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माँ तुम मेरी सहेली हो

Posted On: 9 May, 2013 Others में

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खुशियों का सबब तुम से ही तो है
खुशियों का सबब तुम से ही तो है

माँ तुम अबूझ पहेली हो
माँ तुम मेरी सहेली हो
स्नेह की डोर से बंधी
ममता की तुम मूरत हो
हर लेती मेरे दुखो को
उस ख़ुदा की ही सूरत हो
मेरा सोता हुआ चेहरा भी
जाने कैसे पढ़ लेती हो
कितनी अलाओं बलाओं से
मुझ को रोज बचाती हो
निकलती हूँ जब भी घर से
नजर का टीका लगाती हो
भर के नए जज़्बे मुझ मे
हार को जीत बनाती हो,
दे के प्यारा सा एक बोसा
माथे पर तिलक लगाती हो,
नेह भरे स्पर्श से तुम
सारे दुःख हर जाती हो..
माँ तुम अबूझ पहेली हो
माँ तुम मेरी सहेली हो



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34 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ऋषभ शुक्ला के द्वारा
May 16, 2013

इस सुन्दर रचना के लिए बधाई, मैंने भी “Mother`s Day“ पर एक कविता लिखी है उसे पढ़िए और हमारा मार्गदर्शन कीजिये http://rushabhshukla.jagranjunction.com/?p=१३ शुक्रिया .

Shweta के द्वारा
May 16, 2013

माँ तो बस माँ है ……..हर शब्दावली छोटी है उसके लिए …

priti के द्वारा
May 14, 2013

बहुत सुंदर ! हार्दिक बधाई! दिव्या ……..

    div81 के द्वारा
    May 15, 2013

    प्रीती जी,  सादर आप का तहे दिल से शुक्रिया

आर.एन. शाही के द्वारा
May 14, 2013

माँ ही एक साथ समस्त भूमिकाओं का निर्वहन कर सकती है । माता, पिता, बन्धु, सखा ।

    div81 के द्वारा
    May 15, 2013

    आदरणीय शाही जी,  सादर प्रणाम आप का तहे दिल से शुक्रिया

yamunapathak के द्वारा
May 13, 2013

ek प्यारी सी कविता के लिए बधाई.

    div81 के द्वारा
    May 15, 2013

    आदरणीया यमुना जी सादर आप का तहे दिल से शुक्रिया

sumit के द्वारा
May 13, 2013

:) सुन्दर कविता …….. :)

    div81 के द्वारा
    May 15, 2013

    आप का शुक्रिया

shashi bhushan के द्वारा
May 11, 2013

आदरणीय दिव्या जी, सादर ! माँ की महिमा दर्शाती, सुन्दर और हृदयग्राही चित्र से सजी यह प्रस्तुति दिल छू गई ! हार्दिक बधाई !

    div81 के द्वारा
    May 15, 2013

    आदरणीय शशिभूषण जी, सादर प्रणाम अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आप का ह्रदय से आभार

jlsingh के द्वारा
May 11, 2013

आदरणीया दिव्या बहन, सस्नेह ! ऊपर के चित्र और शब्द चित्र दोनों ही अनमोल हैं!…बस और कोई शब्द नहीं! माँ तुम महान हो! माँ तुम भगवान हो! सहेली मित्र गुरु समान हो!

    div81 के द्वारा
    May 15, 2013

    आदरणीय भाई साहब सादर प्रणाम,  अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आप का ह्रदय से आभार

vinitashukla के द्वारा
May 10, 2013

माँ से बड़ा हितैषी कोई नहीं. बच्चा, अपनी स्नेही माँ के समक्ष, दिल खोलकर रख देता है. उसके साथ अपनी हर पीड़ा, हर खुशी बांटना चाहता है. माँ से बढ़कर, वफादार दोस्त और कौन हो सकता है जो अपने हर स्वार्थ को, संतान की खुशियों पर कुर्बान कर देती है. सुंदर, भावनात्मक पोस्ट पर साधुवाद.

    div81 के द्वारा
    May 15, 2013

    आदरणीया विनीता जी,  बिलकुल माँ से बड़ा हितैषी कोई नहीं होता एक माँ ही होती है जो बिन बोले सब समझ जाती हैं | बच्चो की खुशी के लिए अपना दुःख दर्द भी भुला जाती हैं ……………….. आप का तहे दिल से शुक्रिया  

alkargupta1 के द्वारा
May 10, 2013

माँ की ममता पूर्ण भावों व अति सुन्दर शब्दों से सुसज्जित उत्कृष्ट कृति दिव्या

    div81 के द्वारा
    May 15, 2013

    आदरणीया अलका मैम,  सादर प्रणाम आप की अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

rekhafbd के द्वारा
May 10, 2013

दिव्या जी नेह भरे स्पर्श से तुम सारे दुःख हर जाती हो.. माँ तुम अबूझ पहेली हो माँ तुम मेरी सहेली हो,बहुत सुन्दर

    div81 के द्वारा
    May 15, 2013

    आदरणीया रेखा जी,  आप का तहे दिल से शुक्रीया

Himanshu Nirbhay के द्वारा
May 10, 2013

दिव्या जी, “माँ” को बड़े सुन्दरता से परिभाषित करती हुयी रचना से परिचय करने के लिए आपका आभार | “मेरा सोता हुआ चेहरा भी जाने कैसे पढ़ लेती हो कितनी अलाओं बलाओं से मुझ को रोज बचाती हो निकलती हूँ जब भी घर से नजर का टीका लगाती हो” अप्रितम….

    div81 के द्वारा
    May 10, 2013

    आदरणीय हिमांशु जी,  अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
May 10, 2013

नेह भरे स्पर्श से तुम सारे दुःख हर जाती हो.. माँ तुम अबूझ पहेली हो माँ तुम मेरी सहेली हो बहुत सुन्दर रचना / मेरी माँ पर एक रचना है / http://rajeshkumarsrivastav.jagranjunction.com/2013/05/09/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A4%98%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

    divya (div 81) के द्वारा
    May 10, 2013

    राजेश कुमार श्रीवास्तव जी,  आप का तहे दिल से शुक्रिया

omdikshit के द्वारा
May 10, 2013

भाव-पूर्ण अभिव्यक्ति,दिव्या जी.नमस्कार.

    divya (div 81) के द्वारा
    May 10, 2013

    आदरणीय ओम दीक्षित जी, रचना की सराहना के लिए आप का ह्रदय से आभार

Aakash Tiwaari के द्वारा
May 9, 2013

Div जी, तारीफ किसकी करूँ तस्वीर की, कविता की या फिर आपकी… आपने उम्दा रचना प्रस्तुत की,…तस्वीर ने दुनिया के सबसे खूबसूरत प्यार को दिखाया और ..कविता ने इस तस्वीर में जान डाल दी.. बस एक बात कहूँगा..कोई शब्द नहीं ………. आकाश तिवारी

    divya (div 81) के द्वारा
    May 10, 2013

    आकाश जी,  मुक्त कंठ से सरहना के लिए आप का ह्रदय से आभार

Rachna Varma के द्वारा
May 9, 2013

माँ को समर्पित एक उत्कृष्ट कविता …..

    divya (div 81) के द्वारा
    May 10, 2013

    आदरणीया रचना जी, आप का तहे दिल से शुक्रिया

roshni के द्वारा
May 9, 2013

सुंदर यु कहिये अति सुंदर माँ कितनी सुंदर होती है, मेरा गम हो तो तू खुद रोती है मुझे सुलाया जग जग क्र रातों में , मेरी फिकर में अब बी कहाँ तू सोती है सुंदर रचना पर बधाई

    divya (div 81) के द्वारा
    May 10, 2013

    माँ होती ही सुंदर है सारे गमो को समेट के आपने आंचल की ठंडी छाँव देती हैं…. आप का तहे दिल से शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
May 9, 2013

माँ के प्रति सुन्दर भावनाओं से परिपूर्ण सुन्दर रचना पर बधाई दिव्या.

    divya (div 81) के द्वारा
    May 10, 2013

    आदरणीया निशा मैम,  सादर प्रणाम आप का तहे दिल से शुक्रिया


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