पहचान

खुद से, जिंदगी से और खुशियों से

56 Posts

1777 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3085 postid : 446

"भीड़ मे गुम एक लड़की की तलाश"

Posted On: 11 May, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

माँ आज आप से कई सारी बातें करने का मन हो रहा है !!! मन कर रहा है आप कि गोद  मे सर रखूं और आप कि आंचल की छाँव मे सो जाऊं और  आपकी  नरम गर्म सी वो हथेली थपकियाँ दे मुझे, माँ आप से फिर से वो कहानियां सुनु, चाँद नगर की, जानती हो माँ मैं आज सोच रही थी कि क्या अब भी “चाँदनगर मे परियों का डेरा होगा या चाँद  नगर तन्हा अकेला होगा”Heavenly Dreams


क्योंकि अब वहां कई बरसों से गए नहीं आप का आंचल थामे उन परियों के डेरे मे भटके नहीं है न, तो मुझे लग रहा था कहीं वो परियां हमारा इंतजार करते करते गुम तो नहीं हो गयी न, या चाँद नगर मे भी यहाँ के जैसे खूब सारी बिल्डिंग तो नहीं बन गयी अगर ऐसा हुआ तो कैसे पहचान पाउंगी उस टीले को जहां परियां रहा करती थी |
इस लिए माँ उन कहानियो का सिलसिला फिर से आज मे शुरू करना चाहती  हूँ | सुनाओगी न माँ फिर से वो कहानियां
अरे माँ एक बात तो पूछना भूल ही गयी ……………… वो मेरी सुनहरी बालो वाली गुड़िया का क्या हुआ ????????  उसके लिए अब भी आप नए कपड़े सीती हो न !!!! कहीं वो बदरंग सी तो नही न उस बक्से मे, अच्छा सुनो, सुनो ना , माँ !!! उस बक्से मे सबसे नीचे एक पुरानी डायरी है ………………… आपने वो पढ़ी कभी !!!!! माँ आप हमेशा शिकायत करती थी कि कुछ बताती नहीं हूँ, जब देखो डायरी मे सर दिए रहती हूँ |
माँ आज आप वो पढ़ना उसमे आप कि यादें संजोये हूँ |
माँ आप के जाने के बाद कोई नहीं जिसने हमें कहानियां सुनाई हो, क्योंकि जिंदगी कि तल्ख हक़ीक़तें नए क़िस्से जो सुनाने लगी थी | कोई नहीं था माँ ! !!  जब हम रोते थे तो आप गले से लगा कर पुचकारती थी तो वो नदियों का उफान अपने चरम मे आ जाता था, आज इन नदियों मे इतने बाँध है कि कभी छलकने की चेष्टा ही  नहीं करते ………………. आपके जाने के बाद जिंदगी बहुत तेज रफ़्तार भागी है कई बार इस रफ्तार से सर चकराया है हमने खुद को थामने की कई -कई नाकाम कोशिशें भी की है मगर हर बार आप को पुकार के खाली आवाज़ों के जंगल मे भटक के लौट आये और फिर से उन्ही रफ़्तार मे शामिल हो गए है |
माँ आप जानती थी न कि कितना डर लगता था हमको अंधेरे से पूरी रात आप से लिपट के बेफिक्र से सो जाया करते थे मगर माँ आप ये नहीं जानती होगी आप के जाने के बात अंधेरो मे कई साये हमारे आस पास मंडराते है पूरी पूरी रात  ख़ौफ़ मे गुजार देते है अंधेरे से तो डरना कब का छोड़ दिया मगर ये साये हमें दिन कि रौशनी मे भी डराने लगे है ……………. बताओ न माँ हम कैसे अकेले इनका सामना करे |
माँ आप अपने साथ हर जगह मुझे ले कर जाती थी याद है न चाहे नानी के घर हो या मंदिर या फिर बाजार ही क्यूँ न हो हर वक्त साये कि तरह आप अपने साथ रखती थी फिर क्यूँ  इन खौफनाक सायो के बीच मुझे छोड़ के चली गयी हो  क्यूँ नहीं अपने साथ ही  मुझे भी लेकर गयी | थक गयी हूँ मैं सफर करते करते तेरे आंचल कि छाँव भी नसीब नहीं , भटक गयी हूँ मैं इन भूलभुलैया रास्तों का सफर करते करते मैं अब और सफर नहीं कर पाउंगी  यहाँ
माँ आज फिर इन आवाज़ों के जंगल मे आप को पुकार रही हूँ  ………… सुन रही हो न मुझे ……………….. रो तो नहीं रही माँ ………आप कि बेटी कमजोर पड़ने लगी है खुद को ढोते ढोते अब कुछ पल तो ऐसे मिलने चाहिए न कि जिसमे  रुक के सुस्ता सकूँ |
माँ आज आप से कई सारी बाते करने का मन हो रहा है ………………………..सुन रही हो न88895
.______________________________________________________________________________________________________________
नोट: बचपन कि कुछ धुंधली याद को आप सब के साथ साझा कर रही हूँ |इस  संस्मरण कि प्रेरणास्रोत मेरी सहेली है जिसके कि मम्मी पापा रोड एक्सीडेंट मे नहीं रहे थे और वो अक्सर अपनी नोट बुक मे अपनी माँ से बाते किया करती थी |


Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 4.88 out of 5)
Loading ... Loading ...

82 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Somesh के द्वारा
May 24, 2012

tremendous explanation of the desires and feelings of the people who took this pain.. I have to say that it pressurize us to think in that situation.. I am new on Jagran and a new reader of ur blog too.. I am an immature writer and welcomes you to guide me in my writing.. Address is somesh.jagranjunction.com

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
May 22, 2012

बहुत सुन्दर आलेख,दिव्या जी,कहीं कुछ रीत सा गया. फिर से उसी गाने के बोल याद आ रहे हैं…. हुई आँख नाम और ये दिल मुस्कुराया कि साथी कोई भूला याद आया

    div81 के द्वारा
    May 24, 2012

    आदरनीय राजीव जी, सादर प्रणाम आप का तहे दिल से शुक्रिया

follyofawiseman के द्वारा
May 21, 2012

ये तो रेचन है…….! आपको इसे खुले आकाश के नीचे कहीं सुनसान जगह पर आकाश की ओर देख कर निकाल देना चाहिए था…..इसको यहाँ लिखने की कोई ज़रूरत नहीं थी……..! ये माना कि रेचन के बाद मन हल्का हो जाता है….लेकिन अपने मन को हल्का करने के लिए किसी और के मन को व्यथित कर देना अच्छी बात नहीं है……..

    div81 के द्वारा
    May 22, 2012

    मेरे लिए लिखना सबसे अच्छा जरिया है अपने दिल की व्यथा को बाहर निकालने के लिए, सारी पीड़ा, सारा दर्द शब्दों के जरिये निकाल देने से मन बहुत हल्का हो जाता है | किसी के दर्द को पढ़ के महसूस करना भावुक ह्रदय की पहचान है और भावुक ह्रदय मुझे नहीं पढेंगे किसी और की व्यथा को पढेंगे वो फिर व्यथित होंगे | जब तक वेदना है संवेदना भी रहेगी ………………….. आप का बहुत बहुत शुक्रिया

    follyofawiseman के द्वारा
    May 22, 2012

    ऐसे ही दुनियाँ मे क्या कम दुख है जो आपने दुख बाँटने का शौक पाल रखा है…..दुख बाँटने मे एक ख़तरा भी है…..आप जितना दुख बटेंगी उतना ही दुख आपको और मिलेगा……ये गणित बड़ा उल्टा है…..जो दुखी है जीवन उसको और-और दुख देता है……मुझे डर है की दुख बाटते बाटते…..कहीं दुख आपके जीवन का ढंग न हो जाए….बहुत से लोग है….जिनका दुखी रहना स्वभाव बन गया है…वो लोगों को अपना दुख सुना कर उनसे सहानुभूती बटोरतें है….. समय रहते चेत जाइए……..अगर बाँटना ही है तो आनंद बांटिए…….दुख भी भला कोई बाँटने की चीज़ है….. एक और बात है…..दुखी आदमी पर लोग दया ज़रूर कर देता है लेकिन प्रेम नहीं…….सहानुभूती को प्रेम समझने की भूल मत कीजिएगा……. (इतना सब कुछ मुझे इस लिए कहना पड़ा क्योकि आपकी फोटो देख कर मुझे लगता है…आपकी ज़िंदगी मे बहुत दुख है…..दुख अब आपके चेहरे का हिस्सा बनता जा रहा है….हम जिससे प्रेम करते है वैसा ही दिखने लगते है…….इसीलिए दुख से अब रिस्ता तोड़िए और आनंद बाँटना शुरू कीजिए…….और जैसे ही आप आनंद बाँटना शुरू करेंगी जीवन मे आनंद के और और स्रोत फूटने लगेंगे……ये मैं अपने अनुभव से कह रहा हूँ….बाँकी आपकी अपनी मर्ज़ी……अगर दुखी रहने मे ही आपकी मौज हो तो रहिए दुखी………………..) हर आन यहाँ सेहबा-ए-कुहन एक साघर-ए-नौ में ढलती है कलियों से हुस्न टपकता है, फूलों से जवानी उबलती है याँ हुस्न की बर्क चमकती है, याँ नूर की बारिश होती है हर आह यहाँ एक नग्मा है, हर अश्क यहाँ एक मोती है हर शाम है शाम-ए-मिस्र यहाँ, हर शब है शब-ए-शीराज़ यहाँ है सारे जहाँ का सोज़ यहाँ और सारे जहाँ का साज़ यहाँ ये दश्त-ए-जुनूँ दीवानों का, ये बज़्म-ए-वफा परवानों की ये शहर-ए-तरब रूमानों का, ये खुल्द-ए-बरीं अरमानों की इस फर्श से हमने उड़ उड़ कर अफ्लाक के तारे तोड़े हैं नहीद से की है सरगोशी, परवीन से रिश्ते जोडें हैं इस बज़्म में तेघें खेंचीं हैं, इस बज़्म में साघर तोड़े हैं इस बज़्म में आँख बिछाई है, इस बज़्म में दिल तक जोड़े हैं इस बज़्म में नेज़े खेंचे हैं, इस बज़्म में खंजर चूमे हैं इस बज़्म में गिर-गिर तड़पे हैं, इस बज़्म में पी कर झूमे हैं

Jack के द्वारा
May 21, 2012

डीव जी, मुझे आपका सही नाम तो नहीं पता लेकिन हां एक बात कहना चाहुंगा कि अगर मुझसे कोई आज के समय यह पुछता है कि जागरण जंक्शन का कौन सा ऐसा लेख है जो सीधे दिल पर लग गया हो तो निर्विवाद रूप से आपका यह लेख होगा. इस लेख के हर शबद में वह दर्द है जो देश के लाखो अनाथ बच्चे महसूस करते हैं. कहते हैं एक नारी को एक नारी ही समझ सकती है और आपने इस लेख के माध्यम से यह जाहीर करके बताया. बेहतरीन आर्टिक्ल. सर्वोत्तम

    div81 के द्वारा
    May 22, 2012

    आदरनीय जैक जी, मेरा सर्टिफिकेट नेम दिव्या है और दिव उपनाम से लिखती हूँ :) | मुक्तकंठ से सरहाना के लिए आप का ह्रदय से आभार

Imran Khan के द्वारा
May 19, 2012

its very nice. i have condolence with your friend, it was very sad but dont worry GOD is here.

    div81 के द्वारा
    May 20, 2012

    बिलकुल सही बोल रहे है आप ईश्वर है और वो सब जगह विद्यमान है और सब के लिए कुछ अच्छा ही सोचा है उपर वाले ने आप का तहे दिल से शुक्रिया

sadhanathakur के द्वारा
May 17, 2012

क्या कहूं ?……बेहतरीन ..बेहतरीन …………..

    div81 के द्वारा
    May 19, 2012

    आदरनीया साधना जी, सादर प्रणाम आप ने सब कुछ कह दिया है आप का तहे दिल से शुक्रिया

yogesh के द्वारा
May 17, 2012

Bahut umda likhti ho sis bhavna se bhari dil ko chu lene wali rachna Aapki rachna ko padhte hue hum bhi apni maa ke hath ki ungli pakad chandralok ki sair kr aye Very nice keep it up 5 star

    div81 के द्वारा
    May 19, 2012

    थैंक्स दादू वैसे ये आप का प्यार बोल रहा है :) सच कहूँ बहुत अच्छा लगा रहा है :) :) :)

shivnathkumar के द्वारा
May 17, 2012

दिव्या जी, नमस्कार | ‘माँ’ ये एक शब्द महामंत्र है कई दुखों से छुटकारा पाने का | कितनी भी बड़ी समस्या आपके सामने हो, बस माँ को याद करने से मन शांत हो जाता है | माँ को याद करती, चलती फिरती सजीव एवं सुन्दर लेखन के लिए बधाई !!

    div81 के द्वारा
    May 19, 2012

    आदरनीय शिवनाथ जी, सादर नमस्कार बिलकुल माँ को याद करने भर से ही सारी पीड़ा कम हो जाती है चाहे दर्द हो रहा हो या कोई दुःख सताता है सबसे पहले माँ ही याद आती है | काई बार जब कोई नहीं समझता तो माँ ही होती है जो बिन बोले आप को समझ जाती है | मंच मे आप का स्वागत है आप का तहे दिल से शुक्रिया

swadha के द्वारा
May 16, 2012

मन के भाव किसी को भी खुद से जोड़ लेते हैं और वैसे ही आपकी भावनाओं ने हमें अपने साथ बांध लिया

    div81 के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीया स्वधा जी, आप का तहे दिल से शुक्रिया …………. मंच में और हमारे ब्लॉग में आप का स्वागत है :)

minujha के द्वारा
May 15, 2012

दिव्या जी ,डायरी के ये पन्ने किसी को भी भावुक कर देंगे आपकी प्रस्तुति भी लाजवाब है,अति सुंदर

    div81 के द्वारा
    May 17, 2012

    आदरणीया मीनूजी सादर प्रणाम मुक्तकंठ से प्रशंसा  के लिए आप का ह्रदय से आभार

krishnashri के द्वारा
May 13, 2012

आदरणीय महोदया , सादर , मन भावुक हो उठा , आँखें भर आई . आगे क्या कहूँ ? आपने रुला दिया .

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरनीय कृष्ण श्री जी, सादर प्रणाम आप का तहे दिल से शुक्रिया

rajkamal के द्वारा
May 12, 2012

आदरणीय दिव्या बहिन ….. सादर अभिवादन

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    आदरणीय दिव्या बहिन ….. सादर अभिवादन आपकी इस रचना को पढ़ने के बाद मेरे मन में कुछेक बाते उठ रही है की कहीं यह आपकी किसी बचपन की शरारत से सम्बंधित तो नहीं है आपकी उस सहेली की समुन्द्र रूपी उस गुप्त डायरी में से आपने कुछेक मोती ही हमारे सामने पेश किये है पता नहीं क्यों मेरी तीसरी आँख मुझसे यह कह रही है की उस डायरी में आप पूरी गहराई में नहीं उतरी है ….. अभी भी उस समुन्द्र की तलहटी में अनेको बेशकीमती नगीने छुपे हुए है जिनको की आपने हमसे छुपा लिया है क्या आपकी उस डायरी तक पहुँच की जानकारी आपकी सहेली को है क्या आपकी पहुँच उस डायरी तक एक सीमित समय के लिए ही हुई थी ?….. क्या आपने यह सभी संस्मरण लाइव टेलीकास्ट करते हुए लिखे है ?….. या फिर इनको फ्लैशबैक में जाकर लिख डाला है हम सभी की सेवा में आपकी इस मार्मिक रचना को पढ़ते ही डर फिल्म के शाहरुख खान की याद हो आई शुकर है की आपकी सहेली डायरी में लिख कर बाते करती है मोबाइल से नहीं आपका यह राजकमल भाई तो जन्मजन्मान्तरो का भावो का भूखा है इन थोड़ी सी यादों से मेरी आत्मा तृप्त नहीं है होने वाली आपकी सजा यही है की आप इसका सिक्क्वेल यानी की पार्ट टू भी बहुत ही जल्दी से पेश करें वैसे माँ का स्थान किसी हद तक सहेली या फिर बड़ी बहिन ले सकती है आप अपनी उस सहेली को उसको इस लेख पर आये हुए कमेन्ट जरूर पढ़वाए

    jlsingh के द्वारा
    May 13, 2012

    दिव्या बहन का नाम मैंने राजकमल महोदय (गुरुदेव) से ही(उनकी पोस्ट के द्वारा) पहले पहल जाना. फिर मैंने भी उन्हें अपना बहन माना! पर, मुंहबोली बहन के साथ अटूट रिश्ता ……. पता नही क्यों मुझे भी यह रचना (डायरी के पन्ने) अधूरी लगी शायद कोई मजबूरी रही होगी, अपनी सहेली या बहन के साथ या कि माँ के साथ! उम्मीद है, डायरी के कुछ और पन्ने पलटेंगे और ‘डर’ से हम सब छूटेंगे ! सादर – जवाहर.

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरनीय राजकमल भाई, सादर प्रणाम मेरी इस रचना को पढ़ के आप के मन मे जो ये कुछेक बाते उठी उनको देखते हुए आ रही हूँ हर प्रतिक्रिया के साथ लाला अमर नाथ कि विशेष टिप्पणी ……………….. :) चलिए आप के मन मे जो कुछेक बात है उसका निवारण करने कि कोशिश करती हूँ ये मेरी कोई शरारत नहीं है हर वक्त मे शरारत नहीं करती …………… आप को ऐसा क्यूँ लगा कि ये मेरी कोई शरारत है मैंने उसकी डायरी के मोती नहीं चुराए है ये केवल मेरी मन कि कोरी भावनाये ही है बस प्रेरणास्रोत मेरी वो दोस्त है जो अपनी डायरी के पन्नों मे अपनी माँ से बात किया करती थी | उसने कभी उस डायरी को हमें पढ़ने नहीं दिया हाँ हमने जब पूछा कि क्या लिखती हो तो उसने बताया था | जब उस डायरी को मैं कभी पढ़ नहीं पायी तो उस मे गहराई से नहीं उतर पायी और सच मे उस भावना को नहीं छू पायी होंगी इस लिए वो भाव शब्दों के जरिये उकेर भी नहीं पायी जब उसने कभी इस बात कि इजाजत नहीं दी कि उस डायरी को हम पढ़े तो हमने भी कभी उसकी भावना को ढेस नहीं पहुंचाई मेरी पहुँच उस डायरी तक कभी नहीं हुई और उस सहेली का साथ भी दसवी तक ही रहा क्यूँ कि उसने दूसरे स्कूल मे दाखिला ले लिया था क्या आप ने ये सभी संस्मरण लाइव टेलीकास्ट करते हुए लिखे है ?? इस बात का अर्थ नहीं समझ पायी तो जवाब नहीं दे पाऊँगी फ्लैशबैक मे नहीं गयी हूँ वो प्रेरणास्रोत है राजकमल भाई आप ने ये कह के कि इस रचना को पढ़ के डर के शाहरुख खान कि याद आ गयी पूरी रचना की वाट लगा दी :) :) माँ का स्थान तो कोई नहीं ले सकता है उस स्थान कि भरपाई बहन या सहेली कर सकती है खुशी की बात ये है कि उसको माँ सासु माँ मिल गयी है और दोनों माँ बेटी कि तरह ही रहती है उससे मेरा मिलना नहीं हो पता जब भी कभी कोई उसके परिवार का मिलता है तो खैर खबर ले लेती हूँ कभी मौका मिला तो जरुर पढ़ने को कहूँगी राज भाई सच कहूँ अच्छा लगा आप का इतना ध्यान दे कर पढ़ना और मन मे उपजी शंकाओं को सीधे पूछना आप की पारखी नजर को सलाम………………………… आप का ह्रदय से आभार

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरणीय जवाहरभाईसाहबजी सादर प्रणाम राजकमल भाई का फिर से शुक्रिया कहूँगी कि उनके द्वारा एक और भाईसाहब हमें मिले ये बात मुझे आज ही पता चली तो माफ़ी चाहूंगी भाईसाहब ये रचना अधूरी तो नहीं हाँ अगर मैं अपने भाव को सही से नहीं रख पायी तो गलती पूरी तरह से मेरी है कोशिश करुँगी कि आइन्दा इस प्रकार की गलती दोबारा न हो अब इस डर से छुटकारा कैसे दिलाया जाए फिर से उन भावना मे बहने की कोशिश करुँगी अगर न्याय कर पायी तो इसके आगे कुछ फिर से लिखूंगी तब तक ये डर निकाल दीजिए राजकमल भाई को प्रतिक्रिया कि है उसमे हो सकता है आप के डर का निवारण भी हो जाए | आप का हृदय से आभार इस तरह से मेरी गलती को इंगित कराते रहिएगा इससे सुधार का मौका मिलेगा एक बार फिर से आप का शुक्रिया भाईसाहब

akraktale के द्वारा
May 12, 2012

“माँ आज आप से कई सारी बाते करने का मन हो रहा है ………………………..सुन रही हो न” माँ से भावुकता भरी वार्तालाप बहुत सुन्दर. बधाई.मुझे रह रह कर अपनी पोस्ट “अधूरा जिस्म” की याद आ रही थी.

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    आपकी इस रचना को पढ़ने के बाद मेरे मन में कुछेक बाते उठ रही है

    akraktale के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरणीय सादर, यदि कुछ गलत लगा हो तो अवश्य बताएं मुझे सुधार के लिए अवसर मिलेगा. और आपकी सहयोगी के रूप में प्रतिष्ठा और बुलंद होगी.

    akraktale के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरणीय सादर, क्षमा करें मैंने आपकी ऊपर वाली प्रतिक्रया बाद में पढ़ी. इसलिए त्रुटी होगई. आपकी कलम कहीं और कागज़ कहीं होने से भ्रम हो गया था.पुनः क्षमा करें.धन्यवाद.

    akraktale के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरणीय सादर, अब मैंने नीचे भी आपकी प्रतिक्रियाएं पढ़ी और अब मुझे आपको बताने की जरूरत नहीं की आप क्या चीज है.

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरनीय अशोक जी, सादर प्रणाम आप की वो पोस्ट “अधूरा जिस्म” एक अजन्मी बेटी का अपनी माँ से संवाद और कुछ महत्वपूर्ण सवाल थे बहुत ही मर्मस्पर्शी कविता है वो आप कि आप का हृदय से आभार

अजय कुमार झा के द्वारा
May 12, 2012

भावुक करती पोस्ट । जिनके पास मां नहीं है वो इस नियामत का मोल जानते हैं , और उनमें से ही एक हम हैं । सार्थक पोस्ट

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    की कहीं यह आपकी किसी बचपन की शरारत से सम्बंधित तो नहीं है

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    जब मैं पहली बार मंच से जुडी थी तभी आप की पोस्ट पढ़ी थी जो माँ को समर्पित थी | माँ का आशीर्वाद और प्यार तो सदा ही साथ होता है चाहे वो पास हो,चाहे दूर हो | आप का तहे दिल से शुक्रिया

vinitashukla के द्वारा
May 12, 2012

बहुत सी संवेदनाओं को संजोये हुए मर्मस्पर्शी रचना. माँ को खोने का दर्द शायद दुनियां में सबसे बड़ा है!

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    आपकी उस सहेली की समुन्द्र रूपी उस गुप्त डायरी में से आपने कुछेक मोती ही हमारे सामने पेश किये है

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    जिस निश्छल भावना से माँ प्यार देती है वो प्यार कोई नहीं देता है इस लिए माँ का खोने का का दर्द सबसे बड़ा होता है | आप का तहे दिल से शुक्रिया

Piyush Kumar Pant के द्वारा
May 12, 2012

माँ न केवल हमारे मन मे हमेशा रहती है अपितु हमारे अचेतन मे भी माँ ही विराजमान है…….. कोई भले ही इस बात को माने या न माने की वो अपनी माँ को जीवन भर नहीं भुला पाता है……. पर ये सत्य है……. बचपन से उम्र के अंतिम पड़ाव तक भी आदमी ज्यों ही दुख आता है अपनी माँ को याद करता है…… यहाँ तक की छोटी सी चोट भी ऊई माँ का उच्चारण बच्चे से बूढ़े तक के मुह से निकाल देती है……… क्योकि हमारे अचेतन मे ये बात हमेशा रहती है की हमारी चोट केवल माँ के प्रेम से ही ठीक होती है… और दिमाग और मन के कई भाव आदमी भूल जाता है……. पर अचेतन मन मे जो बात रह जाती है सारी उम्र याद आती है………..

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    पता नहीं क्यों मेरी तीसरी आँख मुझसे यह कह रही है की उस डायरी में आप पूरी गहराई में नहीं उतरी है ….. अभी भी उस समुन्द्र की तलहटी में अनेको बेशकीमती नगीने छुपे हुए है जिनको की आपने हमसे छुपा लिया है

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    बिलकुल सही कह रहे है आप अचेतन मे जो बात रह जाती है वो सारी उम्र याद रहती है | माँ का ही अंश है तो माँ को तो अचेतन सचेतन कैसे भी हो माँ साथ ही रहती है सदा हमारे ………………. आप का ह्रदय से आभार

Abhinav Srivastava के द्वारा
May 12, 2012

दुनिया में हर तलाश पूरी हो जाती है …..पर खोये हुए माता-पिता नहीं मिलते…. मर्मस्पर्शी रचना….

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    क्या आपकी उस डायरी तक पहुँच की जानकारी आपकी सहेली को है

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    अभिनव जी बिलकुल सच है ये की माता पिता के चले जाने के बाद उस स्थान को कोई और नहीं भर सकता | आप का तहे दिल से शुक्रिया

pritish1 के द्वारा
May 12, 2012

मुझे अच्छा लगा……….मैं जागरण junction मैं नया हूँ……..मेरे ब्लॉग मैं आपका स्वागत है………..आप मेरी कहानी “ऐसी ये कैसी तमन्ना” पढ़ सकते हैं…………..

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    क्या आपकी पहुँच उस डायरी तक एक सीमित समय के लिए ही हुई थी ?…..

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    प्रीतिश जी आप का स्वागत है मंच मे भी और हमारे ब्लॉग मे भी और अभी देखते है आप कि कहानी को

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
May 12, 2012

माँ आप अपने साथ हर जगह मुझे ले कर जाती थी याद है न चाहे नानी के घर हो या मंदिर या फिर बाजार ही क्यूँ न हो हर वक्त साये कि तरह आप अपने साथ रखती थी फिर क्यूँ इन खौफनाक सायो के बीच मुझे छोड़ के चली गयी हो क्यूँ नहीं अपने साथ ही मुझे भी लेकर गयी | थक गयी हूँ मैं सफर करते करते तेरे आंचल कि छाँव भी नसीब नहीं , भटक गयी हूँ मैं इन भूलभुलैया रास्तों का सफर करते करते मैं अब और सफर नहीं कर पाउंगी दिव्या जी बहुत सुन्दर माँ की ममता का जितना भी गुणगान किया जाए कम है …दिल को छू गयी कहानी मार्मिक भाव .. लेकिन माँ ने जब हौसला बढ़ाया साथ साथ हर जगह ले गयी आदतें डाली आप की… दुनिया से लड़ने की तो ..फिर हताश क्यों होना …आइये धनात्मक रुख रखे संघर्ष करते जीवन का आनंद लें जय श्री राधे भ्रमर ५

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    क्या आपने यह सभी संस्मरण लाइव टेलीकास्ट करते हुए लिखे है ?…..

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरनीय भ्रमर जी, सादर प्रणाम बिलकुल माँ कि महिमा का गुणगान करने के लिए अभी वो शब्द नहीं बने सच जितना कहा जाये कम ही होगा | आज भी मुझे मेरी माँ हर कदम मे हौसला बढाती रहती है उन्होंने हमें विपरीत परिस्थियों से लड़ने का हौसला और मजबूती से खड़े होने का जज्बा कदम कदम मे दिया है आज भी वो अपने आंचल के छाव मे हमें समेटे हुए है और हम जीवन का खूबसूरती से आनंद ले रहे है | सकरात्म उर्जा देने के लिए आप का हृदय से आभार

dineshaastik के द्वारा
May 12, 2012

अभी निशाजी के ब्लॉग  पर रुला देने वाली रचना पढ़कर आया। आपने पुनः अपने ब्लॉग  पर रुला दिया। बहुत ही मार्मिक  रचना।

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    या फिर इनको फ्लैशबैक में जाकर लिख डाला है हम सभी की सेवा में

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरनीय दिनेश जी, सादर प्रणाम आप का तहे दिल से शुक्रिया

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 11, 2012

आदरणीय दिव्या दी, नमस्कार एक तो आप अल्प विराम ले ले कर आतीं है उस पर भी ऐसे रचना को हमारे सामने ला रहीं है की जिसे पढ़ मन उदाश होने लगा………….ठीक नहीं है यह बहुत ही मार्मिक ऐसा लग रहा है की बिलकुल दिल से निकली हुई आवाज़ शानदार रचना क्या कहूँ बस नमन

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    May 11, 2012

    किन्तु इसका शीर्षक मुझे अभी भी समझ में नहीं आया………….

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    आनंद प्रवीन जी, नमस्कार अच्छा लगा दी देख के, पढ़ के घर मे सबसे छोटी हूँ तो दी सुनने को कान तरस गए थे मेरे :) अल्प विराम हम्म अब नहीं होगा ये अल्प विराम अपनी रचन जल्दी ही पोस्ट करने की कोशिश करती हूँ :) आगे से ख्याल रखा जायेगा कि आप का मन उदास न होने लगे …………..ठीक है :) मुक्त कंठ से तारीफ के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    “भीड़ मे गुम एक लड़की की तलाश” ये उस लड़की के दिल के भाव है जिसके माँ बाबा अब नहीं है और जब भीड़ और अपनों मे वो निराश हो जाती है तो वो उस अपनों कि भीड़ मे अपनी माँ को तलाशने , पुकारने लग जाती है | तलाश अपने माँ बाबा की………. आशा है कि अब आप को समझ आ गया होगा अब भी अगर लगता है सही शीर्षक नहीं तो आप ही सुझाना कोई उपयुक्त सा शीर्षक दी का इतना काम तो करोगे :)

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    May 15, 2012

    समझ गया सबकुछ समझ गया……………..बात में गहराई थी और मैं सतह पर खोज रहा था तब समझ में कहाँ से आती बात ………..उपयुक्त शीर्षक और उपयुक्त लेख दोनों एक दुसरे को दर्शाते हुए

shashibhushan1959 के द्वारा
May 11, 2012

आदरणीय दिव्या जी, सादर ! बहुत मार्मिक रचना ! हृदयद्रावक ! भाव जगत की सैर कराता हुआ सा ! बहुत सुन्दर ! हार्दिक बधाई !

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    आपकी इस मार्मिक रचना को पढ़ते ही डर फिल्म के शाहरुख खान की याद हो आई

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरनीय शशि भूषण जी, सादर प्रणाम आप का तहे दिल से शुक्रिया

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 11, 2012

दिव्या जी नमस्कार, आज आपको और निशा जी को क्या हो गया है ? दोनों लोगों ने भावुक करने वाला पोस्ट डाल दिया. आज कोई प्रोग्राम बना लिया था क्या ? कि आज सबको रुलाया जाये. रुलाया ही सही लेकिन सुन्दर प्रस्तुति के साथ. बधाई….

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    शुकर है की आपकी सहेली डायरी में लिख कर बाते करती है मोबाइल से नहीं

    div81 के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरनीय अजय जी सादर नमस्कार, आदरनीय निशा जी और मेरी कोई प्लानिंग नहीं थी बस मदर्स डे में उन को याद करना चाह रही थी जो अपने माँ से बिछड़ के बहुत तन्हां से रह जाते है …………. आप का तहे दिल से शुक्रिया

yogi sarswat के द्वारा
May 11, 2012

दिव्या जी , सादर नमस्कार ! एक दर्द झलकता है , एक हूक उठती है ! माँ क्या होती है ये उनसे पूछे जिनको माँ नहीं मिल पाती ! माँ -इस शब्द में जैसे पूरा संसार समाया हुआ है ! माँ जिसमें पूरी कायनात समाये है ! माँ- जिसमें दुनिया का हर सुख समाया है ! बहुत ही बढ़िया संस्मरण !

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    आपका यह राजकमल भाई तो जन्मजन्मान्तरो का भावो का भूखा है

    div81 के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरणीय योगी जी, सदार नमस्कार !! बिलकुल सही कहा आपने मेरी दोस्त को अक्सर मैंने गुमसुम देखा उसके दर्द तक तो मैं पहुँच नहीं पायी हूँ सिर्फ एक कोशिश भर कि है | आप का तहे दिल से आभार

चन्दन राय के द्वारा
May 11, 2012

दिव्या माँ को समर्पिर बहुत ही मार्मिक आलेख भाव से परिपूर्ण , में भी आपके मंच पर थोडा इसमें स्वर मिला दूँ , मेरे कंठ से फूटता सबसे पुण्य पवन उच्चारण है माँ

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    इन थोड़ी सी यादों से मेरी आत्मा तृप्त नहीं है होने वाली

    div81 के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरनीय चंदन राय जी, सादर प्रणाम आप को मदर्स डे की शुभकामनाये और इस प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

Sumit के द्वारा
May 11, 2012

मदर डे पास है और ऐसे में इतनी भावुक रचना……….आप बधाई की पात्र है

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    आपकी सजा यही है की आप इसका सिक्क्वेल यानी की पार्ट टू भी बहुत ही जल्दी से पेश करें

    div81 के द्वारा
    May 13, 2012

    आप को मदर्स डे की बधाई और साथ ही आप का तहे दिल से शुक्रिया

May 11, 2012

बहुत ही खुबसूरत तलाश दिव्या जी…………………हार्दिक शुभकामनायें.

    div81 के द्वारा
    May 13, 2012

    आप का तहे दिल से शुक्रिया अनिल जी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 11, 2012

snehi divya जी, सादर सुन्दर भाव एवं प्रवाह पूर्ण रचना. जिस चीज से भय लगता है उसका सामना पहले करें. मां का स्थान कोई नहीं ले सकता. उनके आदर्श ही प्रेरक एवं मार्ग दर्शक हैं . बधाई.

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    वैसे माँ का स्थान किसी हद तक सहेली या फिर बड़ी बहिन ले सकती है

    div81 के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी  सादर प्रणाम,  बिलकुल सही बोल रहे है आप जिस चीज से डर लगता है उसका सामना पहले करना चाहिए क्यूंकि डर के आगे जीत है :) माँ का स्थान कोई नहीं ले सकता उनके आदर्श ही प्रेरणा देते रहे है और आगे भी माँ प्रेरणा देती रहेंगी | आप का तहे दी से शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
May 11, 2012

अरे दिव्या इतनी भावुक प्रस्तुति जिसने रुला दिया.

    rajkamal के द्वारा
    May 12, 2012

    आप अपनी उस सहेली को उसको इस लेख पर आये हुए कमेन्ट जरूर पढ़वाए

    div81 के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरनीय निशा जी, सादर प्रणाम आपने खुद भावुक रचना पोस्ट करी है जिसको पढ़ के मैं खुद रो गयी थी | आप का शुक्रिया


topic of the week



latest from jagran