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सच का आइना

Posted On: 1 May, 2013 Others में

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हिंदुस्तानी नाम हमारा है, सबसे प्यारा देश हमारा है

हिंदुस्तानी नाम हमारा है, सबसे प्यारा देश हमारा है

हौसला है गर तुझ में तो उसको इस तरह आजमा  लेना

रोता हो गर कोई अंजान भी तो दामन अपना थमा देना


गूंजती है किसीके दिल में अरमानो की शहनाई

वो नहीं उसका जारा ये सच्चाई उसे बता देना


सियासतदाँ ने बेच दी है आबरू मुल्क की

खुदा हर घर में भगत, जैसी औलादें देना


नापाक इरादे है सीमा पे दुश्मनों के

बेटो के सिर पर कफ़न फिर सजा देना


गुमान बहुत है और है बहुत वो मगरूर भी

कोई तो उसको सच का आइना दिखा देना



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31 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

priti के द्वारा
May 10, 2013

बहुत सुंदर प्रस्तुति ………..हार्दिक बधाई! दिव्या जी…..

seemakanwal के द्वारा
May 8, 2013

बहुत खूब . बधाई

Rachna Varma के द्वारा
May 4, 2013

बहुत बढ़िया , सियासतदाँ ने बेच दी है आबरू मुल्क की खुदा हर घर में भगत, जैसी औलादें देना बहुत सुन्दर और यथार्थवादी कविता |

    divya (div 81) के द्वारा
    May 4, 2013

    आदरणीया रचना जी, मेरे छोटे से प्रयास कि सरहाना के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

Aakash Tiwaari के द्वारा
May 4, 2013

आदरणीया दिव्या जी, इन लाइनों पर कुछ भी लिखना मेरे बस में नही.. बस इतना कहूँगा..सच में इन पंक्तियों को पढ़ते हुए रोंगटे खड़े हो गए,…. आकाश तिवारी

    divya (div 81) के द्वारा
    May 4, 2013

    आदरणीय आकाश तिवारी जी, मंच में पुराने साथियों को देखना सुखद अनुभूति देता है लंबे अंतराल के बाद आप की कोई प्रतिक्रिया प्राप्त हुई अच्छा लगा …………  आप का स्वागत और शुक्रिया  

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 4, 2013

    मै खुद इस मंच से दूर नही रहना चाहता मगर समय का आभाव ………अब पूरी कोशिश होगी कम से कम हफ्ते में 3 दिन जरुर उपलब्ध रहूँ.. साथ देने और स्वागत करने हेतु धन्यवाद आकाश तिवारी

aman kumar के द्वारा
May 3, 2013

गागर मे सागर जैसे रचना ………………

    divya (div 81) के द्वारा
    May 4, 2013

    अमन कुमार जी आप का तहे दिल से शुक्रिया

vinitashukla के द्वारा
May 3, 2013

संवेदनशील सार्थक रचना. अच्छी पोस्ट पर बधाई और साधुवाद.

    divya (div 81) के द्वारा
    May 4, 2013

    आदरणीया विनीता जी, सादर आप का तहे दिल से शुक्रिया

roshni के द्वारा
May 2, 2013

दिव्या जी… बहुत सुंदर भाव उकेरे आपने .. हर पंक्ति कुछ कह रही है .. और ये अंतिम पंक्ति तो सरे सच बयाँ कर रही है गुमान बहुत है और है बहुत वो मगरूर भी कोई तो उसको सच का आइना दिखा देना….. आज हम सब किसी एक गुमान में जी रहे है की हम सुरक्षित है मगर इस कविता में ये निचोड़ लगा की ये hamara वेहम है … न जाने कब हमारे सियासतदानो के कारन हम फिर से कही गुलाम न हो जाये … सच का सामना समय रहते कर लिया जाये तो ही बेहतर है … युही लिखते रहिये

    divya (div 81) के द्वारा
    May 3, 2013

    रौशनी जी,… हम कभी आजाद हो ही नहीं पाए है अभी भी हमारी मानसिकता गुलामो जैसी ही है अंग्रेजो की जो फुट डालो नीति थी उसी को हमारे नेता अपनाये हुए है जब भी चुनाव आने को होगा धर्म के नाम पे विवाद पैदा कर दिया जायेगा बाँट दिया जाएगा हिंदुस्तान को … और हमारी मानसिकता भी तो वो ही है कोई भी आता है हम झुक जाते है भूल जाने की बीमारी है… इसी का फायदा नेता उठाते आये है और उठाते रहेंगे … मजाल है कोई नेता अपने देश के खिलाफ आग उगले और वो फिर से जीत जाए मगर हमारे देश में ये ही होता है …  शुक्रिया आप का

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 4, 2013

    रौशनी जी और दिव्या जी, हालत अपने देश की अब कुछ ऐसी है की लोग तरीके ढूँढते है की कोई ऐसा नया तरीका मिल जाये जिससे देश का भला हो जाये….अरे अरे मैंने गलत लिख दिया ..(अपना भला हो जाये)….. आकाश तिवारी

    divya (div 81) के द्वारा
    May 4, 2013

    आकाश जी, ये सब देख के बहुत देख होता है हम किस दिशा में बढ़ रहे है… नैतिकता को जो पतन हो रहा है समाज गर्त कि तरफ जा रहा है …………..

chaatak के द्वारा
May 2, 2013

नापाक इरादे है सीमा पे दुश्मनों के बेटो के सिर पर कफ़न फिर सजा देना जबतक राजनीतिक प्रतिबद्धता नहीं होगी सरकार स्वयं साहसी नहीं होगी, संसद में कायर बैठे होंगे, हमारी ये इच्छा भी अधूरी रहेगी, हम नापाक दुश्मनों के हाथो मरेंगे लेकिन हमारे सर पर कफ़न नहीं होगा क्योंकि सर तो दुश्मन काट कर साथ ले जायेंगे हाँ हमारे शरीर अगर वे छोड़ गए तो शायद कफ़न-घोटाले के बाद जो थोडा बहुत बच जाएगा उसे जरूर ओढा दिया जाएगा| अच्छे मनोभावों पर हार्दिक बधाई!

    divya (div 81) के द्वारा
    May 3, 2013

    चातक जी आप का गुस्सा जायज है …. हम सरकार से कोई भी उम्मीद नहीं कर सकते रक्षक ही जब भक्षक बन जाए तो मासूमो को हथियार उठा लेने चाहिए ……….. तभी ये चाहा है की हर घर में भगत सिंह जैसी ओलत होगी तो हिंदुस्तान की तस्वीर बदल जायेगी ……….फिर किसी की टेढ़ी नजर नहीं उठा पाएगी …  आप का तहे दिल से शुक्रिया

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 4, 2013

    आदरणीय चटक जी, आपने तो शब्दों का ऐसा तमाचा मर है की की स्वाभिमानी इंसान का सर झुक जाये ..मगर अगर इस लाइन को अगर को संसद का सदस्य पढ़ रहा होगा तो उसे अपनी तारीफ़ ही नजर आएगी..बहुत उम्दा कहा आपने.. आकाश तिवारी

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 4, 2013

    गलत नाम लिखने पर बहुत शर्मिंदा हूँ..चातक जी..माफ़ करें..

jlsingh के द्वारा
May 1, 2013

दिव्य रोशनी के साथ ही अर्धशतक दिव्या +रोशनी पूर्ण शतक. पूर्णता!! हौसला है गर तुझ में तो उसको इस तरह आजमा लेना रोता हो गर कोई अंजान भी तो दामन अपना थमा देना इतनी अच्छी बात दिव्य ज्योति ज्ञान के बाद ही आती है! हमारी सुरक्षा करने वाले नौजवान की बात ही निराली है!

    divya (div 81) के द्वारा
    May 2, 2013

    आदरणीय भाईसाहब सादर परनाम रौशनी और मैं मजबूती से टेस्ट मैच खेल रहे है धीमी मगर मजबूत पारी  :) अभी दोनों का मिल के शतक पूरा हुआ है आगे स्कोर और बढ़ेगा ……………. आप का तहे दिल से शुक्रिया

shashi bhushan के द्वारा
May 1, 2013

आदरणीय दिव्या जी, सादर ! “”सियासतदाँ ने बेच दी है आबरू मुल्क की खुदा हर घर में भगत, जैसी औलादें देना”" आपके इस निवेदन की आवाज के साथ भारत के सवा अरब नागरिकों का स्वर अनुगुंजित है ! और इतने लोगों की मासूम प्रार्थनाएं कभी भी व्यर्थ नहीं जायेंगी ! सादर !!

    divya (div 81) के द्वारा
    May 2, 2013

    आदरणीय शशि भूषण जी,  सादर प्रणाम भगवान करे ऐसा ही हो ये दुआ पूरी हो जाए विश्व गुरु देश मेरा फिर से नए ऊँचाईयों में पहुंचे … आप का तहे दिल से शुक्रिया

yogi sarswat के द्वारा
May 1, 2013

सियासतदाँ ने बेच दी है आबरू मुल्क की खुदा हर घर में भगत, जैसी औलादें देना नापाक इरादे है सीमा पे दुश्मनों के बेटो के सिर पर कफ़न फिर सजा देना भुजाओं में ताकत हमारी भी है ये अलग बात है की हमने इंसानियत का सौदा नहीं किया ! दिव्या जी , सीमा पर तैनात ज़वान हमें हर पल ये आभास कराते हैं की उनके रहते सीमाएं सुरक्षित हैं किन्तु उन नराधमों का क्या करियेगा जिनके आदेश पर ही पहली गोली निकलती है ? सुन्दर जोशीले शब्द

    divya (div 81) के द्वारा
    May 2, 2013

    आदरणीय योगी जी,  सदार प्रणाम दुःख इसी बात का है हमारे वीर जांबाज सैनिक विपरीत परस्थितियों का भी डट के सामना करते है और यहाँ कुछ गिनेचुने लोग देश को बर्बाद करने में तुले हुए है… इंकलाबी वो दौर आ जाना चाहिए जब घर घर में भगत सिंह जैसे बच्चे हो और ऐसे गद्दार देश छोड़ के जाने में विवश हो जाए …. आप का तहे दिल से शुक्रिया

alkargupta1 के द्वारा
May 1, 2013

दिव्या , न जाने कितने कफ़न सजते रहेंगे …….. नापाक इरादों के हालातों की सच्ची दास्ताँ बयां करती श्रेष्ठ कृति

    divya (div 81) के द्वारा
    May 2, 2013

    आदरणीया अलका मैम,  सदार प्रणाम आप  का तहे दिल से शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
May 1, 2013

बहुत सुन्दर रचना दिव्या नापाक इरादे है सीमा पे दुश्मनों के बेटो के सिर पर कफ़न फिर सजा देना गुमान बहुत है और है बहुत वो मगरूर भी कोई तो उसको सच का आइना दिखा देना

    divya (div 81) के द्वारा
    May 2, 2013

    आदरणीया निशा मैम,  सादर प्रणाम आप का तहे दिल से शुक्रिया

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 1, 2013

स्नेही दिव्या जी सादर अर्ध शतक मुबारक गजल के तो क्या कहने वाह. बधाई

    divya (div 81) के द्वारा
    May 2, 2013

    आदरणीय चाचा जी,  सादर प्रणाम आप का तहे दिल से शुक्रिया


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