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प्यार से जियो और जीने दो

Posted On: 6 Mar, 2013 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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पश्चिमी दिखावा कहे या पश्चिमी चलन हर किसी बात के लिए एक दिन निश्चित कर दिया जाता है | वेलेंटाइन डे, मदर्स डे, फादर्स डे फ्रेंडशिप डे अलाना फलाना ढीमकाना डे भाई मेरी याददाश्त इन डे को याद रखने मे जरा कमजोर है तो इस अलाना फलाना ढीम काना मे आप को जो उचित डे लगे रख लीजिएगा
मैं अक्सर बात करते करते विषय से भटक जाती हूँ इस लिए ये मैं शुरुवात मे ही बता रही हूँ जिस टॉपिक से शुरुवात की है अंत भी उसी मे हो इसकी उम्मीद मत कीजियेगा
हां तो मैं इस पश्चिमी देन डे’ज की बात कर रही थी
इस विषय मे तो मैं सिर्फ एक डे को ही मानती और मनाती हूँ और बेसब्री से इंतजार भी करती हूँ पूरे साल उस एक दिन का खूब सारे गिफ्ट मिलते है| गलत अंदाजे मत लगाइए, ये मैं अपने जन्म दिवस बर्थ डे के विषय मे बोल रही हूँ | साल मे एक ही बार आता है तो इसी को मानना अच्छा भी लगता है वैसे यहाँ भी मैं थोड़ा अलग विचार रखती हूँ……………… अरे कभी भी सेलिब्रेट कीजिये इस दिवस को साल मे एक ही बार क्यूँ हर महीने को वो खास तारीख आती ही है न तो हर महीने उस तिथि को मानिए
सच मैं तो चाहती हूँ हर माह को अपना जन्मदिन मनाऊं मगर मेरी इस बात को सभी सिरे से ख़ारिज कर देते है जानती हूँ सब मतलबी गिफ्ट न देना पड़े तो बच रहे है | खैर जाने दीजिए नाराज़ क्यों हो रहे हो आप लोग,… कहा था न विषय से भटक जाती हूँ |
मेरी आदत है छोटी छोटी बातों मे खुश हो जाने की, कोई अगर नया पेन भी खरीदता है तो मैं इस खुशी मे भी पार्टी की डिमांड कर देती हूँ अब इस डिमांड को कोई विरला दिल वाला ही पूरा करता है वो अलग बात है |
मैं एक ज्ञानी जी से (ये शाही जी वाले ज्ञानी नहीं है अभी तक उनके दर्शन प्राप्त होने का सौभाग्य हमें नहीं मिला है ) ये ही बात बोल रहे थे कि ये डे मनाये जा रहे है तो इनका ओचित्य क्या है
तो ज्ञानी जी लगे अपने ज्ञान का बखान करने कि कोई एक खास दिन मनाने से उस व्यक्ति के प्रति अपनी भावनाये प्रदर्शित कि जाती है इससे दूसरे इंसान को आप के दिल मे क्या है पता चल जाता है…………
हमारी उन ज्ञानी जी से बहस हो गयी
ये सब तो फ़िजूल है क्या अपनी माँ को प्यार प्रकट करने का, आभार प्रकट करने का पूरे साल मे एक ही दिन निकलेगा या अगर किसी से प्यार हो जाए (लव एट फ़र्स्ट साइड वाला) तो वो पूरे साल अपनी भावनाओं को दबाये रखे कि भैय्या फलां दिन निश्चित है तो फलां दिन ही इजहारे मोहब्बत करेंगे या ये भी नहीं तो दो प्रेमी युगल पूरे साल तो चुप बैठे रहे और एक ख़ास दिन ही अपनी भावनाओं का आदान प्रदान करे |
मुझे ये बात समझ नहीं आती कि पूरे साल भर लड़ो मरो और एक रोज डे को जा कर फूल थमा दो
प्यार है तो है इसमें कोई ख़ास दिन चुन कर भावना का प्रदर्शन हो वो दिखावा ही हुआ न ………………… लीजिये मदर्स डे आ गया अम्मा आज हम बताते है आप कित्ता कुछ किये हो हमारे ख़ातिर ये लो इन सब के लिए तुच्छ सा तोहफ़ा
अरे साहब क्या पूरे साल इस मिश्री मिली बोली को नहीं अपनाया जा सकता ? ? क्या पूरे साल माँ के लिए छोटी मोटी तुच्छ भेंट नहीं लायी जा सकती ???? क्या पूरे साल उनको उनके किये के लिए आभार प्रकट नहीं किया जा सकता |
सच्चा प्यार और सच्ची भावनाए दिखावे की मोहताज नहीं होती है | साफ़ सीधे लफ्जो में कहे तो भावनाएँ एक दिल से दूसरे दिल तक बिना किसी दिखावे के पहुँच जाती है और ये जो माँ है न वो तो आप से सोते हुए चेहरे को देख के भी आप के दिल की बात पढ़ने का माद्दा रखती है फिर उसके पास जा कर एक जादू कि झप्पी दे दोगे बिना दिखावे के, बिना किसी बनावटी शब्दों के सिर्फ “माँ” भी कह दोगे न वो सब समझ जायेगी की आप अपना प्यार आभार प्रकट कर रहे हो सच्ची फिर देखना माँ प्यार से हाथ फेर के कहेगी “पगले”
माँ, सब समझती है रे
और प्यार सच्चा हो तो वो तो अपने आप को मनवा ही लेता है | उसमे दिखावे की जरूरत नहीं पड़ती |
इस ही तरह से कुछ सालो से महिला दिवस के भी खूब चर्चे सुनते आ रहे है आ गया आठ मार्च तो हल्ला होना शुरू हो जाता कि महिलाओं के प्रति आदर सत्कार की प्रक्रिया तेज हो जाती हर कोई महिलाओं के सम्मान मे दो शब्द बोलने से नहीं चूकता ………… सभी महिलाओं का इतना मान सम्मान आदर सत्कार कर रहे हो तो भैय्या ये भी बता ही दो कि अपमान कौन कर रहा है, कौन है जो महिलाओं से चिढता है, किस को एतराज होता है महिला बोस के साथ काम करने मे, कौन है वो जो लड़कियों की ड्राइविंग सेंस कि हँसी उड़ा के चला जाता है, वो कौन है जो महिलाओं से त्रस्त रहता है,
पिछले साल महिला दिवस मे मेरी और हमारे मित्र के बीच गलतफहमी हो गयी थी बात दोनों एक ही बोल रहे थे बस कहने का अंदाज अलग था | मेरा मानना ये है कि महिला दिवस मे चंद गिनी चुनी सक्सेसफुल महिलाओं का महिमा मंडित कर देने भर से या लिपि पुती महिलाओं का गुणगान कर देने भर से क्या महिलाओं कि स्थिति सुधर जायेगी |

पुरस्कार की हकदार तो ये भी है मगर इन्हें पूछेगा कौन

पुरस्कार की हकदार तो ये भी है मगर इन्हें पूछेगा कौन

जाकर उन महिलाओं से पूछिए जो अपने बच्चो का पेट भरने के लिए दिन भर मजदूरी करती है, या उन महिलाओं से पूछिए जिनका पति उनको मारता है पिटता है, या उन महिलाओं से जो रास्तों मे, घर मे अपने को सेफ नहीं समझती डर सताता है | इतने आंकड़े बनते जा रहे है महिलाओं के साथ अपराध के, कहीं अगला नाम उसका, उसकी बेटी का उसकी बहन का तो नहीं |

महिला दिवस मे मान सम्मान अधिकार की बात करके बात खत्म हो जाती है अगर सच मे महिलाओं को मान सम्मान सत्कार करना है राह चलती उन महिलाओं का कर लो, जिनको अकेले देख के हर कोई उसको अपनी जागीर समझने लगता है, उन महिलाओं को पूछ लो जो दिन रात तुम्हारे घर में खटती रहती बिना किसी शिकन के लाये उनको सही हक और अधिकार दे दो , उन लड़कियों को जिंदगी दे दो जिनके आने से पहले ही उसको भ्रूण में ही मार देते हो ……………. लिस्ट लंबी हो जायेगी शोर्ट में कहूँ तो हर महिला मान सम्मान अधिकार का हक रखती है |
इन दिवस को मनाना मेरे नज़रिये से तो फिजूल ही है सिर्फ एक दिन मान सम्मान देना प्रदर्शन करना कि माँ तुम ही हो, प्रिय तुम ही हो या महिलाओं तुम ही हो अरे हर दिन हर पल सब यूँ ही आदर सम्मान सत्कार दीजिए हर पल प्यार से जियो और जीने दो | मेरी नजर मे फिर इन दिखावा करने वाले दिवस कि जरूरत नहीं होगी |



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37 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Hessy के द्वारा
October 17, 2016

Gee whiz, and I thouhgt this would be hard to find out.

akraktale के द्वारा
March 16, 2013

आदरणीया दिव्या जी सच है एक दिन के फूल तोहफों से दिन को विशेष बना देने से कुछ बदलने वाला नही है. मगर यह दिन मनाने के पीछे की भावना यह है की समाज पहचाने की वह कहाँ भूल कर रहा है और उसे सुधारे. किन्तु समाज उस हकीकत को लगातार नजरअंदाज करता ही नजर आ रहा है. बस एक दिन मनाया और हो गया उसकी भावना को कौन निहारता है?   सुन्दर आलेख बधाई.

seemakanwal के द्वारा
March 15, 2013

सार्थक लेखन के लिए साधुवाद .

aman kumar के द्वारा
March 13, 2013

तो हर महिला मान सम्मान अधिकार का हक रखती है | सारा मर्म है एस पख्ती मे , दिवस कोई सा भी हो उसकी मूल भावना को तो रोज़ ही मानना चहिये ! सुंदर लेख के किये बधाई !

    div81 के द्वारा
    March 13, 2013

    अमन कुमार जी,  बिलकुल दिवस कोई भी हो मूल भावना का रोज को मानना मनाना जरुरी है , एक दिन के हो हल्ले के बाद सब कुछ भुला दे से कुछ नहीं होने वाला आप का मंच और ब्लॉग में स्वागत है आप का तहे दिल से शुक्रिया

sachinkumardixitswar के द्वारा
March 12, 2013

अलाना फलाना ढीमकाना डे हो या फिर …मुझे ये बात समझ नहीं आती कि पूरे साल भर लड़ो मरो और एक रोज डे को जा कर फूल थमा दो प्यार है तो है इसमें कोई ख़ास दिन चुन कर भावना का प्रदर्शन हो वो दिखावा ही हुआ न ………………… लीजिये मदर्स डे आ गया अम्मा आज हम बताते है आप कित्ता कुछ किये हो हमारे ख़ातिर ये लो इन सब के लिए तुच्छ सा तोहफ़ा अरे साहब क्या पूरे साल इस मिश्री मिली बोली को नहीं अपनाया जा सकता ? ? क्या पूरे साल माँ के लिए छोटी मोटी तुच्छ भेंट नहीं लायी जा सकती ???? क्या पूरे साल उनको उनके किये के लिए आभार प्रकट नहीं किया जा सकता |… बहुत अच्छा लगा पढ़ के , और अलाना फलाना से तप भारतेन्दुजी की याद दिला दी आपने …. बहुत बहुत धन्यवाद आपका इतना अच्छा लिखने के लिए ….

    div81 के द्वारा
    March 13, 2013

    सचिन जी,  मंच में और हमारे ब्लॉग में आप का स्वागत है इतनी अच्छी प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

allrounder के द्वारा
March 11, 2013

नमस्कार दिव्या जी…… सही कहा आपने महिला के प्रति हमारे समाज मैं दोहरे मापदंड अपनाए जाते हैं, महिला दिवस घोषित कर देने से ही महिला के सम्मान की इतिश्री नहीं हो जाती बल्कि समाज के हर वर्ग मैं महिला के प्रति दिल मैं सम्मान होना चाहिए जिससे महिलायें भी आज के माहौल मैं भयमुक्त जीवन जी सकें ! अच्छे आलेख पर हार्दिक बधाई आपको !

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    नमस्कार सचिन जी,…  एक बेहतर समाज के लिए जरुरी है महिलाओं का आदर सम्मान किया जाए और समाज के हर वर्ग की महिलाये इन सम्मान की हकदार है … आपके कीमती समय और बेशकीमती समर्थन के लिए आप का ह्रदय से आभार

Rachna Varma के द्वारा
March 10, 2013

नारी का सम्मान हर दिन हो हर प्रकार की नारी का हो यह जरुरी है और हाँ मेरी बेटी भी यही चाहती है कि हर महीने उसका बर्थ डे मनाया जाये साल में एक बार क्यों ? बहुत बढ़िया लेख !

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    बिलकुल हर एक महिला सम्मान की हकदार है एक दिवस में दोल पीटने से कुछ नहीं होने वाला आप बेटी से कहियेगा की हम उनके साथ है दोनों एक साथ सेलिब्रेट करेंगे  :) प्रतिक्रिया के लिए आप का ह्रदय से आभार

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 10, 2013

कदापि नहीं ! इसकी संख्या शतप्रतिशत करनी होगी तभी यह दिवस सफल माना जाएगा ! तब प्रश्न उठता है ऐसा होगा कैसे ? क्या पुरुषों के पौरुष के सहारे ? वो तो कबको लांछित हो चुका है | यह काम तो स्त्री के स्त्रीत्व से ही संभव है ! मेरा कहना है कि स्त्रीयां अपने स्त्रीत्व को पहिचाने ! उनपर आरोपित कुछ स्त्रीयोचित रूढ़ियों को सर्वथा त्याग करने की आवश्यकता है ! शेष कभी विस्तार से !हार्दिक आभार !

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    आदरणीय आचर्य जी,  सादर प्रणाम आप की बातों से सहमत हूँ मेरा मानना भी यही है की इन दिवस का औचित्य कुछ नहीं है हमको अपनी शक्ति पहचाननी होगी | अपनी स्त्रियोचित शक्ति के साथ आगे बढ़ना होगा मान सम्मान करवाना होगा उन से जिनकी नजर में महिलाये सिर्फ बाजार की वस्तु कि तरह हो गयी है और ये स्त्रियों के स्त्रीत्व से ही सम्भव है | आप का ह्रदय से आभार

mayankkumar के द्वारा
March 9, 2013

पठनीय लेख, आपकी भावनाओं का ह्रदय से स्‍वागत, ऐसे ही विचारणीय और अनुकरणीय लेखों को समाज के सामने लाती रहें, साधुवाद व धन्‍यवाद , हमारे ब्‍लॉग पर भी पधारें ।

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    मयंक कुमार जी, हमारे ब्लॉग में आप का स्वागत है प्रतिक्रिया के लिए आप का ह्रदय से आभार ….

roshni के द्वारा
March 9, 2013

दिव ji saal me ek baar मनाये जाने वाले इस दिन के ऊपर सही प्रश्न लगाया अपने .. सहमत हूँ आपके इस लेख से बहुत बढ़िया आभार

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    रौशनी जी,  आपके कीमती समय और बेशकीमती समर्थन के लिए आप का ह्रदय से आभार

yogi sarswat के द्वारा
March 8, 2013

किसी ने इसी सन्दर्भ में लिखा की हम कुछ जानी पहिचानी शख्सियतों का नाम लेकर महिलाओं के बढ़ते कदम की ओर इशारा करते हैं और बड़े गर्व से कहते हैं की महिलाएं आगे आ रही हैं ! आ रही हैं ! सच है ! लेकिन , क्या महिलाएं सच में आगे आ रही हैं ? मैंने नहीं देखा की जब किसी बेटी या बहन की आबरू लुट रही होती है तो वो आगे आती हों ? मुझे नहीं दीखता की जब देश पर आंच आती है तो वो आगे आती हैं ? तमाशा देखते हैं हम सब ! महिला भी और पुरुष भी ! शायद मैं भी और शायद आप भी ! कल को मीरा कुमारया किसी और को महिला शक्ति के नाम पर पुरस्कार दीजियेगा , उसी समय उत्तर प्रदेश या बिहार या हरियाणा के किसी शहर में या किसी गाँव में किसी लड़की का शरीर नोचा जा रहा होगा ! पुलिस रिपोर्ट न लिखने का कह रही होगी और कोई महिला देश का चेहरा बनकर टीवी पर चमक रही होगी ! किसका महिला दिवस दिव्या जी , कैसा महिला दिवस ? चोचले हैं ये सब ! सिर्फ नॉक्रि करके ज्यादा पैसा बना लेना या बिज़नस संभाल लेना नारी शक्ति का प्रतीक नहीं हो सकता ! नारी शक्ति का प्रतीक तब होगा जब हर नारी रात के २ बजे भी अकेली अपने घर को जा सकेगी , तब कहियेगा की आज , नारी दिवस है ! तब कहियेगा की आज महिला दिवस है ! मैं us दिन खुश होकर मिठाई बाटूंगा , दिए जलाऊंगा ! तब मैं भी कहूँगा की हाँ , आज महिला दिवस है ! और तब शायद ये झूठे दिवस मनाने की या कहने की जरुरत ही न रहे !

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    योगी जी आप का आक्रोश जायज है मैं भी यही कहना चाह रही हूँ कि सिर्फ गिनी चुनी महिलाओं का गुणगान कर देने भर से, महिला सशक्तिकरण का नारा लगा देने भर को हम नारी शक्ति नहीं कह सकते | जब तक हर महिला बेख़ौफ़ हो के घर समाज में अपनी सकरात्म भागीदारी नहीं निभाएगी तब तक तो महिला दिवस मजाक की तरह ही लगेगा | आप की विस्तृत टिप्पणी के लिए आप का ह्रदय से आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 7, 2013

में हाँ करता हूँ वो ना करता है नारी खटती पुरुष भी खटता है जाने कौन दिवस ये रचता है सभी सामान सम्मान के अधिकारी नारी सबला काहे कहो बेचारी हर चीज पे राजनीति भारी दिवस और लेख पर हार्दिक शुभ कामनाएं , बधाई.

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    आदरणीय चाचा जी (डॉ तुकबंद)   :) सादर प्रणाम बहुत प्यारी रचना, …. इस प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आप का ह्रदय से आभार

Malik Parveen के द्वारा
March 7, 2013

वाह दिव्या क्या कमाल किया है ….. हर बार ये कहकर की टॉपिक से भटक जाती हूँ और उस टॉपिक का वास्तविक महत्व क्या है ये भी बखूबी समझाया है …. सही कहा आपने प्यार और सम्मान दर्शाने के लिए एक ही दिन क्यूँ हर दिन क्यूँ नहीं … अगर सम्मान दिल से है तो हर दिन क्यूँ नहीं दर्शाया जा सकता … हाँ अगर सिफ एक औपचारिकता है तो फिर दिन ही सही रहेगा क्यूंकि इतने संस्कार तो सभी को मिले ही होंगे की एक दिन धन्यवाद जैसा शब्द झोली में दाल ही सके फिर चाहे साल भर प्यार और सम्मान की एक नज़र भी न दें ….. बहुत खूब … बधाई !

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    परवीन मैम सदार प्रणाम सम्मान आदर दिल से हो तो द्र्श्ये जायेंगे न यहाँ तो सिर्फ प्रदर्शन की चीज बन गया है महिला दिवस में सम्मान और आदर का प्रदर्शन कर दिया हो गई खानापूर्ति बाकी दिन जय राम जी की …. :) आपके कीमती समय और बेशकीमती समर्थन के लिए आप का ह्रदय से आभार

nishamittal के द्वारा
March 7, 2013

दिव्या सही कहा तुमने ,दिवस का तामझाम फैलाना ,एक दिन महिला दिवस के नाम पर शेष दिन और यहाँ तक कि उस दिन भी उसको हीन समझना एक मजाक के अतिरिक्त कुछ नहीं /उसको तो जीने का ही अधिकार नहीं तो उसका दिवस कैसा

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    आदरणीया निशा मैम सादर प्रणाम महिला शक्ति संपन्न है,  न तो उसको सहारे की जरूरत है न ही किसी दिवस की बस पुरुष मानसिकता हमेशा महिलाओं की शक्ति और क्षमता से डरा रहता है तो उसको दबाने के लिए अपने बल का प्रयोग करता है या ऐसे दिखाओ का की महिलाओं को छला जा सके ……………… बस उसी दिखावे का नतीजा ये दिवस है  एक दिन सम्मान का दावा करके अगले ही दिन या उसी दिन अपने घर में उसकी इज्जत कि धज्जियां उड़ा दी जाती है ….  आपके कीमती समय और बेशकीमती समर्थन के लिए आप का ह्रदय से आभार

jlsingh के द्वारा
March 7, 2013

महिला दिवस मे मान सम्मान अधिकार की बात करके बात खत्म हो जाती है अगर सच मे महिलाओं को मान सम्मान सत्कार करना है राह चलती उन महिलाओं का कर लो, जिनको अकेले देख के हर कोई उसको अपनी जागीर समझने लगता है, उन महिलाओं को पूछ लो जो दिन रात तुम्हारे घर में खटती रहती बिना किसी शिकन के लाये उनको सही हक और अधिकार दे दो , उन लड़कियों को जिंदगी दे दो जिनके आने से पहले ही उसको भ्रूण में ही मार देते हो ……………. लिस्ट लंबी हो जायेगी शोर्ट में कहूँ तो हर महिला मान सम्मान अधिकार का हक रखती है | दिव्या बहन, सादर अभिवादन! और पूरा समर्थन आपके विचारों का!

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    आदरणीय भाई साहब, सादर प्रणाम अपना कीमती समय और बेशकीमती समर्थन के लिए आप का ह्रदय से आभार :)

आर.एन. शाही के द्वारा
March 6, 2013

आपके इन्कार करने भर से नहीं मान लूँगा कि आपको यह दिव्य ज्ञान मेरे ज्ञानी जी के अतिरिक्त भी कोई दे सकता है । इसकी रायल्टी तो आपको आज नहीं तो कल गुरुद्वारे पहुँचानी ही होगी । खैर, क्या ज्ञान दिया है मेरे गुरु ने । एक-एक वाक्य से मौलिकता की खुशबू आ रही है । बधाई ! सत्य है कि प्रेम किसी दिवस निर्धारण का कभी मोहताज़ नहीं हो सकता । यह एहसास तो फ़ूल में रची-बसी खुशबू की तरह तब तक फ़ूल के साथ ही चिपका रहेगा, जब तक उसका वज़ूद बरक़रार है । परन्तु एहसास को पुष्ट होने के लिये अभिव्यक्ति आवश्यक है, अन्यथा बहुत सारे अफ़ेयर्स (मामले) अनकहे रहकर ही बेमौत मर जाते हैं । यदि रूबरू होने का मौका है, तो एहसास बाँडी लैंगुएज के माध्यम से भी अभिव्यक्त किया जा सकता है । दूरी है, पत्रमित्रता है, या आज की सोशल नेटवर्किंग वाला अफ़ेयर है, फ़िर तो खुलकर किये गए इजहार के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता । जहाँ भावनात्मक लगाव होगा, वहाँ एकदूसरे को सम्मान देने के लिये भी अलग से कुछ सोचने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी, सम्मान भाव भी खुद ब खुद प्रकट होगा । अफ़ेयर (मामला) यदि व्यापारिक है, तो मुस्कुराहट और इजहार भी व्यावसायिक ही होंगे, जिसे आदान-प्रदान करने वाले दोनों ही खूब समझते हैं । कुछ अफ़ेयर ‘मान न मान मैं तेरा मेहमान’ वाले भी होते हैं, जिन्हें यदि भूलवश गर्दन में एक बार लटका लिया जाय, फ़िर तो पूछिये मत । आप इधर-उधर भागकर गर्दन झटकते रहिये, इस रिश्ते का मरा साँप जल्दी गर्दन छोड़ने के लिये तैयार ही नहीं होता । यह सारा ज्ञान मुझे मेरे गुरुदेव परम ज्ञानी जी महाराज ने ही दिया है, जिसे मैं एक थीसिस के रूप में एसेम्बुल कर बहुत शीघ्र ही आप सभी मित्रों के समक्ष प्रस्तुत करने वाला हूँ ।

    jlsingh के द्वारा
    March 7, 2013

    श्रद्धेय शाही साहब, सादर अभिवादन! हम इंतज़ार करेंगे ज्ञानी जी महाराज के थीसिस का! एस्सेम्बुल होने में और कितना वक्त लगेगा? पर दिव्या बहन की बातों में है दम!

    आर.एन. शाही के द्वारा
    March 7, 2013

    दिव्या विद्वान (विदुषी) हैं । उनकी बातों में दम झलकना कोई नई बात नहीं है । हमेशा ही बड़ी-बड़ी बातें बहुत सहज ढंग से कह जाती हैं । पढ़ते समय रचना अत्यन्त साधारण सी लगती है, परन्तु उसके मर्म सतसैया के दोहरों जैसे पैने होते हैं । मैं तो जानबूझ कर सबसे ऊपरी पंक्तियों को ही पकड़कर बैठ गया, क्योंकि मुझे इसवक़्त महिला दिवस पर बहस करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी । मैं किसी महिला को प्रेम की प्रतिकृति से अलग रूप में नहीं देख पाता । चाहे माँ हो, बहन हो, प्रेयसी हो, या माता रानी ही क्यों न हों । और जहाँ प्रेम भाव होगा, वहाँ सम्मान खुद ब खुद बिना बुलाए पहुँच जाएगा । प्रेम अर्थात भावनात्मक सम्बंध । अपने से किसी श्रेष्ठ के प्रति भी जब तक प्रेम और श्रद्धा का भाव नहीं पैदा होता, हम उसे हृदय से सम्मान दे ही नहीं सकते । दिखावे की बात और है, जो दूर से ही समझ में आ जाता है ।

    div81 के द्वारा
    March 10, 2013

    आदरणीय शाही जी, सादर प्रणाम सर जी मुझे नहीं पता था आपने ये नाम रजिस्ट्रेसन करवाया है :) …. वैसे आप के बोलने से पहले ही एक खोखा चढावा चढ़ा आये थे :) आप के थीसिस का इन्तजार रहेगा

    div81 के द्वारा
    March 10, 2013

    आदरणीय भाई साहब,  सादर प्रणाम आप के दमदार समर्थन के लिए ह्रदय से आभार :)

    div81 के द्वारा
    March 12, 2013

    मंच के सभी विद्वान और प्रबुद्धजनों के बीच हमेशा से सिखने को मिला है, और सब के सानिध्य में रह के मेरी लेखनी में थोडा बहुत सुधार भी हुआ है और अब भी मैं सीख ही रही हूँ ….  आप की बात से सहमत हूँ मैं भी यही बोल रही थी कि प्यार सच्चा हो तो वो तो अपने आप को मनवा ही लेता है | उसमे दिखावे की जरूरत नहीं पड़ती | आपने अपना कीमती समय दिया इसके लिए आप का ह्रदय से आभार …………. एक सामान्य ब्लोगर   :) ………. 


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