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बेबस हिंदी

पोस्टेड ओन: 14 Sep, 2013 जनरल डब्बा में

मैं घर की बेटी
घर में ही परायी हो गयी
तू विदेश से आई
और घर भर की प्यारी हो गयी
एक वो समय भी था
मेरी बोली में सब वारे वारे जाते थे
मुझ पर गर्व था सबको इतना
गर्व से फूले नहीं समाते थे
गाँव देहात मेरा अपना अंगना था
शहर में भी रिश्ता जन्मो का था
मैं सीधी सरल और मीठी कहलाती थी
कोई दो बोल, बोल देतो उसको हो जाती थी
बाबा हिमालय की गोद में खेली
भारत माता की दुलारी थी
उत्तर से पूरब तक सबकी प्यारी थी
समय ने देखो कैसी करवट ली
अंग्रेजी का अधिकार हो गया है
मेरा ही घर आंगन मुझसे
अंजना बेगाना हो गया है
पूछा उसको जाता है
जिसको अंग्रेजी आती है
हिंदी तो कोने में खड़ी
चुपके चुपके नीर बहाती है
पहले आदर सत्कार होता था मेरा
अब दुत्कार दिया जाता है
विदेशी संस्कृति से प्रेरित हो के
एक उपकार मेरे उपर भी कर दिया है
अंग्रेजी ने साल का एक दिन
मेरे नाम सुरक्षित कर दिया है
साल में एक बार मेरा जन्मदिन
फिर भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है
१४ सितम्बर आते ही, हिंदी पखवाड़े में
मुझ को भी याद कर लिया जाता है

कैसी विडम्बना है ये मेरी कैसी बेबसी
अपने ही घर में हो गयी मैं परायी



Tags: हिंदी दिवस   सम्मान हिंदी का  

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ashutosh Shukla के द्वारा
April 6, 2014

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति दिव्या जी….

yogi sarswat के द्वारा
September 18, 2013

मेरा ही घर आंगन मुझसे अंजना बेगाना हो गया है पूछा उसको जाता है जिसको अंग्रेजी आती है हिंदी तो कोने में खड़ी चुपके चुपके नीर बहाती है पहले आदर सत्कार होता था मेरा अब दुत्कार दिया जाता है विदेशी संस्कृति से प्रेरित हो के एक उपकार मेरे उपर भी कर दिया है अंग्रेजी ने साल का एक दिन मेरे नाम सुरक्षित कर दिया है साल में एक बार मेरा जन्मदिन फिर भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है सुन्दर शब्द दिव्या जी !

Bhagwan Babu के द्वारा
September 18, 2013

सुन्दर रचना… हिन्दी  के लिए… बधाई…

September 18, 2013

समय ने देखो कैसी करवट ली अंग्रेजी का अधिकार हो गया है मेरा ही घर आंगन मुझसे अंजना बेगाना हो गया है sarthak abhivyakti .

jlsingh के द्वारा
September 17, 2013

आदरणीया दिव्या बहन, सादर अभिवादन! आपने हिंदी की व्यथा कथा को बहुत ही मर्मान्तक शब्दों से नवाजा है … यथा .. विदेशी संस्कृति से प्रेरित हो के एक उपकार मेरे उपर भी कर दिया है अंग्रेजी ने साल का एक दिन मेरे नाम सुरक्षित कर दिया है साल में एक बार मेरा जन्मदिन फिर भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है १४ सितम्बर आते ही, हिंदी पखवाड़े में मुझ को भी याद कर लिया जाता है कैसी विडम्बना है ये मेरी कैसी बेबसी अपने ही घर में हो गयी मैं परायी

rekhafbd के द्वारा
September 17, 2013

१४ सितम्बर आते ही, हिंदी पखवाड़े में मुझ को भी याद कर लिया जाता है कैसी विडम्बना है ये मेरी कैसी बेबसी अपने ही घर में हो गयी मैं परायी,बहुत सुन्दर रचना दीप्ति जी ,बधाई

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 17, 2013

भावात्मक कविता मन श्रुभ्द हो गया.. आभार ,…

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
September 17, 2013

वेबश हिंदी ,,,,एक वेदनामय प्रस्तुति है बधाई,,,,,,,ॐ..शांति ….शांति ….शांति ,,,,

yamunapathak के द्वारा
September 17, 2013

सुन्दर भावाभिव्यक्ति दीप्ति जी साभार

Madan Mohan saxena के द्वारा
September 17, 2013

बहुत खूब हिंदी दिवस पर सार्थक रचना हेतु बधाई हर पंक्ति दिल में उतर गयी ,बहुत उम्दा रचना। कभी यहाँ भी पधारें। सादर मदन

nishamittal के द्वारा
September 14, 2013

बहुत खूब हिंदी दिवस पर सार्थक रचना हेतु बधाई दिव्या

    div81 के द्वारा
    September 15, 2013

    शुक्रिया मैम

allrounder के द्वारा
September 14, 2013

नमस्कार दिव्या जी… हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं आपको … हिंदी दिवस पर आज देश मैं ही अलग – थलग पड़ी और कहीं कहीं उपेक्षित हिंदी भाषा को समर्पित आपकी सारगर्भित रचना पर आपको हार्दिक बधाई ….

    div81 के द्वारा
    September 15, 2013

    सचिन जी, आप का तहे दिल से शुक्रिया आप को भी हिंदी दिवस की बधाई ये हमारी विडम्बना ही कहेंगे की राजभाषा होने के बाद भी सिर्फ एक दिन हिंदी दिवस को समर्पित कर देते है एक बार फिर से आप का आभार

roshni के द्वारा
September 14, 2013

दिव्या जी हिंदी दिवस के अवसर पर इक सार्थक रचना बहुत ही बढिया आपको भी हिंदी दिवस की बधाई हो .. इसी तरह हम सब हिंदी दिवस में ही नहीं बल्कि हमेशा अपनी प्यारी हिंदी का सम्मान करते रहे लिखते रहे .. आभार

    div81 के द्वारा
    September 14, 2013

    तवरित प्रतिक्रिया के लिए आप का आभार रौशनी … आप को भी हिंदी दिवस की बधाई … 




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