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इश्क कि दास्तान है प्यारे

Posted On: 10 Feb, 2013 Others में

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इन दिनों वो अपने आस पास रेशम बुनने लगी थी | बहुत ही महीन मगर चमकीली, हर समय बस एक ही धुन सवार हो गयी थी उस को रेशम बुनने कि | जहाँ भी वो रहती बस रेशम के धागों में उलझी हुई रहती |
कई कई बार वो घायल हो जाती, मगर वो रेशम बुनने में ही तल्लीन रहती उसके घायल मन से बना रेशम बहुत ही खूबसूरत होता |

वो पहले ऐसी नहीं थी | कितना तो काम होता था उसके पास, उसकी होड थी सब से आगे निकलने कि तो उस सूरज के निकलने से पहले उसको जागना होता था कहीं वो सूरज, न जीत जाए उससे, सूरज अपनी लालिमा से सुबह को सराबोर करे उससे पहले ही वो उठ के सारे आंगन को बुहार देती थी | कच्ची मिटटी कि सुगंध से सुबह भी अलसाई सी उठ जाती थी |
पंक्षियों के प्रथम सुर के छिड़ने से पहले ही वो अपना मधम सुर में राग छेड़ देती थी पंक्षी भी जाग जाते थे उसको सुन कर और साथ देने के लिए कोरस में तान छेड़ देते थे | पगडंडियाँ दिन भर कि चहल कदमी से थकी हारी सी उठ भी नहीं पाती थी कि वो पनघट से लाते हुए गागर को छलका के उसको जगा देती थी |
दिन दौड़ता रहता उसको हराने के लिए और वो तेज दौड़ती रहती जीत जाने के लिए रूकती थी तो बस …. चाँद से उसके किस्से सुनने के लिए
एक दिन चाँद ने उसको इश्क कि दास्ताँ सुनाई, चाँद नहीं चाहता था उसको इश्क के बारे में कुछ कहे मगर लड़की कि जिद्द थी कि कोई ऐसी दास्ताँ सुनाओ आज कि लम्हा भी ठहर जाए और शब गुजर जाए | चाँद हंसा उसकी नादानी पर…. चाँद ने कहा ऐसे किस्से सुन के मन बोझल हो जाया करते है | क्या करोगी बोझ दिल में लेकर कहीं रोग लग गया तो देखो कल का सूरज तुम से जीत जाएगा मगर लड़की ने ठान लिया था आज कुछ ऐसा सुनेगी कि दिल कि धडकनों को वो रगों में महसूस करेगी, अल्हड सी वो अपने में मस्त ….. चाँद नहीं चाहता था वो इश्क में उलझे, मगर लड़की के आगे चाँद कि एक न चली ….

चाँद ने किस्सा गढना शुरू किया ………….. इश्क का किस्सा………………………. कि इश्क दिखने में भोलाभाला था मासूम बिलकुल नादान जो भी देखे उसको चाहने लगे मगर इश्क जितना भोला था उतना ही वो सरफिरा भी था | वो वहाँ होना चाहता था जहाँ कोई उसको पूछे न मगर जहाँ भी वो जाता लोगो के दिलो में चाहतें पैदा हो जाती, कुछ पल वो खुश होता इत्ती सारी चाहतो को देख के मगर फिर वो अनमना सा हो के रूठ जाता और चला जाता वहाँ से दूर किसी देश, मगर चाहतें उसी का जैसे इन्तजार कर रही होती ।
एक दिन इश्क ने चाहत से पूछ लिया कि क्यूँ तुम मेरा पीछा करती हो ?
चाहत हंसी और बोली जो जीने कि वजह हो उनसे दूर कैसे रहा जा सकता है, इश्क हैरान था …..हैरान इश्क को देख के चाहत मुस्कुरा पड़ी लम्हों कि बात थी कुछ हलचल सा हुआ दिल में और इश्क के दिल में चाहत कि मुस्कान उतर गयी, इश्क चुप सा हो गया ।
चाहत इश्क कि चुप्पी देख के उदास हो गयी, इश्क को अच्छा नहीं लगा चाहत का उदास चेहरा दोनों को एक दूसरे कि उदासी खलने लगी थी
इश्क और चाहत अब गहरे दोस्त हो गए थे इश्क चाहत के ही इन्तजार में रहने लगा था और चाहत खुश रहने लगी थी |
चाँद ने देखा, लड़की खोयी हुई है उसकी कहानी में और उधर सुबह ने पहली दस्तक दे दी थी ।
आज लड़की हार गयी सूरज से सुना नहीं पंक्षियों ने भी कोई सुर नया और पगडंडी भी बाट जोहती रही उस पगली का और वो लड़की रात से रेशमी ख्वाब बुनने जो बैठी अब तक उन्ही रेशमी ख्यालो में उलझी हुई थी |
चाँद को इन्तजार रहता है उस लड़की का, अपनी गलती का शिद्दत से एहसास है चाँद को, वो मायूस है मगर लड़की घायल है इश्क के इन्तजार में फिर भी बुन रही है वो रेशमी ख्वाब | girlspaholfingspamoon



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38 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dhavlima Bhishmbala के द्वारा
February 24, 2013

दिव्या जी, आज पहली बार आपके मंच पे आयी हूँ और आपके रेशमी ख़्वाब ने मुझे आकर्षिक किया | रेशम की ही भांति बहुत ही सरल, सहज शब्दों में रेशम की कोमलता को आपने अपनी लेखनी में जीवित रखा | बहुत=बहुत हार्दिक बधाई |

    div81 के द्वारा
    March 6, 2013

    धविलिमा जी, सादर आप का मंच में स्वागत है, साथ ही मेरे ब्लॉग में भी | आप की प्रतिक्रिया भी रेशमी अहसास लिए हुए सरल सहज दिल को छू लेने वाली :) आप का तहे दिल से शुक्रिया

allrounder के द्वारा
February 21, 2013

नमकार दिव्या जी, आपके सुन्दर लेखन से सजी दास्ताने इश्क के लिए हार्दिक बधाई आपको !

    div81 के द्वारा
    March 6, 2013

    सचिन जी, मंच पर आप का फिर से स्वागत है आप का तहे दिल से शुक्रिया

vinitashukla के द्वारा
February 20, 2013

कोमल भावनाओं की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति,. अच्छी पोस्ट पर बधाई.

    div81 के द्वारा
    March 6, 2013

    आदरणीया विनीता जी, लंबे अंतराल के बाद आप की प्रतिक्रिया प्राप्त हुई अच्छा लगा :) आप का तहे दिल से शुक्रिया

Santlal Karun के द्वारा
February 20, 2013

आदरणीया दिव्या जी, आप ने कथ्य, शैली, और  प्रस्तुति की नवीनता तथा कथा में अनुस्यूत ‘रेशमी ख़्वाब’ से बुने ‘इश्क’ से प्रक्षेपित सन्देश को बड़ी संजीदगी से अभिव्यक्त किया है | इसमें पाठक आरम्भ से अंत तक बँधा रहता है | हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    div81 के द्वारा
    March 6, 2013

    आदरणीय संतलाल करुण जी,  सादर प्रणाम आप का तहे दिल से शुक्रिया

Malik Parveen के द्वारा
February 20, 2013

दिल को छूने वाली दास्तान … बधाई हो दिव्या …

    div81 के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरणीया परवीन जी, लिखना सार्थक हो जाता है जब वो किसी के दिल तक दस्तक दे देता है …….. हमारा शुक्रिया काबुल कीजिये :)

seemakanwal के द्वारा
February 18, 2013

तुझे बुलाओं ,की तेरा इंतजार करूं .. उलझ रहा है मेरे फैसलों का रेशम . मखमली अहसासों से बुनी खुबसूरत दास्ताँ . नवाजिश

    div81 के द्वारा
    February 20, 2013

    सीमा जी, वाह बहुत ही खुबसूरत शे’र इस प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का शुक्रिया मेहरबानी करम …. :)

sinsera के द्वारा
February 18, 2013

इश्क ने दिव्या निकम्मा कर दिया, वर्ना वो भी लड़की थी काम की……

    div81 के द्वारा
    February 20, 2013

    सच्ची न :) प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

आर.एन. शाही के द्वारा
February 17, 2013

इश्क़ और चाहत एक दूसरे के पूरक होते हैं दिव्या जी । यह अलग बात है कि हर जगह दोनों का मिलन हो ही जाय, इसकी कोई निश्चितता नहीं होती । परन्तु जहाँ कहीं भी दो प्रेमियों का मिलन दिखाई देगा, वहाँ चाँद और चाँदनी की भाँति ही इश्क़ और चाहत दोनों का वज़ूद में रहना निश्चित है । बिना चाहत के इश्क़, अथवा बिना इश्क़ के चाहत का वज़ूद सम्भव ही नहीं है । उम्मीद है यहाँ आप मुझसे सहमत होंगी । यदि कोई तर्क़ हो तो अवश्य दें ।

    div81 के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरणीय शाही जी,एक बार फिर से आप का स्वागत है :) इश्क वो शै है कि जिसमे हजारों चाहते कुर्बान की जा सकती है | यहाँ तक कि जान तक कि कुर्बानी के किस्से आपने भी सुने होंगे | चाहते भौतिक वस्तुओ की होती है मगर इश्क आत्मा से आत्मा का और आत्मा से परमात्मा का मिलन है | इश्क रूहानी शै है और चाहत भौतिक चाहत में पाना, चाहना, अपेक्षा, उम्मीद आ जाती है, वहीँ इश्क में “तेरा तुझ को अर्पण वाले भाव उपजते है  |

akraktale के द्वारा
February 15, 2013

सुन्दर और भावनात्मक प्रस्तुति बधाई दिव्या जी.

    divya (div 81) के द्वारा
    February 17, 2013

    आदरणीय अशोक जी मेरी कोशिशो को सहारना के लिए आप का ह्रदय से आभार

alkargupta1 के द्वारा
February 14, 2013

दिव्या जी बहुत ही प्यारी से खूबसूरत अप्रतिम रचना के लिए बधाई

    alkargupta1 के द्वारा
    February 14, 2013

    कृपया ‘से’ को ‘सी’ पढ़ें

    divya (div 81) के द्वारा
    February 17, 2013

    आदरणीया अलका जी, साधारण सी रचना को अप्रतिम और खूबसूरत कह के आप ने जो हौला बढ़ाया है उसके लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 11, 2013

स्नेही दिव्या जी, सादर एक नया अंदाज बधाई.

    div81 के द्वारा
    February 13, 2013

    आदरणीय चाचा जी, सादर प्रणाम अब क्या कहूँ , :) आप का ही आशीर्वाद है , आप का ह्रदय से आभार

yogi sarswat के द्वारा
February 11, 2013

बहुत सुन्दर ! काश !उसके रेशमी ख्वाबो को एक मंजिल मिल जाये ! शब्दों के संसार से निकली हुई बहुत ही सुन्दर कथा ! सुंदर अभिव्यक्ति

    div81 के द्वारा
    February 13, 2013

    आदरणीय योगी जी, सादर काश ऐसा ही हो :) ……. हौसलाफजाई के लिए आप का ह्रदय से आभार

nishamittal के द्वारा
February 11, 2013

वाह दिव्या सुन्दर अनुभूति को व्यक्त करती रचना पर बधाई.

    div81 के द्वारा
    February 13, 2013

    आदरणीया निशा मैम, :) ये आप के वाह के लिए और आप का ह्रदय से आभार आप कि सरहना और बधाई के लिए :)

Rachna Varma के द्वारा
February 11, 2013

काश !उसके रेशमी ख्वाबो को एक मंजिल मिल जाये सुंदर अभिव्यक्ति

    div81 के द्वारा
    February 13, 2013

    आदरणीया रचना जी,  अभी तो ख्वाब बुनना शुरू किया है उस लड़की ने उम्मीद है मंजिल भी मिल ही जायेगी   :) प्यारी सी टिप्पणी के लिए आप का ह्रदय से आभार

shashi bhushan के द्वारा
February 11, 2013

आदरणीय दिव्या जी, सादर ! बहुत खूब ! बेहतरीन ! एक दिल छूने वाली रचना !

    div81 के द्वारा
    February 13, 2013

    आदरणीय शशि भूषण जी, सादर प्रणाम सराहना के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

omdikshit के द्वारा
February 10, 2013

दिव्या जी, नमस्कार. आप के शब्दों ने ‘चाँद. को ‘चाहत’ के ‘इश्क’ में ऐसा बांध दिया है कि ‘चाँद’ को अपनी ‘चांदनी ‘ से बेवफाई करनी ही पड़ेगी .बहुत ही प्रशंसनीय प्रवाह .

    div81 के द्वारा
    February 13, 2013

    आदरणीय दीक्षित सर, सादर प्रणाम सर चाँद तो किस्सा गढ़ रहा था….. चांदनी से बेवफाई नहीं कि चाँद न जरा भी :) सच्ची प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का ह्रदय से आभार

chaatak के द्वारा
February 10, 2013

लडकी उदास है लेकिन मायूस न हो, वो रश्मियों से अठखेलियाँ करती रहे और इसी तरह रेशमी ख्वाब बुनती रहे! सभी ना सही कुछ रेशमी स्पर्श जरूर उसके हिस्से में आयेंगे| विचारो के इस अविरल प्रवाह को पढ़कर अच्छा अहसास हुआ!

    jlsingh के द्वारा
    February 10, 2013

    चातक जी, नमस्कार! आपने बड़ी सधी हुई टिप्पणी दी है! काश कि ऐसा ही हो! किसी का ख्वाब न टूटे चाहे वह मखमली, या रेशमी अहसास वाला हो!

    chaatak के द्वारा
    February 10, 2013

    स्नेही जे.एल.सिंह जी, सादर नमस्कार, टिप्पड़ी पर आपकी सकारात्मक राय से हार्दिक प्रसन्नता हुई!

    div81 के द्वारा
    February 13, 2013

    आदरणीय चातक जी, बहुत ही प्यारी और उम्मीदों भरी टिप्पणी के लिए आप का ह्रदय से आभार ………………….. वो मायूस है चाँद के लिए है ) लड़की उदास है मगर नाउम्मीद नहीं उसको इन्तजार है  ………. :)

    div81 के द्वारा
    February 13, 2013

    आदरणीय भाई साहब, नमस्कार काश ऐसा ही हो किसी का कोई ख्वाब न टूटे ….. आप का शुक्रिया


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