त होती है गोया कोई सहेली , कभी आँखे कुसुम खिलकर कभी निम्नगा सी पनीली

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    चन्दन राय जी सादर नमस्कार, अत्यंत ही मनोहारी प्रतिक्रिया लगी आप की इस काव्यात्मक प्रतिक्रिया के लिए आप का तहेदिल से शुक्रिया

akraktale के द्वारा
April 13, 2012

दिव्या जी सादर नमस्कार, खतों से सभी को रहा है प्यार, खतों का लंबा इन्तजार, सब भेंट चढ़ गया टेलीफोन और मोबाइल की.आज मोबाइल पर घंटो की बात भी वो सुकून नहीं दे सकती जो कई दिनों बाद मिला एक ख़त देता था, जिसको एक बार नहीं कई बार पढ़ा जाता था. पुरानी यादें ताजा करा देने का शुक्रिया. बधाई.

    abodhbaalak के द्वारा
    April 13, 2012

    दिव्या जी दिल से लिखा है आपने इस रचना को और दिल से लिखी हर रचना…………… वैसे बहुतो दिनों के बाआआआआआअद…………… ये चिठ्ठी aayi है….. वैसे aaj के है टेक युग में न जाने क्या के बदल गया है, ab तो समस और मेल के युग में, मोबाइल के युग में ये एक lupt pray parni के jaisa है…………. aasha है ki ab aap ki अगली चिट्ठी (पोस्ट )जल्दी मिलेगी http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय अशोक जी, सादर नमस्कार सच कहा आपने आज भी जब मैं उन पुराने खत को पढ़ती हूँ तो वो ही तासीर अब भी है उन मे उन यादो के गलियारे मे फिर से पहुँच जाती हूँ | आप का तहे दिल से शुक्रिया

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    अबोध जी, हमारी चिठ्टी तो डाक विभाग की लेटलतीफी के चलते पहुँच गयी आप की तो अब तक बैरंग घूम रही है पेनाल्टी लगेगी आप को मंच से अनुपस्थित रहने की :) आप की इस खूबसूरत सी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से आभार अब आप भी जल्दी से कुछ पोस्ट कर दीजिए मंच मे सभी को आप का (आपकी पोस्ट ) इन्तजार है एक बार फिर से आप का शुक्रिया

dineshaastik के द्वारा
April 13, 2012

आदरणीय  दिव्या जी बहुत  दिनों बाद आपकी रचना देख  कर अत्यधिक  खुशी हुई। खतों का अहसास  तो अब यादों में सिमट कर रह गया है। खत तो मोबाइलों का ग्रास  बन  गये हैं।  भाव पूर्ण  रचना की प्रस्तुति के लिये आभार……

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय दिनेश सादर नमस्कार,  मुझे भी अत्यधिक खुशी हुई ये देख कर की मंच के साथी ब्लोगर्स ने भुलाया नहीं मुझे :) आप का भी ह्रदय से आभार इतनी प्यारी प्रतिक्रिया के लिए :)

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 12, 2012

दिव्या बहिन …… सादर अभिवादन ! आज आपके इस खत को पढ़ने के बाद भुला हुआ + भुला दिया गया वोह पुराना स्टाइल याद आ गया सच में बहुत ही मजेदार +भावविभोर कर देने वाला + पुरानी यादे ताज़ी कर देने वाला है आपका यह खत सच में मजा आ गया धन्यवाद सहित आभार :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय राजकमल भाई ………….. सादर नमस्कार इस कविता को लिखने की प्रेरणा भी आप से मिली है मुझे आप के मेल का वो अंदाज बिलकुल खतो जैसा ही तो होता है | :) इस लिए इस के हकदार तो आप भी हुए इतने खुले दिल से तारीफ़ करने के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया राजकमल भाई :) :) :) :) :)

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 12, 2012

बहुत सुन्दर कविता,दिव्या जी. मेरे नाम से कोई तो खत अब तुम ले आओ लाओ उस खत के साथ तुम सौंधी महक मेरे अपनों की थोड़ी धूल, थोड़ी बारिश के छींटे भी या तुम तपती गर्मी की तपिश साथ ले आना बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय राजीव जी, सादर नमस्कार आप का बहुत बहुत शुक्रिया

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 12, 2012

आदरणीय दिव्या जी, सादर अभिवादन. सर्व प्रथम आपका हार्दिक स्वागत है की आप मंच पर एक लम्बे अंतराल पर हाजिर हुईं वो भी इतनी भावात्मक कविता के साथ. बधाई.

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी, सादर नमस्कार आप से एक विनम्र निवेदन है की आप मुझे दिव्या नाम से सम्बोधित कीजिये मुझे अच्छा लगेगा आदरणीयआप हमारे लिए है :) वो हम आप को कहेंगे | बहुत बहुत शुक्रिया आप का इतनी प्यारी प्रतिक्रिया के लिए

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 12, 2012

कोई तो लौटा दे रे, मेरे बीते हुए दिन….

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    अजय जी सादर नमस्कार सच कोई लौटा दे बीती हुए दिन :) आप का शुक्रिया

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 12, 2012

दिव्या जी, नमस्कार बहोत दिनों बाद आपकी कोई रचना पढ़ी …………….पढ़ कर अच्छा लगा परिवर्तन एक समान्य नियम है……………और वक़्त जितना तेज़ होता जा रहा है मौलिकता उतनी ही कमती जा रही है………पत्रों के उन मिठासों को अब सिर्फ मह्सुश ही किया जा सकता है…………

    April 12, 2012

    सादर नमस्कार! कहत का इंतजार अच्छा लगा……और उससे भी अच्छा लगा उस ख़त में अपनो और आस पास की खबर लेना फिर बड़ों का आशीर्वाद और छोटों को प्यार………बहुत खूब.

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आनंद परवीन जी, नमस्कार जी कुछ काम की अधिकता के कारण मंच से अनुपस्थित रही हूँ | परिवर्तन एक सामने नियम है और इसी परिवर्तन ने लोगो को और पास ला दिया है मगर जो अपनापन और एक खुशी उन खतो से जाहिर होती थी मोबइल और नेट से एक बनावटीपन और झूट ज्यादा झलकता है | उस मिठास की जगह कड़वाहट ने ले ली है | जी बिलकुल उन पत्रों की मिठास को अब सिर्फ महसूस किया जा सकता है | आप की प्रतिक्रिया पढ़ के मुझे भी अच्छा लगा …… :) आप का शुक्रिया

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    सादर नमस्कार, अनिल जी आप की प्रतिक्रिया अच्छी लगी साथ ही अच्छा लगा आप का अंदाज ……………. बहुत बहुत धन्यवाद आप का

Harish Bhatt के द्वारा
April 12, 2012

दिव्या जी सादर प्रणाम. बहुत सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई.

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय हरीश जी, सादर नमस्कार, प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 12, 2012

इस घोर व्यविहरिक और आपाधापी की ज़िन्दगी में ह्रदय पाषण हो चुका है | आंचलिकता की खुशबू इन्हें अब नहीं रुचती | गहन भावों का सुन्दर प्रकटीकरण | बधाई !!

    div81 के द्वारा
    April 17, 2012

    आदरणीय आचर्य जी, सादर नमस्कार सच ही है की इस विकास की दौड मे ह्रदय पाषण हो गया है और मन अशांत | रचना की सराहना के लिए आप का ह्रदय से आभर


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